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Varuthini Ekadashi Remedies: गृह क्लेश से मुक्ति पाने के लिए वरुथिनी एकादशी पर करें ये उपाय

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Varuthini Ekadashi Remedies: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। हर महीने 2 एकादशी व्रत रखे जाते हैं। शास्त्रों में वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।

Varuthini Ekadashi Remedies
Varuthini Ekadashi Remedies: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। हर महीने 2 एकादशी व्रत रखे जाते हैं। शास्त्रों में वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इसे वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए एकादशी व्रत रखा जाता है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शास्त्रों में वर्णित है कि वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को 10 हजार वर्षों की तपस्या के बराबर फल की प्राप्ति होती है। इसलिए सनातन धर्म के अनुयायी इस व्रत को पूरी श्रद्धा से रखते हैं। राजा मान्धाता ने भी यह व्रत रखा था, जिसके प्रभाव से उन्हें बैकुंठ की प्राप्ति हुई। 

इन लोगों को जरूर करना चाहिए व्रत 

वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से दुर्भाग्य भी सौभाग्य में बदल जाता है। इस कारण आर्थिक और पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों को यह व्रत जरूर रखना चाहिए। इससे न सिर्फ सौभाग्य की प्राप्ति होती है बल्कि घर में सुख, शांति और समृद्धि भी आती है।  इसके साथ ही गृह क्लेश से मुक्ति भी मिल जाती है। जो लोग वरुथिनी एकादशी का व्रत रखते हैं उनके घर में हमेशा खुशहाली बनी रहती है। साथ ही साथ सुख-समृद्धि भी बनी रहती है।

वरुथिनी एकादशी कब है? 

वैदिक पंचांग के अनुसार, प्रत्येक साल वरुथिनी एकादशी का व्रत वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस साल यानी 2025 में वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 23 अप्रैल को शाम 4 बजकर 54 मिनट से लग रही है। वही वरुथनी एकादशी की समाप्ति अगले दिन यानी 24 अप्रैल को दोपहर 3 बजकर 01 मिनट पर होगी। वैदिक हिंदू धर्म में उदयातिथि का मान्य होता है ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, वरूथिनी एकादशी का व्रत 24 अप्रैल को रखा जाएगा।

कैसे लें संकल्प

इस दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए। फिर पूरे दिन व्रत रखना चाहिए और अगले दिन व्रत खोलना चाहिए। इस दौरान केवल फलों का ही सेवन करना चाहिए।

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