Krishna Birth: भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की यह कथा हमें विश्वास दिलाती है कि जब संसार में अधर्म बढ़ता है, तब ईश्वर किसी न किसी रूप में धर्म की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। पहरेदारों का सो जाना और जेल के द्वार खुलना इसी दैवी लीला का हिस्सा माना जाता है।
Krishna Janmashtami Katha: भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हिंदू धर्म की सबसे प्रसिद्ध और अद्भुत पौराणिक कथाओं में से एक है। मान्यता है कि जब कंस के अत्याचार बढ़ गए और धर्म संकट में पड़ गया, तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में देवकी के गर्भ से जन्म लिया। कृष्ण का जन्म मथुरा की उस जेल में हुआ था, जहां उनके माता-पिता देवकी और वसुदेव को कंस ने कैद कर रखा था। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि जन्म के समय जेल की कड़ी सुरक्षा के बावजूद सभी पहरेदार गहरी नींद में सो गए और कारागार के दरवाजे भी अपने आप खुल गए। आखिर ऐसा क्यों हुआ और इसमें भगवान की कौन-सी दिव्य लीला मानी जाती है? आइए जानते हैं श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी यह रोचक पौराणिक कथा।
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा की कारागार में हुआ था। उनके पिता वसुदेव और माता देवकी को कंस ने जेल में बंद कर रखा था। दरअसल, कंस को आकाशवाणी के माध्यम से यह चेतावनी मिली थी कि देवकी की आठवीं संतान ही उसका वध करेगी। यह सुनकर कंस भयभीत हो गया और उसने देवकी तथा वसुदेव को कारागार में डाल दिया। कंस देवकी की संतानों को जन्म लेते ही मार देता था। इसी कारण जब देवकी की आठवीं संतान के जन्म का समय आया तो कंस ने जेल की सुरक्षा और भी कड़ी कर दी। कारागार के बाहर कई सैनिक और पहरेदार तैनात किए गए थे, ताकि बच्चे को किसी भी तरह बाहर न ले जाया जा सके।
भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आधी रात के समय भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी के गर्भ से जन्म लिया। मान्यता है कि उनके जन्म के समय पूरी मथुरा में एक अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण बन गया था। कारागार में भगवान के प्रकट होते ही देवकी और वसुदेव ने उनके दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने वसुदेव को आदेश दिया कि वे उन्हें गोकुल में नंद बाबा के घर पहुंचा दें। वहां उसी समय यशोदा माता के घर एक कन्या का जन्म हुआ था।
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क्यों सो गए थे जेल के पहरेदार?
कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय कारागार में तैनात सभी पहरेदार अचानक गहरी नींद में सो गए। इसे सामान्य नींद नहीं, बल्कि भगवान की योगमाया का प्रभाव माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म ही अधर्म के अंत और धर्म की स्थापना के लिए हुआ था। इसलिए उनकी रक्षा के लिए स्वयं दैवी शक्ति ने परिस्थितियां अनुकूल कर दीं। कहा जाता है कि पहरेदारों के सो जाने के साथ ही कारागार के दरवाजों पर लगे मजबूत ताले भी अपने आप खुल गए। वसुदेव ने बाल कृष्ण को टोकरी में रखा और आधी रात में उन्हें लेकर गोकुल की ओर निकल पड़े।
यमुना ने भी दिया वसुदेव का साथ
जब वसुदेव भगवान कृष्ण को लेकर यमुना नदी के पास पहुंचे तो नदी का जल काफी बढ़ा हुआ था। मान्यता है कि भगवान की लीला से यमुना का जल वसुदेव के लिए रास्ता देने लगा। इसी दौरान शेषनाग ने अपने फन फैलाकर बाल कृष्ण को वर्षा से बचाया। वसुदेव अंततः कृष्ण को गोकुल पहुंचाकर यशोदा के पास छोड़ आए और वहां जन्मी कन्या को लेकर मथुरा की जेल में लौट आए। वापस आने के बाद कारागार के दरवाजे फिर बंद हो गए और पहरेदारों की नींद भी खुल गई।
इस कथा से क्या मिलता है संदेश?
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की यह कथा हमें विश्वास दिलाती है कि जब संसार में अधर्म बढ़ता है, तब ईश्वर किसी न किसी रूप में धर्म की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। पहरेदारों का सो जाना और जेल के द्वार खुलना इसी दैवी लीला का हिस्सा माना जाता है। जन्माष्टमी पर भक्त इसी विश्वास और श्रद्धा के साथ भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।