Mauni Amavasya Ka Mahatva: मौनी अमावस्या के अवसर पर पिंडदान और तर्पण करने का विधान है। साथ ही, श्रद्धा के अनुसार अन्न और धन का दान किया जाता है। इसके अलावा पवित्र नदी में स्नान और मौन व्रत भी किया जाता है।
Mauni Amavasya Ka Mahatva: मौनी अमावस्या के अवसर पर पिंडदान और तर्पण करने का विधान है। साथ ही, श्रद्धा के अनुसार अन्न और धन का दान किया जाता है। इसके अलावा पवित्र नदी में स्नान और मौन व्रत भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन शुभ कार्यों को करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है और पितरों का आशीर्वाद व्यक्ति पर हमेशा बना रहता है। इस दिन मौन व्रत रखने से मन पर नियंत्रण रहता है और ध्यान में एकाग्रता बढ़ती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मौनी अमावस्या का पर्व कब और क्यों मनाया जाता है? अगर नहीं, तो आइए इस लेख में आपको इसकी वजह के बारे में बताते हैं।
कब मनाई जाती है मौनी अमावस्या
पंचांग के अनुसार, हर साल माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या का पर्व मनाया जाता है। इस बार मौनी अमावस्या 29 जनवरी को है। इसे माघ अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। मौनी अमावस्या शुभ मुहू। माघ अमावस्या की तिथि 28 जनवरी को शाम 07:35 बजे से शुरू होकर 29 जनवरी को शाम 06:05 बजे समाप्त होगी।
क्यों मनाई जाती है मौनी अमावस्या?
सनातन धर्म शास्त्रों ने मौनी अमावस्या के पर्व को विशेष महत्व दिया है। अमावस्या तिथि जगत के उद्धारक भगवान विष्णु और पितरों को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन दान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा पवित्र नदी में स्नान करने का विधान है। ऐसा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन मौन व्रत रखने से वाणी शुद्ध होती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
गंगा स्नान का महत्व
हिंदू धर्म में गंगा में स्नान करना बहुत ही पवित्र माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के बड़े से बड़े पाप धुल जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार गंगा में स्नान की पवित्रता समुद्र मंथन से जुड़ी है। समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश निकला था। इसे लेकर देवताओं और दानवों में विवाद हुआ। अमृत कलश के लिए छीना-झपटी हुई। इस दौरान कलश की कुछ बूंदें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरीं। अमृत गिरने से इन जगहों पर बहने वाली नदियों का पानी पवित्र हो गया। यही वजह है कि त्योहारों, पूर्णिमा और अमावस्या पर गंगा में स्नान किया जाता है।