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Hanuman Ji Katha: हनुमान जी पर इंद्रदेव ने क्यों किया था प्रहार? जानें पौराणिक कथा

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Bajrangbali Story: हनुमान जी के बचपन की यह कथा केवल एक दिव्य घटना के रूप में नहीं देखी जाती, बल्कि यह उनके अद्भुत साहस और असाधारण शक्ति का भी प्रतीक मानी जाती है। 
 

Hanuman Ji Katha
Indradev attacked Hanuman: भगवान हनुमान बचपन से ही बहुत शक्तिशाली और बेहद चंचल स्वभाव के थे। उन्हें अपनी शक्तियों का पूरा ज्ञान नहीं था, लेकिन उनमें असाधारण बल और साहस था। बाल अवस्था में हनुमान जी सूर्यदेव को देखकर उन्हें फल समझ बैठे और उन्हें खाने के लिए आकाश की ओर उड़ चले। हनुमान जी की यह अद्भुत छलांग देखकर देवता भी आश्चर्यचकित रह गए। वे तेजी से सूर्यदेव की ओर बढ़ रहे थे। उसी समय देवराज इंद्र ने उन्हें रोकने का प्रयास किया।

पौराणिक कथा के अनुसार, इंद्रदेव को लगा कि बाल हनुमान सूर्यदेव की ओर बढ़कर कोई अनर्थ कर सकते हैं। उस समय आकाश में राहु भी सूर्य को ग्रहण करने के लिए पहुंचा था। हनुमान जी को देखकर राहु को भ्रम हुआ कि सूर्य को ग्रहण करने वाला कोई दूसरा प्राणी आ गया है। इसके बाद इंद्रदेव ने अपने वज्र का प्रयोग किया। उनका वज्र बाल हनुमान जी की ठोड़ी पर लगा। इसके कारण हनुमान जी आकाश से गिर पड़े और उनकी ठोड़ी पर चोट आई। इसी वजह से उन्हें ‘हनुमान’ नाम से भी जोड़ा जाता है। ‘हनु’ का संबंध ठोड़ी से माना जाता है।

वज्र के प्रहार से पवनदेव हुए नाराज

हनुमान जी को चोट लगने से उनके पिता माने जाने वाले पवनदेव अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने अपनी गति रोक ली। वायु के रुक जाने से पूरे संसार में जीवन संकट में पड़ गया, क्योंकि सभी जीवों के लिए वायु आवश्यक है। देवताओं को जब इस स्थिति का पता चला तो वे चिंतित हो गए। उन्हें समझ आया कि बाल हनुमान कोई साधारण बालक नहीं हैं। इसके बाद सभी देवता पवनदेव को शांत करने और हनुमान जी को आशीर्वाद देने के लिए पहुंचे।

देवताओं ने हनुमान जी को दिए वरदान

पवनदेव को शांत करने के लिए देवताओं ने बाल हनुमान जी को अनेक दिव्य वरदान दिए। अलग-अलग पौराणिक परंपराओं में इन वरदानों का वर्णन मिलता है। माना जाता है कि देवताओं ने उन्हें असाधारण शक्ति, साहस और विभिन्न अस्त्र-शस्त्रों से सुरक्षा का आशीर्वाद दिया। देवराज इंद्र ने भी अपने किए प्रहार के प्रभाव को दूर करते हुए हनुमान जी को वरदान दिया। इस घटना के बाद बाल हनुमान और भी अधिक दिव्य शक्तियों से संपन्न हो गए।

हनुमान जी की शक्ति का प्रसंग 

हनुमान जी के बचपन की यह कथा केवल एक दिव्य घटना के रूप में नहीं देखी जाती, बल्कि यह उनके अद्भुत साहस और असाधारण शक्ति का भी प्रतीक मानी जाती है। बाल हनुमान ने बिना किसी भय के सूर्य तक पहुंचने का प्रयास किया था। बाद में भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति, सेवा, बुद्धि और पराक्रम ने उन्हें सनातन परंपरा में विशेष स्थान दिया। हनुमान जी को शक्ति, साहस, भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। उनकी यह कथा बताती है कि असाधारण शक्ति के साथ सही दिशा और विवेक का होना भी आवश्यक है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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