Lord Ganesha Story: भगवान शिव ने अपने पुत्र गणेश का सिर काटा था, यह बात तो सभी जानते हैं और इस बारे में कई पौराणिक कथाएं भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि जब उनके पुत्र गणेश ने देवी पार्वती से मिलने से मना कर दिया
Lord Ganesha Story: भगवान शिव ने अपने पुत्र गणेश का सिर काटा था, यह बात तो सभी जानते हैं और इस बारे में कई पौराणिक कथाएं भी प्रचलित हैं। कहा जाता है कि जब उनके पुत्र गणेश ने देवी पार्वती से मिलने से मना कर दिया तो महादेव ने क्रोध में आकर अपने पुत्र गणेश का सिर काट दिया था, लेकिन इसके पीछे एक और बड़ी वजह थी। वो वजह थी महादेव को दिया गया श्राप, जिसकी वजह से उन्होंने अपने ही पुत्र को चोट पहुंचाई थी। आखिर वो कौन सा श्राप था जिसकी वजह से भगवान शिव को अपने पुत्र गणेश का सिर काटना पड़ा, आइए जानते हैं।
भगवान शिव को मिला था श्राप
शिव पुराण के अनुसार महादेव के दो भक्त थे माली और सुमाली जो बाद में राक्षस बन गए। ये दोनों स्वर्ग पर कब्जा करना चाहते थे और सूर्यदेव ऐसा नहीं होने दे सकते थे, इसलिए सूर्यदेव और इन राक्षसों के बीच युद्ध हुआ। सूर्यदेव ने स्वर्ग को राक्षसों से बचाने के लिए अपनी प्रबल शक्ति का प्रयोग किया। जब भगवान शिव माली सुमाली की आवाज सुनकर वहां पहुंचे तो दोनों भगवान शिव से सूर्यदेव के प्रकोप से बचाने के लिए प्रार्थना करने लगे।
इसलिए काटना पड़ा बेटे गणेश का सिर
भक्तों को बचाने के लिए भगवान शिव ने सूर्यदेव पर त्रिशूल से प्रहार किया और इस प्रहार से सूर्य नीचे गिर पड़े और मृत्यु के कगार पर पहुंच गए। अपने पुत्र सूर्यदेव को उस हालत में देखकर महर्षि कश्यप क्रोधित हो गए और उन्होंने भगवान शिव को श्राप दे दिया कि जिस तरह तुमने मेरे प्रिय पुत्र को मारा है, उसी तरह तुम अपने ही पुत्र को मारोगे। बाद में महर्षि कश्यप के इसी श्राप के कारण ऐसा संयोग बना जिसके कारण शंकर को अपने पुत्र गणेश का सिर काटना पड़ा।
ये है पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार जब माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं तो उन्होंने पुत्र गणेश को आदेश दिया कि किसी को भी अंदर प्रवेश न करने दें। माता की आज्ञा का पालन करने के लिए गणेश दरवाजे पर ही पहरा देने लगे। इस दौरान भगवान शिव माता पार्वती से मिलने आए लेकिन गणेश जी ने उन्हें अंदर प्रवेश करने से मना कर दिया। शिवजी ने पुत्र गणेश से कई बार रास्ते से हटने का अनुरोध किया लेकिन गणेश नहीं माने।
गणेश जी के इस बर्ताव पर भगवान भोलेनाथ बहुत ज्यादा क्रोधित हो गए और अंत में भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया। बाद में जब माता पार्वती भवन से बाहर आईं तो अपने पुत्र को इस हालत में देखकर उन्हें बहुत गुस्सा आया। जब भगवान शिव को पता चला कि गणेश उनका ही पुत्र है तो उन्हें बहुत पछतावा हुआ। जब माता पार्वती को गुस्सा आया तो उन्होंने गणेश के धड़ पर हाथी का सिर लगाकर उसे जीवित कर दिया। यह भी पढ़ें- Kailash Mansarovar: कितना मुश्किल है कैलाश मानसरोवर की यात्रा, जानें इससे जुड़े खास रहस्य
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