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Kalashtami 2025: वैशाख माह में कब है कालाष्टमी व्रत? जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
निधि
सार

वैशाख कालाष्टमी 20 अप्रैल 2025 शुक्रवार को है। मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में राहु और केतु अशुभ हैं उन्हें कालाष्टमी के दिन विशेष रूप से काल भैरव की पूजा करनी चाहिए।

Kalashtami 2025
Vaishakh Kalashtami 2025 Date: वैशाख माह में कालाष्टमी आ रही है। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन भक्त देवों के देव महादेव के पांचवें अवतार माने जाने वाले काल भैरव की पूजा करते हैं। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। इस महीने कालाष्टमी का व्रत 20 अप्रैल को रखा जाएगा। मान्यता है कि अगर भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं तो वे उनकी हर मनोकामना सुनते हैं और उनका जीवन सुखमय बनाते हैं। आइए जानते हैं कालाष्टमी व्रत की तिथि, पूजा मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।

वैशाख कालाष्टमी 2025 तिथि (Vaishakh Kalashtami 2025 Date)

 वैशाख महीने की कालाष्टमी 20 अप्रैल 2025 शुक्रवार को मनाई जाएगी। कालाष्टमी के दिन विशेष रूप से काल भैरव की पूजा करनी चाहिए। इससे आप भगवान शिव की कृपा बनी रहेगी। 

वैशाख कालाष्टमी 2025 मुहूर्त (Vaishakh Kalashtami 2025 Muhurat)

पंचांग के अनुसार वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 20 अप्रैल 2023 को सुबह 07 बजे से शुरू होगी. यह तिथि 21 अप्रैल 2025 को सुबह 06:58 बजे समाप्त होगी. कालाष्टमी के दिन रात्रि में काल भैरव की पूजा करने का विशेष महत्व है।

अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक
अमृत काल- सुबह 06:43 बजे से सुबह 08:24 बजे तक
त्रिपुष्कर योग- सुबह 11:48 बजे से शाम 07:00 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग- 21 अप्रैल सुबह 11:48 बजे से सुबह 05:50 बजे तक
रवि योग- सुबह 05:51 बजे से सुबह 11:48 बजे तक

कालाष्टमी पूजन विधि (Kalashtami Puja Vidhi)

कालाष्टमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की साफ-सफाई करें। स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लें और पवित्र जल से आमचन करें। अब सबसे पहले सूर्य देव को जल चढ़ाएं और फिर भगवान शिव की पूजा करें। इस दिन भगवान शिव के स्वरूप काल भैरव देव की पंचामृत, दूध, दही, बिल्व पत्र, धतूरा, फल, फूल, धूपबत्ती आदि से पूजा करें। अंत में भगवान शिव की आरती करते हुए अपनी मनोकामनाएं भगवान के सामने रखें। पूरे दिन व्रत रखें। शाम को आरती के बाद फल खाएं। अगले दिन स्नान और पूजा के बाद व्रत खोलें।

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