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Akshat Ka Mahatav: अक्षत के बिना क्यों अधूरी मानी जाती है पूजा, जानिए धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Akshat Ka Mahatav: क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा में चढ़ाए जाने वाले अक्षत यानी साबुत चावल का इतना विशेष महत्व क्यों माना जाता है? साधारण सा दिखने वाला इस अन्न का हिन्दू धर्म में गहरा और आध्यात्मिक रहस्य है। 

Akshat Ka Mahatav:
Akshat Ka Mahatav: क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा में चढ़ाए जाने वाले अक्षत यानी साबुत चावल का इतना विशेष महत्व क्यों माना जाता है? साधारण सा दिखने वाला इस अन्न का हिन्दू धर्म में गहरा और आध्यात्मिक रहस्य है। शास्त्रों में अक्षत का अर्थ है जो टूटा हुआ न हो। यही वजह  है कि पूजा में हमेशा साबुत चावल ही चढ़ाए जाते हैं। माना जाता है कि अक्षत पूर्णता, अखंडता और समृद्धि का प्रतीक है। हिंदू पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में भी पूजा और हवन के दौरान अन्न, विशेष रूप से अक्षत, अर्पित करने का उल्लेख मिलता है।कहा जाता है कि अन्न से किए गए हवन से भगवान प्रसन्न होते हैं, और जब भगवान को भोजन अर्पित किया जाता है, तो पितरों की भी तृप्ति होती है। मान्यता है कि अक्षत के बिना की गई पूजा अधूरी मानी जाती है लेकिन आखिर ऐसा क्यों? और पूजा में टूटे हुए चावल क्यों नहीं चढ़ाए जाते हैं अगर आप इन रहस्यों को जानना चाहते हैं तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें। 

पूजा में क्यों चढ़ाए जाते हैं अक्षत 

आपको बता दें कि चावल को शास्त्रों में सबसे अच्छा अन्न माना गया है यही वजह है कि हर पूजा में अक्षत चढ़ाना बहुत शुभ माना गया है। चावल को शांति का प्रतीक माना जाता है क्योंकि इसका रंग सफेद है शास्त्रों में चावल को सबसे शुद्ध अनाज माना जाता है। पूजा में किसी भी देवता को साफ चीजें ही चढ़ानी चाहिए। चावल धान के अंदर उगता है और इसे पशु-पक्षी भी खराब नहीं कर सकते, इसलिए इसे पूजा में चढ़ाना सबसे शुभ माना जाता है। पूजा से पहले हम जो भी संकल्प लेते हैं, उसमें हम प्रार्थना करते हैं कि हमें जीवन में सफलता मिले और समस्याओं का सामना करने का साहस मिले। क्योंकि अक्षत का अर्थ होता है जो टूटा हुआ न हो, इसलिए यह एकाग्रता का भी सूचक है।

पूजा में क्यों नहीं चढ़ाया जाता टूटे चावल 

आपने हमेशा पूजा या हवन के समय ये जरूर देखा होगा कि पूजा में हमेशा साफ और साबुत चावल का इस्तेमाल किया जाता है ऐसा इसलिए क्योंकि ये मान्यता है देवी-देवताओं को टूटे हुए अक्षत नहीं चढ़ाने चाहिए। टूटे हुए अक्षत चढ़ाने से देवी-देवता नाराज हो जाते हैं। इसलिए पूजा में हमेशा साफ और सफेद चावल ही चढ़ाना चाहिए।

किस देवता को नहीं चढ़ाया जाता है अक्षत ? 

आपको बता दें कि इतना पवित्र होने के बाद कई देवी-देवताओं को अक्षत नहीं चढ़ाया जाता है जहां अक्षत देवी लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है वहीं  भगवान विष्णु और शालिग्राम की पूजा में चावल नहीं चढ़ाया जाता है  मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु की पूजा में चावल का प्रयोग वर्जित माना गया है। कहा जाता है कि यदि अनजाने में भी विष्णु पूजन में चावल अर्पित कर दिया जाए, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि यदि भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा की जा रही हो तो सफेद चावल पर कुमकुम लगाकर अर्पित किया जा सकता है, क्योंकि उस समय वह चावल लक्ष्मी स्वरूप माना जाता है। इतना ही नहीं, शालिग्राम की पूजा में भी चावल का उपयोग नहीं किया जाता। वहीं हनुमान जी को चावल अर्पित करने की परंपरा नहीं है। दूसरी ओर, भगवान शिव की पूजा में अक्षत का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन यहाँ भी एक विशेष सावधानी आवश्यक है शिव पूजा में हल्दी या कुमकुम लगे चावल अर्पित नहीं किए जाते। रंगीन चावल का उपयोग भी भगवान शिव की पूजा में वर्जित माना गया है।

अक्षत के प्रकार 

देवताओं को चढ़ाए जाने वाले अक्षत के प्रकार: देवताओं की पूजा में मुख्य रूप से दो तरह के अक्षत इस्तेमाल किए जाते हैं लाल अक्षत और सफेद अक्षत।

1. सफेद अक्षत: भक्त भगवान सत्यनारायणऔर भगवान शिव को सफेद अक्षत चढ़ाते हैं। ये निराकार या निर्गुण  सिद्धांत और तारक ऊर्जा का प्रतीक हैं। इनमें ब्रह्मांड से सूक्ष्म ऊर्जा तरंगों को आकर्षित करने की क्षमता होती है।

2. लाल अक्षत : भक्त इन्हें कुमकुम से रंगते हैं। ये सगुण सिद्धांत  और मारक ऊर्जा का प्रतीक हैं। भक्त इन्हें भगवान गणपति, देवी दुर्गा और अन्य देवताओं को चढ़ाते हैं। ये भी ब्रह्मांड से सूक्ष्म ऊर्जा तरंगों को आकर्षित कर सकते हैं।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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