Ujjain Simhasth 2028: देश के प्रमुख चार स्थानों पर कुंभ मेला का आयोजन होता है। ये चार स्थान प्रयागराज, नासिक, हरिद्वार और उज्जैन है। हाल में ही प्रयागराज में महाकुंभ महापर्व का समापन हुआ है।
Ujjain Simhasth 2028: देश के प्रमुख चार स्थानों पर कुंभ मेला का आयोजन होता है। ये चार स्थान प्रयागराज, नासिक, हरिद्वार और उज्जैन है। हाल में ही प्रयागराज में महाकुंभ महापर्व का समापन हुआ है। इसके बाद अब साल 2027 में नासिक में कुंभ मेला का आयोजन होगा और साल 2028 में उज्जैन में। जी हां मध्यप्रदेश सरकार ने साल 2028 में होने वाले कुंभ मेले की तारीख की घोषणा भी कर दी है। मध्यप्रदेश में लगने वाला कुंभ मेला को सिंहस्थ मेला के नाम से जाना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर इस मेले को सिंहस्थ मेले के नाम से क्यों जाना जाता है। साथ ही इस कुंभ मेले में कितने अमृत स्नान और कितने पर्व स्नान होंगे। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
उज्जैन में कब शुरू होगा कुंभ मेला
मध्यप्रदेश सरकार के अनुसार, कुंभ मेले का आयोजन साल 2028 में होने वाला है। साल 2028 में 27 मार्च से 27 मई तक कुंभ मेले का भव्य आयोजन होगा। यह मेले पूरे दो महीने तक चलेगा। सिंहस्थ मेले के दौरान कुल 3 अमृत स्नान और 7 पर्व स्नान किए जाएंगे। सरकार द्वारा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस मेले में करीब 14 करोड़ से अधिक लोग स्नान करने आएंगे। श्रद्धालुओं की जनसंख्या को देखते हुए सरकार अभी से ही तैयारियां करने में जुट गई है। उज्जैन में महाकुंभ मेले का आयोजन क्षिप्रा नदी के तट पर होगा इसी में श्रद्धालु डुबकी लगाएंगे।
सिंहस्थ मेले में अमृत स्नान व पर्व स्नान की तारीखें
बता दें कि साल 2028 में लगने वाला सिंहस्थ मेले में 3 अमृत स्नान और 7 पर्व स्नान होंगे। उज्जैन में अमृत स्नान और पर्व स्नान की तारीखें 9 अप्रैल से लेकर 8 मई तक है। इस बीच लाखों-करोड़ों श्रद्धालु क्षिप्रा नदी में भक्ति की डुबकी लगाएंगे। साथ ही अपने मन को पवित्र भी करेंगे।
आखिर उज्जैन में क्यों लगता है सिंहस्थ मेला
धार्मिक और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, जब समुद्र मंथन हुआ था उसमें से धन्वंतरि भगवान अमृत कलश लेकर निकले थे तो उसे पाने के लिए देवताओं और असुरों में भयानक युद्ध हुआ था। इस दौरान 12 दिनों तक भगवान धन्वंतरि अमृत कलश को लेकर इधर-उधर भटक रहे थे। माना जाता है कि इसी भागदौड़ में अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी के चार स्थानों पर गिरीं। ये चार स्थान प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन है। इन्हीं चार स्थानों पर ग्रहों की विशेष स्थिति बनने पर कुंभ मेले का आयोजन होता है।
आखिर उज्जैन में लगने वाले कुंभ को क्यों कहते हैं सिंहस्थ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रयागराज और हरिद्वार में लगने वाले मेले को कुंभ मेला कहा जाता है। वहीं नासिक और उज्जैन में लगने वाले मेले को सिंहस्थ मेला भी कहा जाता है। क्योंकि उज्जैन और नासिक में लगने वाला कुंभ मेला तब लगता है जब गुरु बृहस्पति सिंह राशि में होते हैं। गुरु बृहस्पति के सिंह राशि में होने के कारण इन दोनों स्थानों पर लगने वाले कुंभ मेले को सिंहस्थ मेला के नाम से भी जाना जाता है।