Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। देवी से जुड़ी पौराणिक कथाओं में महिषासुर के अलावा कई ऐसे राक्षसों का भी वर्णन मिलता है, जिन्होंने देवी की शक्ति को चुनौती दी थी। इन्हीं में एक नाम धूम्रलोचन का है। पौराणिक कथा के अनुसार, धूम्रलोचन को देवी से युद्ध करने के लिए भेजा गया था, लेकिन वह अपनी शक्ति और अहंकार के कारण मां दुर्गा के सामने ज्यादा देर टिक नहीं सका। क्या आपको पता है कि धूम्रलोचन ने मां दुर्गा को युद्ध के लिए क्यों ललकारा और उसका अंत कैसे हुआ? आइए जानते हैं पूरी कथा...
धूम्रलोचन को शुंभ ने भेजा था
देवी भागवत और मार्कंडेय पुराण से जुड़ी देवी महात्म्य की कथा में शुंभ और निशुंभ नाम के असुरों का वर्णन मिलता है। दोनों असुरों ने अपनी शक्ति के बल पर देवताओं को पराजित कर दिया था। इसी दौरान शुंभ को देवी के अद्भुत रूप और शक्ति के बारे में पता चला। शुंभ देवी को अपने अधिकार में लेना चाहता था। उसने पहले अपना दूत देवी के पास भेजकर विवाह का प्रस्ताव रखा। देवी ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने प्रण लिया है कि जो उन्हें युद्ध में पराजित करेगा, वही उनका पति बनेगा। देवी की बात सुनकर शुंभ क्रोधित हो गया।
धूम्रलोचन को मिला आदेश
देवी के इस उत्तर से शुंभ का अहंकार और बढ़ गया। उसने अपने सेनापति धूम्रलोचन को आदेश दिया कि वह अपनी विशाल सेना लेकर जाए और देवी को पकड़कर उसके सामने लेकर आए। शुंभ को विश्वास था कि धूम्रलोचन अपनी ताकत के बल पर देवी को आसानी से पराजित कर देगा। आदेश मिलते ही धूम्रलोचन बड़ी सेना के साथ देवी के पास पहुंचा।
देवी को दी युद्ध की चुनौती
धूम्रलोचन ने देवी को शुंभ का आदेश सुनाया और उन्हें अपने साथ चलने के लिए कहा। देवी ने उसकी बात स्वीकार नहीं की। इसके बाद धूम्रलोचन ने देवी को बलपूर्वक ले जाने का प्रयास किया। यहीं से देवी और धूम्रलोचन के बीच युद्ध शुरू हो गया। धूम्रलोचन के साथ बड़ी संख्या में असुर सैनिक भी थे। उसे अपनी शक्ति और सेना पर बहुत घमंड था।
मां दुर्गा ने किया सामना
धूम्रलोचन ने देवी पर आक्रमण कर दिया। मां दुर्गा ने भी उसका सामना किया। दोनों के बीच भयंकर युद्ध होने लगा। धूम्रलोचन अपनी पूरी शक्ति के साथ देवी से लड़ रहा था, लेकिन देवी के सामने उसकी शक्ति कमजोर पड़ने लगी। पौराणिक कथा के अनुसार, जब धूम्रलोचन ने देवी पर आक्रमण करने का प्रयास किया, तब मां दुर्गा ने केवल हुंकार भरकर ही उसका अंत कर दिया।
एक हुंकार में हुआ अंत
धूम्रलोचन को अपनी शक्ति पर बहुत अभिमान था, लेकिन देवी की शक्ति के सामने वह टिक नहीं सका। मां दुर्गा की हुंकार से धूम्रलोचन वहीं भस्म हो गया। धूम्रलोचन के मारे जाने के बाद उसके साथ आई असुर सेना ने देवी पर हमला कर दिया। मां दुर्गा ने अपने अस्त्र-शस्त्रों से उस सेना का भी सामना किया और बड़ी संख्या में असुरों का संहार कर दिया। धूम्रलोचन और उसकी सेना के मारे जाने की खबर जब शुंभ तक पहुंची तो वह क्रोधित हो उठा। उसे उम्मीद नहीं थी कि उसका शक्तिशाली सेनापति इतनी जल्दी देवी के हाथों मारा जाएगा। इसके बाद शुंभ ने देवी से युद्ध करने के लिए दूसरे शक्तिशाली असुरों को भेजा। इस तरह देवी और असुरों के बीच युद्ध आगे भी जारी रहा। धूम्रलोचन का वध इसी युद्ध की एक महत्वपूर्ण घटना माना जाता है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)