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Shardiya Navratri: मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कैसे किया? जानें पूरी पौराणिक कथा

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Shardiya Navratri
Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान मां दुर्गा और महिषासुर के बीच हुए युद्ध की कथा भी विशेष रूप से सुनाई और पढ़ी जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, महिषासुर ने अपनी शक्ति के बल पर देवताओं को पराजित कर तीनों लोकों में आतंक मचा दिया था। इसके बाद देवताओं की संयुक्त शक्ति से मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ और उन्होंने महिषासुर का अंत किया, लेकिन महिषासुर इतना शक्तिशाली कैसे बना और मां दुर्गा ने आखिर उसका वध किस तरह किया? क्या आपको पता है कि युद्ध के दौरान महिषासुर ने कई रूप धारण किए थे? आइए जानते हैं पूरी पौराणिक कथा...

महिषासुर को मिला था वरदान

देवी महात्म्य, जो मार्कंडेय पुराण का एक प्रमुख हिस्सा है, में महिषासुर वध की कथा का वर्णन मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार, महिषासुर को ऐसा वरदान प्राप्त था कि उसका वध किसी पुरुष या देवता के हाथों नहीं हो सकता था। इसी वरदान के कारण उसके अंदर अहंकार बढ़ता गया और वह खुद को अजेय समझने लगा। शक्ति प्राप्त करने के बाद महिषासुर ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। भयंकर युद्ध में देवता पराजित हो गए और महिषासुर ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। देवताओं के अधिकार और शक्तियां भी उससे छिन गईं। इसके बाद सभी देवता भगवान शिव और भगवान विष्णु समेत अन्य देव शक्तियों के पास पहुंचे।

देवताओं की शक्ति से हुआ मां दुर्गा का प्राकट्य

महिषासुर के अत्याचार से परेशान देवताओं ने अपनी-अपनी दिव्य शक्तियों को एकत्र किया। शिव, विष्णु, ब्रह्मा, इंद्र और अन्य देवताओं के तेज से एक विशाल दिव्य ऊर्जा प्रकट हुई। यही संयुक्त शक्ति आगे चलकर देवी के स्वरूप में प्रकट हुईं। देवी के प्रकट होते ही देवताओं ने उन्हें अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। भगवान शिव ने त्रिशूल, भगवान विष्णु ने चक्र, इंद्र ने वज्र और अन्य देवताओं ने भी अलग-अलग दिव्य अस्त्र दिए। हिमालय ने देवी को सिंह वाहन के रूप में प्रदान किया। इस तरह देवी अनेक शक्तियों से संपन्न होकर महिषासुर का सामना करने के लिए तैयार हुईं।

मां दुर्गा ने शुरू किया युद्ध

जब महिषासुर को देवी के प्रकट होने की जानकारी मिली तो उसने अपनी विशाल सेना के साथ उनके विरुद्ध युद्ध शुरू कर दिया। देवी और असुरों की सेना के बीच भयंकर युद्ध हुआ। महिषासुर के अनेक सेनापति एक-एक करके देवी से युद्ध करने पहुंचे, लेकिन देवी ने अपने अस्त्र-शस्त्र और सिंह की सहायता से उन्हें पराजित कर दिया। देवी महात्म्य में महिषासुर की सेना के कई प्रमुख योद्धाओं के मारे जाने का विस्तार से वर्णन मिलता है। अपनी सेना का विनाश देखकर महिषासुर स्वयं युद्धभूमि में उतरा।

भैंसे का रूप लेकर मचाया आतंक

महिषासुर अपने वास्तविक स्वरूप में ही नहीं रहा। उसने अपनी मायावी शक्ति से कई रूप धारण किए। सबसे पहले उसने भैंसे का रूप लेकर देवी की सेना पर हमला किया। वह अपने सींगों से प्रहार करता, पैरों से सैनिकों को कुचलता और पूंछ से भीषण वार करता हुआ आगे बढ़ने लगा। उसके भयंकर रूप और शक्ति से युद्धभूमि में अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद वह सीधे देवी के सिंह पर हमला करने के लिए बढ़ा। 

महिषासुर ने बदले कई रूप

मां दुर्गा ने महिषासुर को रोकने के लिए उस पर अपना पाश डाल दिया, लेकिन महिषासुर ने तुरंत अपना रूप बदल लिया। वह भैंसे से सिंह बन गया। देवी ने उसके सिंह रूप को भी पराजित किया तो उसने मनुष्य का रूप धारण कर लिया। हाथ में तलवार और ढाल लेकर उसने देवी पर हमला किया। देवी ने उसके इस रूप को भी समाप्त कर दिया। इसके बाद महिषासुर ने विशाल हाथी का रूप धारण किया। उसने अपनी सूंड से देवी के सिंह को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन देवी ने तलवार से उसकी सूंड काट दी। इसके बाद वह फिर से भैंसे के रूप में आ गया। 

मां दुर्गा ने किया महिषासुर का वध

बार-बार रूप बदलने के बाद भी महिषासुर मां दुर्गा को पराजित नहीं कर सका। अंत में वह फिर भैंसे के रूप में देवी के सामने खड़ा हो गया और भयंकर गर्जना करने लगा, तभी मां दुर्गा ने उस पर प्रहार किया। देवी ने उसे अपने पैर से दबा दिया और जैसे ही महिषासुर भैंसे के शरीर से मानव रूप में बाहर निकलने लगा, देवी ने अपने अस्त्र से उस पर वार किया। इसके बाद उन्होंने तलवार से उसका सिर काट दिया। इस तरह महिषासुर का अंत हुआ और देवताओं को उसके आतंक से मुक्ति मिली। महिषासुर के वध के बाद देवताओं और ऋषियों ने मां दुर्गा की स्तुति की। देवी की विजय के बाद देवताओं में प्रसन्नता छा गई और उन्होंने देवी को प्रणाम किया। 


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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