facebook pixel
विज्ञापन
Home›  dharm›  vrat›  karwa chauth mein chandrama ko dekhkar hi kyon khola jata hai vrat janiye pauranik katha aur dharmik mahatva

Karwa Chauth: करवाचौथ व्रत में चंद्रमा को देखकर ही क्यों खोला जाता है व्रत? जानें पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Karwa Chauth: हिंदू धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा का संबंध अमृत, औषधियों और जीवनदायिनी ऊर्जा से भी जोड़ा जाता है। पौराणिक कथाओं में समुद्र मंथन के दौरान चंद्रमा के प्रकट होने का उल्लेख मिलता है।

Karwa Chauth
Karwa Chauth: करवाचौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को पूजा की जाती है और रात में चंद्रमा के दर्शन करके अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद पति को देखकर व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि करवाचौथ पर चंद्रमा को देखकर ही व्रत क्यों खोला जाता है? इसके पीछे कौन-सी पौराणिक मान्यताएं और धार्मिक महत्व जुड़े हैं? आइए जानते हैं।

चंद्रमा को देखकर क्यों खुलता है व्रत?

हिंदू धर्म में चंद्रमा को शीतलता, शांति, सुंदरता और मन का कारक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चंद्रमा की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति आती है और परिवार में सकारात्मकता बनी रहती है। करवाचौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली की कामना करती हैं। चंद्रमा के दर्शन के बाद पति का चेहरा देखकर व्रत खोलना प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस परंपरा में चंद्रमा को साक्षी मानकर वैवाहिक जीवन की मंगलकामना की जाती है। दिनभर बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देना और फिर पति के हाथों जल ग्रहण करना इस पर्व की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।

चंद्रमा और अमरता का धार्मिक संबंध

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में चंद्रमा का संबंध अमृत, औषधियों और जीवनदायिनी ऊर्जा से भी जोड़ा जाता है। पौराणिक कथाओं में समुद्र मंथन के दौरान चंद्रमा के प्रकट होने का उल्लेख मिलता है। इसी वजह से चंद्रमा को शुभता और शीतलता का प्रतीक माना जाता है। करवाचौथ पर चंद्रमा की पूजा करते समय महिलाएं अपने पति के दीर्घायु होने और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करती हैं।

धार्मिक दृष्टि से चंद्रमा को अर्घ्य देना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि श्रद्धा और मंगलकामना व्यक्त करने का माध्यम है। हालांकि, चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा का अर्थ धार्मिक आस्था और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा है, इसे किसी वैज्ञानिक नियम के रूप में नहीं देखा जाता।

करवाचौथ से जुड़ी वीरवती की कथा

करवाचौथ से जुड़ी सबसे प्रचलित पौराणिक कथाओं में वीरवती की कथा का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, वीरवती नाम की एक महिला अपने भाइयों की लाडली बहन थी। विवाह के बाद जब उसने पहली बार करवाचौथ का व्रत रखा, तो वह पूरे दिन भूखी-प्यासी रही। शाम होते-होते उसकी हालत कमजोर होने लगी और वह चंद्रमा निकलने का इंतजार करने लगी।

अपनी बहन की परेशानी देखकर उसके भाइयों से रहा नहीं गया। उन्होंने एक पेड़ के पीछे दीपक जलाकर छलनी की मदद से ऐसा दृश्य बनाया, जिससे वीरवती को लगा कि चंद्रमा निकल आया है। चंद्रमा निकलने का भ्रम होने पर उसने पूजा की और व्रत खोल लिया। लेकिन मान्यता के अनुसार, व्रत अधूरा खोलने के कारण उसके पति के जीवन पर संकट आ गया।

इसके बाद वीरवती ने पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ करवाचौथ का व्रत किया। उसकी भक्ति और प्रार्थना से प्रसन्न होकर देवी ने उसके पति को जीवनदान दिया। इस कथा के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि करवाचौथ का व्रत पूरी श्रद्धा और निर्धारित परंपराओं के अनुसार करना चाहिए। इस कहानी के अलग-अलग रूप भी प्रचलित हैं और इसे धार्मिक लोककथा के रूप में देखा जाता है।

चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा

करवाचौथ के दिन चंद्रमा निकलने के बाद महिलाएं पूजा की थाली लेकर चंद्रदेव को अर्घ्य देती हैं। इसके लिए आमतौर पर जल से भरा करवा या लोटा, दीपक, रोली, अक्षत और मिठाई रखी जाती है। महिलाएं चंद्रमा के दर्शन करके उसकी पूजा करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

कई परिवारों में महिलाएं छलनी से चंद्रमा को देखती हैं और फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखती हैं। इसके बाद पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर व्रत खुलवाते हैं। 

पति-पत्नी के प्रेम का प्रतीक है यह परंपरा

करवाचौथ पर चंद्रमा को देखकर व्रत खोलने की परंपरा पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति समर्पण को दर्शाती है। दिनभर व्रत रखने के बाद चंद्रमा के दर्शन करना और फिर जीवनसाथी के हाथों व्रत खोलना इस पर्व को भावनात्मक रूप से खास बनाता है। इस अवसर पर महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और खुशहाली की प्रार्थना करती हैं। इस तरह करवाचौथ पर चंद्रमा को देखकर व्रत खोलने की परंपरा के पीछे धार्मिक आस्था, पौराणिक कथाएं और वैवाहिक प्रेम से जुड़ी मान्यताएं हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देकर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार के मंगल की कामना करती हैं।


यह भी पढ़ें:- 

Karwa Chauth : करवा चौथ पर छलनी से क्यों देखा जाता है चांद, जानिए धार्मिक महत्व 

Karwa Chauth: करवा चौथ पर सरगी में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए? जानिए धार्मिक महत्व 

Karwa Chauth 2026: पहली बार रख रही हैं करवाचौथ का व्रत? तो इन नियमों का रखें ध्यान 
 
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel