facebook pixel
विज्ञापन
Home  mythology  hanuman ji why did hanuman ji take eleven faces know mythological story related to it

Hanuman Ji: आखिर हनुमान जी ने क्यों लिया था एकादश मुख, जानें इससे जुड़ी पौराणिक कथा

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Hanuman Ji: सनातन धर्म में सभी देवी-देवताओं की पूजा के लिए विशेष दिन निर्धारित किए गए हैं। मंगलवार का दिन भगवान पवनपुत्र हनुमान की पूजा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। बल और बुद्धि के दाता बजरंग बली जी को माना जाता है।

Hanuman Ji
Hanuman Ji: सनातन धर्म में सभी देवी-देवताओं की पूजा के लिए विशेष दिन निर्धारित किए गए हैं। मंगलवार का दिन भगवान पवनपुत्र हनुमान की पूजा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। बल और बुद्धि के दाता बजरंग बली जी को माना जाता है। इनकी शक्ति असीमित है। साथ ही इन्हें असमीमित शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है। मान्यता है कि मंगलवार के दिन विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा करने से वे अपने भक्तों के जीवन के सभी संकट दूर कर देते हैं, यही कारण है कि उन्हें संकट मोचन भी कहा जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि देवता भी संकटों से मुक्ति पाने के लिए हनुमान जी की पूजा करते आए हैं। हम आपको ऐसी ही एक पौराणिक कथा बताने जा रहे हैं, जिसमें देवताओं की सहायता करने और समस्त लोकों में उत्पात मचाने वाले दुष्ट राक्षस कालकारमुख का नाश करने के लिए पवनपुत्र हनुमान जी को ग्यारह मुख वाला रूप धारण करना पड़ा था।

हनुमान जी के ग्यारह मुख वाले रूप की कथा

बजरंग बली जी के ग्यारह मुख वाले रूप धारण करने के पीछे एक पौराणिक कथा है जो बहुत ही ज्यादा प्रचलित है। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में ग्यारह मुख वाला एक शक्तिशाली दानव हुआ करता था, जिसका नाम कालकारमुख था। उसने एक बार भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की। कालकारमुख की तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे अपनी पसंद का वरदान मांगने को कहा, जिस पर कालकारमुख ने ब्रह्मा जी से अमरता का वरदान मांगा।

इस पर ब्रह्मा जी ने उसे अमरता का वरदान असंभव बताते हुए कोई अन्य वरदान मांगने को कहा, जिसके बाद कालकारमुख ने ब्रह्मा जी से कहा कि, मुझे ऐसा वरदान दीजिए कि जो भी मेरी जन्म तिथि पर ग्यारह मुख धारण करेगा, वह मेरा अंत करने में सक्षम हो। ब्रह्मा जी ने कालकारमुख को यह वरदान भी दे दिया।

पौराणिक कथा के अनुसार ब्रह्मा जी से मनचाहा वरदान पाने के बाद कालकारमुख ने उत्पात मचा दिया। यहां तक कि उसने देवताओं और उनकी सेना को भी आतंकित करना शुरू कर दिया। मौका पाकर उसने देवताओं पर आक्रमण कर दिया और उन्हें परास्त कर दिया। इस दौरान कालकारमुख ने सभी लोकों में आतंक मचा रखा था। इस बीच लाचार देवता भगवान श्री हरि विष्णु के पास पहुंचे और उनसे कालकारमुख दैत्य के आतंक को रोकने का अनुरोध किया।

इस पर भगवान श्री हरि विष्णु जी ने कहा कि मैं पहले से ही श्री राम के रूप में पृथ्वी पर विद्यमान हूं। आप इस समस्या के समाधान के लिए श्री राम के पास जाएं। इस पर सभी देवता पृथ्वी पर भगवान राम के पास पहुंचे और इस संकट से उबारने की प्रार्थना की। इस पर राम जी ने देवताओं से कहा कि उन्हें इस संकट से केवल हनुमान जी ही उबार सकते हैं।

कथा के अनुसार, भगवान राम की अनुमति से हनुमान जी ने चैत्र पूर्णिमा के दिन ग्यारह मुख वाला रूप धारण किया था, जो राक्षस कालकारमुख की जन्म तिथि थी। जब राक्षस कालकारसुर को इस बात का पता चला तो वह हनुमान जी को मारने के लिए सेना लेकर निकल पड़ा। कालकारमुख के इस कृत्य को देखकर हनुमान जी क्रोधित हो गए और क्षण भर में उसकी सेना का नाश कर दिया। तब हनुमान जी ने कालकारमुख की गर्दन पकड़ी और बड़े वेग से उसे आकाश में ले गए, जहां उन्होंने कालकारसुर का वध कर दिया।

यह भी पढ़ें- Bhagwan Vishnu Matsya Avatar: भगवान श्री विष्णु ने क्यों लिया था मत्स्य अवतार, जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा

यह भी पढ़ें- The Mystery of Kalighat Temple: भारत में कहां हैं काली माता का सबसे प्रसिद्ध मंदिर, जानिए इसका इतिहास

 

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel