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Shani Pradosh Vrat Katha: शनि प्रदोष व्रत के दिन अवश्य सुनें ये कथा, शनिदोष से मिलेगा छुटकारा!

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Shani Pradosh Vrat: शनि प्रदोष व्रत केवल उपवास और पूजा का अवसर नहीं है, बल्कि यह शनि ग्रह के अशुभ प्रभावों से मुक्ति का भी विशेष साधन है।

शनि प्रदोष व्रत के दिन अवश्य सुनें ये कथा, शनिदोष से मिलेगा छुटकारा!
Shani Pradosh Vrat Story in Hindi: हिंदू धर्म में प्रत्येक माह की प्रदोष तिथि का विशेष महत्व है। जब यह तिथि शनिवार के दिन आती है, तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना करने से शनिदोष का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। शास्त्रों के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उनके जीवन से कष्ट दूर होते हैं। शास्त्रों में भी वर्णित है कि शनि प्रदोष व्रत करने से शनि दोष का नाश होता है। जीवन में सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। स्वास्थ्य, आय, और समृद्धि में वृद्धि होती है। घर-परिवार में सुख-शांति का वास होता है।

शनि प्रदोष व्रत की विधि

  • व्रती को प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
  • दिनभर उपवास रखें और संयमपूर्वक रहें।
  • संध्या समय शिवलिंग का जल, गंगाजल, दूध, दही, घृत, शहद एवं शक्कर से अभिषेक करें।
  • इसके बाद शिवलिंग पर बिल्वपत्र, धूप, दीप, फल एवं पुष्प अर्पित करें।
  • साधुजन द्वारा बताए गए अथवा शिवपुराण में वर्णित मंत्रों का जप करें।
  • रात्रि में व्रती को कथा श्रवण, भजन-कीर्तन एवं स्तुति के माध्यम से भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए।

शनि प्रदोष व्रत की कथा 

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक नगर में एक धनी सेठ रहते थे। सेठजी के घर में धन-वैभव, नौकर-चाकर, सुख-सुविधाओं की कोई कमी न थी। सेठानी भी अत्यंत सुशील और धर्मपरायण थीं। परंतु एक ही दुःख था। उनके घर संतान नहीं थी। इसी कारण सेठ और सेठानी के जीवन में हमेशा उदासी और विषाद छाया रहता था।

एक दिन सेठ और सेठानी ने विचार किया कि वे अपनी सारी जिम्मेदारी नौकरों को सौंपकर तीर्थयात्रा पर जाएं। यात्रा प्रारंभ करते ही नगर से बाहर निकलने पर उन्हें एक साधु मिले, जो गहन ध्यान में लीन थे। सेठ और सेठानी श्रद्धा से उनके समीप बैठ गए और साधु के ध्यान खुलने का धैर्यपूर्वक इंतजार करने लगे। जब साधु ने नेत्र खोले तो उन्होंने दिव्य दृष्टि से जान लिया कि यह दंपत्ति संतान सुख से वंचित है और आशीर्वाद की प्रतीक्षा कर रहा है।

“हे सेठ! हे सेठानी! मैं तुम्हारा दुःख जानता हूं। यदि तुम शनि प्रदोष व्रत श्रद्धा भाव से करोगे तो निश्चय ही तुम्हें संतान सुख प्राप्त होगा। यह व्रत शिवजी को अति प्रिय है और इसके प्रभाव से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।” साधु ने उन्हें व्रत की विधि बताई और भगवान शंकर की वंदना भी स्मरण कराई।

हे रुद्रदेव शिव नमस्कार।  शिवशंकर जगगुरु नमस्कार॥  
हे नीलकंठ सुर नमस्कार।  शशि मौलि चन्द्र सुख नमस्कार॥  
हे उमाकांत सुधि नमस्कार।  उग्रत्व रूप मन नमस्कार॥  
ईशान ईश प्रभु नमस्कार।  विश्वेश्वर प्रभु शिव नमस्कार॥  


आशीर्वाद देकर साधु ने उन्हें विदा किया और दंपत्ति आगे तीर्थयात्रा पर चले गए। तीर्थयात्रा से लौटने के पश्चात सेठ और सेठानी ने विधिपूर्वक शनि प्रदोष व्रत करना आरंभ किया। वे दिनभर उपवास रखते, संध्या समय भगवान शिव की पूजा करते, दीप प्रज्वलित कर शिवलिंग पर जल, बिल्वपत्र और धूप-दीप अर्पित करते। साथ ही साधु द्वारा बताए गए मंत्र और वंदना का श्रद्धापूर्वक जप करते। इस व्रत के प्रभाव से शीघ्र ही उनके घर एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ। उनका जीवन खुशियों से भर गया और वे संतोषपूर्वक भक्ति में लीन रहने लगे।

शनि प्रदोष व्रत के फल

शनि प्रदोष व्रत करने से व्रती को संतान सुख की प्राप्ति होती है। जीवन में आने वाली सभी विघ्न-बाधाएं, शनि दोष और पितृ दोष दूर हो जाते हैं। इस व्रत से धन, ऐश्वर्य, आरोग्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। अंत में व्रत करने वाला भगवान शिव के परम धाम को प्राप्त करता है।

शनि प्रदोष व्रत से मिलने वाली शिक्षा

शनि प्रदोष व्रत कथा से यह शिक्षा मिलती है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया व्रत कभी व्यर्थ नहीं जाता। भगवान शिव अपने भक्तों के सभी दुःख हर लेते हैं और असंभव को भी संभव बना देते हैं। इस व्रत का महात्म्य सुनना, सुनाना और उसका पालन करना पापों का नाश करने वाला तथा अपार पुण्य प्रदान करने वाला है। अतः जो भी मनुष्य पूर्ण श्रद्धा और निष्ठा से शनि प्रदोष व्रत करता है, वह जीवन में सुख-समृद्धि, संतान-सुख, शांति और अंततः मोक्ष का अधिकारी बनता है।

शनि प्रदोष व्रत का महत्व

शनि प्रदोष व्रत न केवल शनि ग्रह के दोष निवारण का उपाय है, बल्कि यह भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ साधन भी है। इस दिन व्रत करने से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में दिव्य आशीर्वाद का प्रवेश होता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या में हैं। लंबी बीमारी, आर्थिक संकट या परिवारिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। जीवन में स्थिरता और मानसिक शांति प्राप्त करना चाहते हैं।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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