Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा और महिषासुर की कथा का विशेष महत्व माना जाता है। पुराणों में महिषासुर को एक ऐसे असुर के रूप में बताया गया है, जिसने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान प्राप्त कर लिया था, जिसके बाद उसे अपनी शक्ति पर घमंड हो गया। आखिर महिषासुर ने ऐसा कौन-सा वरदान मांगा था? उसे यह वरदान कैसे मिला और वरदान पाते ही उसने देवताओं को चुनौती क्यों दे डाली? आइए जानते हैं महिषासुर के वरदान की पूरी पौराणिक कथा।
महिषासुर ने की कठोर तपस्या
पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर असुरों का शक्तिशाली राजा था। वह अपनी शक्ति बढ़ाना चाहता था और इसके लिए उसने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने का निश्चय किया। इसके बाद महिषासुर ने लंबे समय तक कठोर तपस्या की। कहा जाता है कि उसकी तपस्या इतनी कठिन थी कि तीनों लोकों में इसकी चर्चा होने लगी। लंबे समय तक तपस्या करने के बाद ब्रह्मा जी उसके सामने प्रकट हुए और उससे वरदान मांगने को कहा।
अमर होने की मांगी इच्छा
ब्रह्मा जी के सामने प्रकट होने पर महिषासुर ने उनसे अमर होने का वरदान मांग लिया। हालांकि, ब्रह्मा जी ने उसे समझाया कि संसार में जन्म लेने वाले किसी भी प्राणी का पूरी तरह अमर होना संभव नहीं है। इसके बाद महिषासुर ने ऐसा वरदान मांगने के बारे में सोचा, जिससे उसे अपनी मृत्यु का डर न रहे। उसने ब्रह्मा जी से कहा कि उसकी मृत्यु किसी पुरुष के हाथों न हो। उसे विश्वास था कि कोई स्त्री इतनी शक्तिशाली नहीं हो सकती, जो उसे युद्ध में हरा सके।
स्त्री के हाथों मृत्यु का वरदान
महिषासुर ने वरदान में यह शर्त रखी कि उसकी मृत्यु किसी देवता, दानव या पुरुष के हाथों न हो। उसकी मृत्यु केवल किसी स्त्री के हाथों ही हो सके। महिषासुर को लगता था कि स्त्री के लिए उसे पराजित करना असंभव होगा। इसी विश्वास के कारण उसने इस वरदान को अपने लिए लगभग अमरता के समान मान लिया। ब्रह्मा जी ने उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर उसकी इच्छा के अनुसार वरदान दे दिया। वरदान मिलते ही महिषासुर की शक्ति और उसका आत्मविश्वास दोनों बढ़ गए।
वरदान मिलते ही बढ़ा घमंड
वरदान मिलने के बाद महिषासुर को अपनी शक्ति पर इतना विश्वास हो गया कि उसके व्यवहार में अहंकार आ गया। उसे लगने लगा कि अब उसे कोई भी पराजित नहीं कर सकता। महिषासुर ने अपनी शक्तिशाली सेना तैयार की और देवताओं के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। उसने देवताओं के लोक पर अधिकार करने की कोशिश शुरू कर दी। धीरे-धीरे उसका प्रभाव बढ़ता गया और देवताओं के लिए उसका सामना करना कठिन हो गया।
देवताओं को दी चुनौती
महिषासुर ने अपनी शक्ति के बल पर देवताओं को चुनौती दे दी। उसके साथ बड़ी संख्या में असुर भी थे। युद्ध में उसने देवताओं को परेशान कर दिया और कई कथाओं में उसके द्वारा स्वर्ग पर अधिकार करने का वर्णन मिलता है। वरदान के कारण देवता भी उसके सामने असहाय नजर आने लगे, क्योंकि महिषासुर को ऐसा वर प्राप्त था कि किसी पुरुष के हाथों उसकी मृत्यु नहीं हो सकती थी। यही वरदान उसके अहंकार की सबसे बड़ी वजह बन गया। उसे विश्वास हो गया था कि कोई भी देवता उसका अंत नहीं कर सकता।
देवताओं ने मां दुर्गा की रचना की
जब महिषासुर के अत्याचार बढ़ने लगे और देवता उसकी शक्ति का सामना नहीं कर सके, तब सभी देवताओं ने अपनी-अपनी शक्तियों को एक साथ किया। पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति का प्राकट्य हुआ, जिन्हें मां दुर्गा के रूप में जाना गया। अलग-अलग देवताओं ने देवी को अपने-अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। मां दुर्गा ने महिषासुर से युद्ध करने का संकल्प लिया। यही वह बात थी, जिसकी कल्पना महिषासुर ने वरदान मांगते समय नहीं की थी।
मां दुर्गा से हुआ महिषासुर का युद्ध
महिषासुर और मां दुर्गा के बीच भयंकर युद्ध हुआ। महिषासुर अपनी शक्ति के बल पर लगातार देवी को चुनौती देता रहा। पौराणिक कथा के अनुसार, वह युद्ध के दौरान अलग-अलग रूप धारण करके देवी को भ्रमित करने का प्रयास करता था, लेकिन मां दुर्गा ने उसके हर रूप और हर वार का सामना किया। लंबे युद्ध के बाद देवी ने महिषासुर का वध कर दिया। इस तरह महिषासुर ने जिस वरदान को अपनी सबसे बड़ी सुरक्षा समझा था, वही उसके अंत की वजह बना। उसने पुरुषों से अजेय होने का वरदान तो प्राप्त कर लिया था, लेकिन एक स्त्री के रूप में प्रकट हुई मां दुर्गा की शक्ति का उसने अनुमान ही नहीं लगाया था।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)