Manikarnika Ghat Ka Rahasy: काशी नगरी देवों के देव महादेव को प्रिय है। सनातन धर्म में इस नगरी का बहुत महत्व है। काशी में गंगा नदी के तट पर मणिकर्णिका घाट स्थित है। इसे मोक्षदायनी घाट और महाश्मशान के नाम से भी जाना जाता है।
Manikarnika Ghat Ka Rahasy: काशी नगरी देवों के देव महादेव को प्रिय है। सनातन धर्म में इस नगरी का बहुत महत्व है। काशी में गंगा नदी के तट पर मणिकर्णिका घाट स्थित है। इसे मोक्षदायनी घाट और महाश्मशान के नाम से भी जाना जाता है। यह काशी के प्रमुख गंगा घाटों में शामिल है। यह एक ऐसा घाट है जहां हमेशा चिताएं जलती रहती हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार करने से व्यक्ति जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। काशी खंड में इस नगरी का विस्तार से वर्णन किया गया है। काशी में व्यक्ति की मृत्यु को शुभ माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि काशी में मृत्यु को शुभ क्यों माना जाता है? यदि आप नहीं जानते हैं, तो आज इस खबर में मणिकर्णिका घाट के बारे में विस्तार से जानते हैं।
काशी खंड में इसका उल्लेख है
मरणं मंगलं यत्र विभूतिश्च विभूषणम्
कौपीनं यत्र कौशेयं सा काशी केन मीयते।
काशी खंड के इस श्लोक में काशी नगरी के महत्व को बताया गया है। इस श्लोक का अर्थ है कि काशी में मृत्यु शुभ होती है। जो व्यक्ति इस नगरी में अपने प्राण त्यागता है, उसे फिर से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। त्वत्तीरे मरणं तु मङ्गलकरं देवैरपि श्लाध्यते
शक्रस्तं मनुजं सहस्रनयनैर्द्रष्टुं सदा तत्परः ।
आयान्तं सविता सहस्रकिरणैः प्रत्युग्दतोऽभूत्सदा
पुण्योऽसौ वृषगोऽथवा गरुडगः किं मन्दिरं यास्यति॥
काशी खंड के इस श्लोक के अनुसार, मणिकर्णिका घाट पर किसी की मृत्यु होना शुभ माना जाता है, जो इस नगरी में अपने प्राण त्यागता है। इंद्र देवता उसे देखने के लिए बहुत व्याकुल रहते हैं। इसके अलावा सूर्य देव अपनी किरणों से उसकी आत्मा का स्वागत करते हैं।