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Pitra Dosh Upay: कुंडली में कैसे मिलते हैं पितृ दोष का संकेत, जानें उपाय

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Vaishakh Amavasya Pitra Dosh Upay: वर्ष भर में पड़ने वाली सभी अमावस्या और अन्य विशेष तिथियों पर पितृ दोष की शांति के लिए कोई भी धार्मिक अनुष्ठान, तर्पण या पूजा पाठ आदि करने का महत्व है।

Pitra Dosh Upay
Vaishakh Amavasya Pitra Dosh Upay: वर्ष भर में पड़ने वाली सभी अमावस्या और अन्य विशेष तिथियों पर पितृ दोष की शांति के लिए कोई भी धार्मिक अनुष्ठान, तर्पण या पूजा पाठ आदि करने का महत्व है। मान्यता है कि वैशाख माह में पितरों के लिए धार्मिक अनुष्ठान करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। कहा जाता है कि वैशाख का महीना नाराज पितरों को प्रसन्न करने के लिए बहुत खास होता है। इस महीने में पितरों को प्रसन्न करने के लिए शास्त्रों में कई तरह के उपाय बताए गए हैं।

इन्हें करने से पितर प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते रहते हैं। पितृ दोष होने पर जीवन में कई तरह की परेशानियां आने लगती हैं जिससे व्यक्ति मानसिक तनाव का शिकार हो जाता है। ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे लक्षण बताए गए हैं जो पितृ दोष होने पर दिखाई देते हैं।

ये लक्षण मिलते हैं

पितृ दोष होने पर व्यक्ति कई तरह की समस्याओं से परेशान रहता है। पितृ दोष से पीड़ित व्यक्ति के बनते काम बिगड़ जाते हैं और मानसिक तनाव जैसी कई समस्याएं आती रहती हैं। अगर किसी व्यक्ति के जीवन में कुछ परेशानियां हैं जैसे संतान से जुड़ी समस्याएं, संतान का उसकी बात न मानना, संतान प्राप्ति में रुकावटें, कई उपाय आजमाने के बाद भी संतान सुख से वंचित रहना, संतान का बार-बार बीमार पड़ना, विकलांग या अपंग संतान होना आदि इसके लक्षण हैं। 

इसके अलावा घर में उदासी का माहौल रहना, घर में हर समय कलह का माहौल रहना, घर में पीपल का पेड़ उगना, विवाह से जुड़ी रुकावटें आना, रिश्ता तय होने के बाद शादी टूट जाना, आर्थिक परेशानी या आर्थिक तंगी, कर्ज बढ़ना, ऐसी कई समस्याएं भी पितृ दोष के लक्षण हैं। 

तभी बनता है यह योग 

ज्योतिषियों के अनुसार, इसके अलावा दशमांस कुंडली से भी पितृ दोष को आसानी से जाना जा सकता है। आधुनिक युग में ज्योतिष शास्त्र में दशमांस कुंडली बनाकर पितृ दोष को आसानी से जाना जा सकता है। जब कुंडली के सभी ग्रह दशमांस कुंडली में राहु और केतु के बीच में होते हैं तो कुंडली में पितृ दोष होता है। 

यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष मौजूद है, तो यह पितृ दोष का भी संकेत है, अर्थात जब कुंडली में पितृ दोष मौजूद होता है तो कालसर्प दोष होना आम बात है। वैशाख मास की अमावस्या तिथि के दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए इस तरह के उपाय करते हैं। मान्यता है कि जो जातक इस तरह के उपाय करते हैं उनके जीवन में जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है।

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