Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापित करने से घर में मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। कलश स्थापना के दौरान दिशा, स्थान, सामग्री और पूजा विधि से जुड़े कुछ नियम बताए गए हैं। ऐसे में क्या आपको पता है कि नवरात्रि में कलश स्थापना किस दिशा में करनी चाहिए और इसकी सही विधि क्या है? आइए जानते हैं कलश स्थापना से जुड़े जरूरी नियम।
कलश स्थापना के लिए सही स्थान
नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना के लिए घर का साफ-सुथरा और पूजा के लिए उपयुक्त स्थान चुनना चाहिए। पूजा की जगह को पहले अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद वहां लकड़ी की चौकी या पूजा की वेदी तैयार करें। कलश को हमेशा साफ स्थान पर ही स्थापित करना चाहिए। कलश स्थापना के लिए ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। अगर इस दिशा में व्यवस्था करना संभव न हो तो घर के पूजा स्थल पर भी कलश स्थापित किया जा सकता है।
सबसे पहले करें भूमि की तैयारी
कलश स्थापना से पहले पूजा स्थल पर मिट्टी की वेदी तैयार की जाती है। इसके लिए साफ मिट्टी लेकर उसमें जौ बोए जाते हैं। जौ को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मिट्टी को एक पात्र या चौकी पर रखकर उसमें जौ बोएं और उसके ऊपर कलश स्थापित करें। नवरात्रि के दौरान जौ के अंकुरित होने की प्रक्रिया को भी शुभ संकेत माना जाता है।
कलश में क्या भरें
कलश स्थापना के लिए तांबे, पीतल या मिट्टी के कलश का इस्तेमाल किया जा सकता है। कलश को साफ करके उसमें जल भरें। इसमें अक्षत, सुपारी, सिक्का और कुछ फूल डाल सकते हैं। कई जगहों पर कलश के जल में गंगाजल भी मिलाया जाता है। इसके बाद कलश के मुख पर आम के पत्ते या उपलब्धता के अनुसार पांच पत्ते लगाए जाते हैं।
नारियल रखने की सही विधि
कलश के ऊपर नारियल रखा जाता है। नारियल को लाल या पीले कपड़े में लपेटकर मौली से बांधा जा सकता है। इसके बाद नारियल को कलश के ऊपर इस तरह रखें कि उसका रेशेदार हिस्सा ऊपर की ओर रहे। नारियल को कलश पर स्थापित करने से पहले उसकी पूजा भी की जाती है। धार्मिक मान्यता में नारियल को शुभता और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।
कलश पर मौली जरूर बांधें
कलश की स्थापना करते समय उसके चारों ओर या गर्दन के हिस्से में मौली बांधना शुभ माना जाता है। मौली को रक्षा सूत्र के रूप में भी देखा जाता है। कलश पर रोली और अक्षत से तिलक करें और उसके बाद पुष्प अर्पित करें। कलश की विधि-विधान से पूजा करने के बाद मां दुर्गा का ध्यान करें।
अखंड ज्योति का रखें ध्यान
नवरात्रि में कई लोग कलश स्थापना के साथ अखंड ज्योति भी जलाते हैं। अगर अखंड ज्योति जला रहे हैं तो उसे सुरक्षित स्थान पर रखें और उसके आसपास ऐसी कोई वस्तु न रखें जिससे आग लगने का खतरा हो। ज्योति को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां वह पूजा के दौरान आसानी से दिखाई दे और सुरक्षित भी रहे।
कलश स्थापना के समय इन बातों का रखें ध्यान
कलश स्थापना के लिए इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्री साफ और शुद्ध होनी चाहिए। कलश को खाली रखकर स्थापित नहीं करना चाहिए। पूजा स्थल पर गंदगी या बिखरा हुआ सामान नहीं होना चाहिए। कलश स्थापित करने के बाद उसे बार-बार स्थान से हटाना भी उचित नहीं माना जाता है। नवरात्रि के दौरान सुबह-शाम पूजा करते समय कलश के सामने दीपक जलाकर मां दुर्गा का ध्यान और मंत्र जाप किया जा सकता है।
कलश स्थापना के बाद करें मां दुर्गा की पूजा
कलश स्थापित करने के बाद मां दुर्गा की पूजा करें। सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें, इसके बाद कलश और देवी मां का पूजन करें। मां दुर्गा को फूल, अक्षत, रोली, सिंदूर, फल और भोग अर्पित करें। इसके बाद दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या देवी मंत्रों का पाठ किया जा सकता है। इस तरह नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की पूजा पूरी होती है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)