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Shardiya Navratri: नवरात्रि में प्याज-लहसुन खाना क्यों रहता है वर्जित? जानें धार्मिक मान्यता

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Shardiya Navratri: नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के दौरान शरीर और मन की शुद्धता पर विशेष जोर दिया जाता है। धार्मिक परंपराओं में इस समय सात्विक भोजन करने की बात कही गई है। 

Shardiya Navratri: 
Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा के साथ खान-पान के नियमों का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। इस दौरान कई लोग व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग सामान्य भोजन करते हुए भी प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करते। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्रि में सात्विक आहार को महत्व दिया जाता है और प्याज-लहसुन को इससे अलग माना जाता है। लेकिन आखिर नवरात्रि में प्याज-लहसुन को क्यों नहीं खाया जाता है? इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है? आइए जानते हैं।

सात्विक भोजन को दिया जाता है महत्व

नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के दौरान शरीर और मन की शुद्धता पर विशेष जोर दिया जाता है। धार्मिक परंपराओं में इस समय सात्विक भोजन करने की बात कही गई है। सात्विक भोजन को हल्का, शुद्ध और मन को शांत रखने वाला माना जाता है। इसी वजह से नवरात्रि के दौरान फल, दूध, दही, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना और सेंधा नमक जैसी चीजों का सेवन किया जाता है।

प्याज-लहसुन को क्यों माना जाता है अलग

धार्मिक मान्यताओं में प्याज और लहसुन को सात्विक भोजन की श्रेणी में नहीं रखा जाता। आयुर्वेद और पारंपरिक भारतीय आहार-विचार में इन्हें ऐसे खाद्य पदार्थ माना गया है, जो शरीर में उत्तेजना बढ़ाने वाले हो सकते हैं। इसी आधार पर धार्मिक साधना और व्रत के दौरान इनसे दूरी रखने की परंपरा बनी। नवरात्रि में भक्त देवी की पूजा, मंत्र जाप और ध्यान करते हैं। मान्यता है कि इस दौरान ऐसा भोजन करना चाहिए, जिससे मन शांत रहे और पूजा-पाठ में एकाग्रता बनी रहे। इसलिए प्याज-लहसुन का सेवन न करने की परंपरा को धार्मिक अनुशासन से जोड़कर देखा जाता है।

तीन प्रकार के भोजन की मान्यता

हिंदू धार्मिक और दार्शनिक परंपराओं में भोजन को मुख्य रूप से सात्विक, राजसिक और तामसिक प्रकृति से जोड़ा गया है। सात्विक भोजन को शुद्ध और शांत प्रकृति वाला माना जाता है। राजसिक भोजन को अधिक उत्तेजना और सक्रियता से जोड़ा जाता है, जबकि तामसिक भोजन को भारी और जड़ता बढ़ाने वाला माना गया है। प्याज और लहसुन को कई धार्मिक परंपराओं में राजसिक-तामसिक प्रकृति वाला माना जाता है। इसी वजह से पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान इनका सेवन नहीं करने की परंपरा देखने को मिलती है।

नवरात्रि में क्यों छोड़ा जाता है प्याज-लहसुन

नवरात्रि के नौ दिनों को देवी साधना के लिए विशेष माना जाता है। भक्त इस दौरान अपने खान-पान और दिनचर्या में संयम रखते हैं। प्याज-लहसुन से परहेज भी इसी संयम का एक हिस्सा माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत या साधना के दौरान सात्विक भोजन करने से मन को शांत रखने और पूजा में ध्यान लगाने में सहायता मिलती है, इसलिए नवरात्रि में प्याज-लहसुन छोड़ना केवल भोजन से जुड़ा नियम नहीं, बल्कि साधना के दौरान संयम और सात्विक जीवनशैली अपनाने की परंपरा के रूप में देखा जाता है।

देवी पूजा से जुड़ी है सात्विकता

नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करते समय भक्त शुद्धता का विशेष ध्यान रखते हैं। पूजा की सामग्री से लेकर भोजन तक में सात्विकता को महत्व दिया जाता है। यही वजह है कि इस दौरान मांसाहार, शराब और कई घरों में प्याज-लहसुन का भी सेवन नहीं किया जाता। हालांकि, अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में नवरात्रि के खान-पान के नियम अलग हो सकते हैं, लेकिन धार्मिक व्रत परंपरा में सात्विक भोजन और संयम को विशेष महत्व दिया जाता है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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