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Chardham Yatra 2025: आखिर यमुनोत्री से ही शुरू होती है चारधाम की यात्रा, जानें इसके पीछे का कारण

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Chardham Yatra 2025: अक्षय तृतीया के दिन से चारधाम यात्रा शुरू होगी। वर्ष 2025 में अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को है। इस दिन से श्रद्धालु यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन कर सकेंगे। चारधाम यात्रा में सबसे पहले यमुनोत्री धाम के दर्शन करने की धार्मिक मान्यता है।

Chardham Yatra 2025
Chardham Yatra 2025: अक्षय तृतीया के दिन से चारधाम यात्रा शुरू होगी। वर्ष 2025 में अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को है। इस दिन से श्रद्धालु यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन कर सकेंगे। चारधाम यात्रा में सबसे पहले यमुनोत्री धाम के दर्शन करने की धार्मिक मान्यता है। ऐसे में सवाल उठता है कि चारधाम यात्रा यमुनोत्री से ही क्यों शुरू की जाती है। इसके पीछे धार्मिक कारणों के साथ-साथ भौगोलिक कारण भी हैं। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

यमुनोत्री से ही क्यों शुरू होती है चारधाम यात्रा?

यमुनोत्री धाम माता यमुना का उद्गम स्थल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता यमुना यमराज की बहन हैं जो भय से मुक्ति दिलाती हैं। शास्त्रों में वर्णित एक कथा के अनुसार एक बार भाई दूज के दिन यम अपनी बहन यमुना से मिलने गए। यमराज ने अपनी बहन यमुना को आशीर्वाद दिया कि जो भी तुम्हारे जल में स्नान करेगा, उसके पापों का नाश हो जाएगा, उसे मृत्यु का भय नहीं रहेगा और मोक्ष की प्राप्ति होगी। इसलिए यमुनोत्री में पापों से मुक्ति पाने के बाद ही चार धाम यात्रा करना शुभ माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार यमुनोत्री से यात्रा शुरू करने पर श्रद्धालुओं को चार धाम यात्रा में किसी भी प्रकार की बाधा का सामना नहीं करना पड़ता है।

ये हैं भौगोलिक कारण

चार धाम यात्रा में चार मुख्य तीर्थस्थल यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ हैं। चार धाम यात्रा के दौरान यमुनोत्री पश्चिम में पड़ता है और इसके बाद ही अन्य धाम आते हैं। इसलिए भौगोलिक स्थिति को समझते हुए स्वाभाविक रूप से यात्रा यमुनोत्री से शुरू होती है।

धार्मिक कारण

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार पश्चिम से पूर्व की ओर धार्मिक यात्रा करना शुभ होता है। पश्चिम से पूर्व की ओर दक्षिणावर्त यात्रा शुभ मानी जाती है। इसलिए चार धाम यात्रा हमेशा यमुनोत्री से ही शुरू की जाती है। यमुनोत्री में स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं को आगे बढ़ना चाहिए।

आध्यात्मिक दृष्टि

यमुनोत्री को पवित्रता के साथ-साथ आध्यात्मिक उत्थान की नदी भी माना जाता है। यमुनोत्री में स्नान करने से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक पवित्रता प्राप्त होती है। मन शांत और शांतिपूर्ण हो जाता है। यहां मन की शुद्धता प्राप्त करने के बाद भक्त आध्यात्मिक पथ पर भी आगे बढ़ते हैं। इसके बाद केदारनाथ और बद्रीनाथ की खड़ी चढ़ाई भी उन्हें आसान लगने लगती है।

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