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Wedding Rituals : विवाह में फेरों के बाद क्यों दिखाया जाता है ध्रुव तारा, जानिए मान्यता

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Wedding Rituals: हिंदू शादियों में अनगिनत रस्में होती हैं जिनके बारे में हम सभी को पता नहीं होता। सात फेरों के सात वचनों से लेकर सिंदूरदान की रस्म, मंडप में हल्दी की रस्म और कन्यादान की रस्म तक ऐसे अनगिनत रीति-रिवाज हैं 

Wedding Rituals
Wedding Rituals: हिंदू शादियों में अनगिनत रस्में होती हैं जिनके बारे में हम सभी को पता नहीं होता। सात फेरों के सात वचनों से लेकर सिंदूरदान की रस्म, मंडप में हल्दी की रस्म और कन्यादान की रस्म तक ऐसे अनगिनत रीति-रिवाज हैं जो हिंदू शादियों को खास बनाते हैं। हिंदू शादियों में एक और रस्म वह है जिसमें फेरों के बाद दूल्हा-दुल्हन को उत्तर दिशा में मौजूद ध्रुव तारा दिखाया जाता है। हिंदू धर्म में, शादियों के दौरान कई रस्में निभाई जाती हैं जिनमें से हर एक का कोई न कोई धार्मिक या ज्योतिषीय कारण होता है। आइए इस रस्म का महत्व और शादीशुदा ज़िंदगी पर इसके असर के बारे में बताते हैं।

ध्रुव तारा हमेशा अच्छी किस्मत का आशीर्वाद देता है

ऐसा माना जाता है कि जैसे ध्रुव तारा आसमान में स्थिर रहता है, वैसे ही नए शादीशुदा जोड़ों के जीवन में प्यार भी हमेशा बना रहता है। उनका रिश्ता अटूट रहे और कभी अलग न हो। अटूट रिश्ते का प्रतीक माने जाने वाले ध्रुव तारा यह आशीर्वाद देता है। यह यह संदेश भी देता है कि नए शादीशुदा जोड़े एक साथ खुशहाल ज़िंदगी जिएंगे। पोल स्टार पति-पत्नी के रिश्ते में मिठास की निशानी है।धार्मिक मान्यता के अनुसार ध्रुव तारा को वीनस स्टार भी कहा जाता है। जब शादी की रस्मों के दौरान ध्रुव तारा दिखाया जाता है, तो इसका मतलब है कि कपल का रिश्ता भविष्य में भी मीठा रहेगा क्योंकि वीनस ग्रह को प्यार और खुशी का प्रतीक माना जाता है। ध्रुव तारा को इस इच्छा के साथ दिखाया जाता है कि पति-पत्नी दोनों को पोल स्टार की तरह हमेशा रहने वाला और मीठा रिश्ता मिले। ध्रुव तारा की स्थिरता यह संदेश देती है कि होने वाला कपल भी अपने रिश्ते में स्थिर रहेगा और उनकी ज़िंदगी में कोई रुकावट नहीं आएगी।

शादीशुदा ज़िंदगी में प्यार बना रहे, इसकी कामना

कहा जाता है कि दुनिया के सभी तारे और ग्रह समय-समय पर अपनी जगह बदलते रहते हैं, लेकिन ध्रुव तारा ही ऐसा है जो हमेशा एक ही जगह पर रहता है। शादी की रस्मों के दौरान दूल्हा-दुल्हन को ध्रुव तारा दिखाने का एकमात्र मकसद उनकी ज़िंदगी के लिए यह इच्छा ज़ाहिर करना है कि चाहे उन्हें कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं वे अपने रिश्ते को मज़बूत बनाए रखें। जैसे यह तारा तूफ़ान और बदलते समय के बावजूद अपनी जगह पर बना रहता है वैसे ही ज़िंदगी में चाहे कितने भी सुख-दुख आएं पति-पत्नी दोनों को एक-दूसरे के लिए अपना प्यार बनाए रखना चाहिए। शादी के समय ध्रुव तारा देखना बहुत शुभ माना जाता है और इससे शादीशुदा ज़िंदगी में खुशियों का आशीर्वाद भी मिलता है।
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।) 

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