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Buddha Purnima 2025 Date: बुद्ध पूर्णिमा पर लगेगी पाताल की भद्रा, जानें शुभ तिथि, मुहूर्त व महत्व

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Buddha Purnima 2025 Date: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर रवि योग बन रहा है और भद्रा लग रही है। रवि योग को शुभ योग माना जाता है।

Buddha Purnima 2025
Buddha Purnima 2025 Date: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर रवि योग बन रहा है और भद्रा लग रही है। रवि योग को शुभ योग माना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा का दिन बौद्ध धर्म के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था, जिन्होंने बौद्ध धर्म की स्थापना की थी। आइए जानते हैं इस साल बुद्ध पूर्णिमा कब है? बुद्ध पूर्णिमा का क्या महत्व है?

बुद्ध पूर्णिमा 2025 तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल पूर्णिमा तिथि 11 मई रविवार को रात 8.01 बजे से शुरू हो रही है। यह तिथि 12 मई सोमवार को रात 10.25 बजे तक रहेगी। ऐसे में वैशाख पूर्णिमा 12 मई को है। इस आधार पर इस साल बुद्ध पूर्णिमा 12 मई सोमवार को है।

बुद्ध पूर्णिमा पर रवि योग और भद्रा

वैदिक पंचांग के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा के दिन रवि योग बन रहा है इसके साथ ही भद्रा पाताल लोक की है। पंचांग के अनुसार, इस दिन सुबह के 5 बजकर 32 मिनट से रवि योग बनेगा, जो सुबह 06:17 बजे तक रहेगा। रवि योग में सभी प्रकार के दोष समाप्त हो जाते हैं। उस दिन सुबह 05:32 बजे से भद्रा शुरू हो जाएगी और यह सुबह 09:14 बजे तक रहेगी। यह भद्रा पाताल लोक में रहती है।

इस वर्ष गौतम बुद्ध की 2587वीं जयंती

12 मई को वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर भगवान बुद्ध की 2587वीं जयंती मनाई जाएगी। इस दिन बौद्ध धर्म के अनुयायी प्रार्थना करते हैं और भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का अनुसरण करने का प्रयास करते हैं। भगवान बुद्ध का जन्म वैशाख पूर्णिमा के दिन लुंबिनी में हुआ था, जो वर्तमान में नेपाल में है।

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व

बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्म के लोगों के लिए एक विशेष दिन है। भगवान बुद्ध ऐसे महापुरुष हैं, जिनके जीवन से जुड़ी 3 प्रमुख घटनाएं वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर घटित हुई थीं। भगवान बुद्ध का जन्म वैशाख पूर्णिमा के दिन हुआ था। जिस दिन बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई, वह भी वैशाख पूर्णिमा ही थी।

जब भगवान बुद्ध ने अंतिम सांस ली, वह वैशाख पूर्णिमा ही थी। बुद्ध को बिहार के बोधगया में ज्ञान की प्राप्ति हुई और कुशीनगर में उनकी मृत्यु हो गई। ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया था।

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