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Vat Savitri 2025: अगर आप पहली बार रखने जा रहे हैं वट सावित्री व्रत, तो जान लें सही नियम

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
निधि
सार

Vat Savitri 2025: हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को वट सावित्री व्रत रखा जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए वट या बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं.

Vat Savitri 2025
Vat Savitri 2025: हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को वट सावित्री व्रत रखा जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए वट या बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को ही यमराज ने वट वृक्ष के नीचे माता सावित्री के पति सत्यवान के प्राण लौटाए थे. कहा जाता है कि वट सावित्री व्रत रखने से पति की आयु लंबी होती है और व्रत रखने वाली महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है. ऐसे में अगर आप शादी के बाद पहली बार वट सावित्री व्रत रखने जा रही हैं तो इन बातों का खास ख्याल रखें.

पहली बार वट सावित्री व्रत कैसे करें? 

अगर आप शादी के बाद पहली बार व्रत रख रही हैं तो सुबह स्नान करके लाल रंग की साड़ी पहनें और दुल्हन की तरह सजें।

शुभ मुहूर्त में वट वृक्ष के पास के क्षेत्र को साफ करें और गंगाजल छिड़कें। दो बांस की टोकरियों में सप्तधान रखें।

पहली टोकरी में ब्रह्मा जी की मूर्ति और दूसरी में सावित्री-सत्यवान की तस्वीर रखें।

पूजा में वट वृक्ष की जड़ में जल, कच्चा दूध चढ़ाएं, चावल के आटे का लेप लगाएं। रोली, सिंदूर, अक्षत, पान, सुपारी, फूल, फल, बताशा आदि पूजा सामग्री चढ़ाएं।

पेड़ की 7 बार परिक्रमा करते हुए कच्चा धागा या कलावा लपेटें। कथा पढ़ें। इसके बाद सुहागिन महिलाओं को श्रृंगार सामग्री, फल, अनाज दान करें।

वट सावित्री व्रत का पालन 11 भीगे हुए चने खाकर करना चाहिए।

पूजा सामग्री

सावित्री-सत्यवान की मूर्ति, कच्चा सूत, साबुत चावल, सिंदूर, सुहाग का सामान, बांस का पंखा, लाल कलावा, धूपबत्ती, मिट्टी का दीपक, घी, बरगद का फल, मौसमी फल, फूल, इत्र, सुपारी, रोली, बताशा, सवा मीटर कपड़ा, नारियल, पान, धुर्व घास, नकदी और घर में बने पकवान और मिठाइयां आदि।

वट सावित्री व्रत का महत्व

वट यानी बरगद का पेड़, जो अमरता का प्रतीक है। सावित्री यानी वह देवी जिसने अपने पति सत्यवान के प्राण मृत्यु के मुख से वापस लाए, वह एक पतिव्रता पत्नी का अद्भुत उदाहरण है। वट वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में देवों के देव महादेव का वास होता है।

इसके अलावा पेड़ की जो शाखाएं नीचे की ओर लटकती हैं, उन्हें मां सावित्री कहा जाता है। बरगद का पेड़ सालों तक अटल रहता है। यही वजह है कि पति की लंबी उम्र की कामना के साथ वट सावित्री व्रत पर बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है।

वट सावित्री व्रत के दिन भूल से भी न करें ये गलतियां

1. वट सावित्री के दिन बरगद की टहनियों को भूलकर भी नहीं तोड़ना चाहिए. कहा जाता है कि इसे माता सावित्री का प्रतीक माना जाता है. ऐसे में बरगद के पेड़ की टहनियों को तोड़ने से आपको पूजा का शुभ फल नहीं मिलेगा।

2. वट सावित्री के दिन शादीशुदा महिलाओं को भूलकर भी सफेद, नीले और काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। सुहाग की पूजा में इन रंगों का इस्तेमाल सही नहीं माना जाता है।

3. अगर आप शादी के बाद पहली बार वट सावित्री का व्रत रख रही हैं तो सुहाग की सारी सामग्री मायके से लेकर जानी चाहिए। इसके साथ ही कहा जाता है कि पहला वट सावित्री व्रत ससुराल की बजाय मायके में ही रखना चाहिए।

4. वट सावित्री व्रत की कथा जरूर सुनें। कथा के बीच में गलती से भी अपने स्थान से नहीं उठना चाहिए। वरना आपकी पूजा अधूरी रह सकती है।

5. सावित्री पूजा में बरगद के पेड़ पर कच्चा धागा बांधा जाता है। ऐसे में परिक्रमा करते समय अपने पैरों को दूसरों से न छूने दें, वरना आपकी पूजा में बाधा आ सकती है। पूजा का शुभ फल पाने के लिए इन बातों का रखें विशेष ध्यान

वट सावित्री 2025 व्रत तिथि और मुहूर्त

वट सावित्री 2025 व्रत तिथि - 26 मई 2025 
ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि आरंभ - 26 मई 2025 दोपहर 12:11 बजे
ज्येष्ठ मास की  अमावस्या तिथि समाप्त - 27 मई 2025 को प्रातः 08:31 बजे
 

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