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Varaha Jayanti Vrat Katha: वराह जयंती पर करें इस व्रत कथा का पाठ, घर में बनी रहेगी सुख-समृद्धि

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Varaha Jayanti: पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्याक्ष नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली दैत्य था। वह भगवान ब्रह्मा का कठोर तप करके वरदान प्राप्त कर चुका था।

Varaha Jayanti
Varaha Jayanti: भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में वराह अवतार का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब दैत्य हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र में ले जाकर छिपा दिया था, तब भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण कर पृथ्वी का उद्धार किया था। इसी दिव्य अवतार की स्मृति में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को वराह जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान वराह की विधि-विधान से पूजा करने के साथ उनकी व्रत कथा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि वराह जयंती के दिन श्रद्धापूर्वक कथा का श्रवण या पाठ करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आइए जानते हैं भगवान वराह अवतार की संपूर्ण पौराणिक कथा...

क्यों लिया भगवान विष्णु ने वराह अवतार

पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्याक्ष नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली दैत्य था। वह भगवान ब्रह्मा का कठोर तप करके वरदान प्राप्त कर चुका था। वरदान के कारण उसके भीतर अत्यधिक अहंकार उत्पन्न हो गया था। अपनी शक्ति के बल पर वह देवताओं और ऋषि-मुनियों को परेशान करने लगा था। उसने तीनों लोकों में अपना आतंक फैला दिया था।

हिरण्याक्ष अपनी शक्ति के मद में देवताओं को पराजित करने के बाद भगवान विष्णु की खोज करने लगा। इसी समय उसने पृथ्वी को अपने अधिकार में लेने का विचार किया। उसने पृथ्वी को समुद्र के गहरे जल में ले जाकर छिपा दिया। पृथ्वी के जल में डूब जाने से चारों ओर हाहाकार मच गया। देवताओं और ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से पृथ्वी की रक्षा करने की प्रार्थना की।

 

वराह अवतार का महत्व

देवताओं की प्रार्थना पर प्रकट हुए वराह भगवान

जब पृथ्वी समुद्र के अथाह जल में चली गई, तब भगवान विष्णु ने उसका उद्धार करने के लिए वराह रूप धारण किया। भगवान का यह रूप अत्यंत विशाल और दिव्य था। उनका शरीर पर्वत के समान विशाल और तेज से प्रकाशित था। उन्होंने अपनी गर्जना से दिशाओं को गुंजायमान कर दिया। वराह रूप धारण करने के बाद भगवान विष्णु समुद्र में उतर गए। वे गहरे जल में जाकर पृथ्वी की खोज करने लगे। काफी प्रयास के बाद भगवान वराह ने पृथ्वी को समुद्र के भीतर खोज लिया। उन्होंने अपनी मजबूत दाढ़ों पर पृथ्वी को धारण कर लिया और उसे समुद्र से बाहर निकालने लगे।

हिरण्याक्ष ने किया भगवान वराह से युद्ध

पृथ्वी को समुद्र से बाहर निकालते समय हिरण्याक्ष की नजर भगवान वराह पर पड़ी। उसने भगवान को चुनौती देते हुए उनके मार्ग में बाधा डालने का प्रयास किया। हिरण्याक्ष भगवान वराह से युद्ध करने लगा। दैत्य और भगवान वराह के बीच भयंकर युद्ध हुआ। हिरण्याक्ष ने अपनी पूरी शक्ति से भगवान पर प्रहार किए, लेकिन भगवान वराह उसके सभी प्रहारों को विफल करते रहे। दोनों के बीच लंबे समय तक युद्ध चलता रहा। अंत में भगवान वराह ने अपने पराक्रम से हिरण्याक्ष का वध कर दिया।

 

वराह अवतार कथा 

पृथ्वी को समुद्र से बाहर लेकर आए भगवान वराह

हिरण्याक्ष का वध करने के बाद भगवान वराह ने पृथ्वी को अपनी दाढ़ों पर धारण किया और समुद्र के जल से बाहर ले आए। उन्होंने पृथ्वी को उसके स्थान पर स्थापित किया। इस प्रकार भगवान विष्णु ने पृथ्वी को दैत्य के अधिकार से मुक्त कराकर उसकी रक्षा की। पौराणिक ग्रंथों में भगवान वराह के इस रूप का वर्णन अत्यंत दिव्य रूप में मिलता है। भगवान वराह ने पृथ्वी को समुद्र से बाहर निकालकर उसे फिर से व्यवस्थित किया और देवताओं तथा समस्त प्राणियों को भय से मुक्त किया।

वराह जयंती पर क्यों पढ़ी जाती है यह कथा

धार्मिक मान्यता के अनुसार, वराह जयंती के दिन भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा करने के बाद उनकी व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करते हैं तथा भगवान वराह से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मान्यता है कि वराह जयंती के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान वराह की कथा सुनने या पढ़ने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए भी इस दिन भगवान वराह की पूजा और कथा पाठ का विशेष महत्व बताया गया है।

 

वराह अवतार कथा 

वराह जयंती पर इस तरह करें कथा का पाठ

वराह जयंती के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान की साफ-सफाई करने के बाद भगवान विष्णु और भगवान वराह का ध्यान करें। भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद भगवान वराह की पूजा करें और श्रद्धापूर्वक उनकी व्रत कथा का पाठ करें। कथा का पाठ पूरा होने के बाद भगवान विष्णु की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत कथा का पाठ शांत मन और श्रद्धा के साथ करना विशेष फलदायी माना जाता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।) 

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