।। विष्णु जी का भजन - Lord Vishnu Bhajan ।।
जब भक्त बुलाते हैं, हरि दौड़ के आते हैं
(Jab Bhakt Bulate Hain Hari Daud Ke Aate Hain)
जब भक्त बुलाते हैं, हरि दौड़ के आते हैं ॥
वो तो दीन और दुखिओं को ॥
आ के गले लगाते हैं, हरि दौड़ के आते हैं,
जब भक्त बुलाते हैं, हरि दौड़ के आते हैं ॥
द्रोपदी ने जब, उन्हें पुकारा, दौड़े दौड़े आ गए ।
भरी सभा में, चीर बढ़ा के, उसकी लाज बचा गए ॥
वो बहुत दयालु हैं, वो दया के सागर हैं,
वो चीर बढ़ाते हैं, हरि दौड़ के आते हैं,
जब भक्त बुलाते हैं, हरि दौड़ के आते हैं ॥
अर्जुन ने जब, उन्हें पुकारा, सार्थी बनके आ गए ।
गीता का, उपदेश सुना के, उसका भरम मिटा गए ॥
वो ज्ञान सिखाते हैं, वो भरम मिटाते हैं,
वो गले लगाते हैं, हरि दौड़ के आते हैं,
जब भक्त बुलाते हैं, हरि दौड़ के आते हैं ॥
धन्ने ने जब, उन्हें पुकारा, ठाकुर बनके आ गए ।
पत्थरों में, दर्श दिखा के, प्रेम का भोग लगा गए ॥
वो दर्श दिखाते हैं, वो हल चलाते हैं,
वो मान बढ़ाते हैं, हरि दौड़ के आते हैं,
जब भक्त बुलाते हैं, हरि दौड़ के आते हैं ॥
मित्र सुद्दामा, द्वारे आए, दौड़े दौड़े आ गए ।
दो मुठी, सत्तू के बदले, उसका महल बना गए ॥
वो फ़र्ज़ निभाते हैं, वो गले लगाते हैं,
वो महल बनाते हैं, हरि दौड़ के आते हैं,
जब भक्त बुलाते हैं, हरि दौड़ के आते हैं ॥