facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  next kumbh mela after 2025 prayagraj ke bad ab kab aur kha lagega kumbh

Next Kumbh Mela After 2025: प्रयागराज के बाद अब कब और कहां लगेगा कुंभ, जानिए

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल
सार

Next Kumbh Mela After 2025: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला 26 फरवरी को संपन्न हो गया, जिसमें 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी तट पर पवित्र डुबकी लगाई। इसके प्रति लोगों में अपार श्रद्धा और आस्था देखी गई

Next Kumbh Mela After 2025

Next Kumbh Mela After 2025: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला 26 फरवरी को संपन्न हो गया, जिसमें 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी तट पर पवित्र डुबकी लगाई। इसके प्रति लोगों में अपार श्रद्धा और आस्था देखी गई। महाकुंभ के प्रति लोगों की श्रद्धा अभी कम नहीं हुई है। वहीं, अब लोग जानना चाहते हैं कि अगला कुंभ कब और कहां आयोजित होगा? तो आइए यहां जानते हैं।

अगला कुंभ कब आयोजित होगा? ( Agla Kumbh Kab Aayojit Hoga) प्रयागराज के बाद अब अगला कुंभ 2027 में महाराष्ट्र के नासिक में आयोजित किया जाएगा। यह मेला त्र्यंबकेश्वर में आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 2028 में सिंहस्थ, उज्जैन में पूर्ण कुंभ का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही 2030 में प्रयागराज में भव्य अर्धकुंभ का आयोजन किया जाएगा। आपको बता दें कि 'कुंभ' का अर्थ है अमृत का कलश, जिसमें भाग लेने से लोगों के सभी पाप कट जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसे में इस पावन मेले में जरूर जाएं और पवित्र नदियों में डुबकी लगाएं।

इन जगहों पर होता है कुंभ ( In Jagaho Par Hota Hai Kumbh) 


प्रयागराज के अलावा हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में भी महाकुंभ का आयोजन होता है। इस दौरान दुनियाभर से श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं और कई तरह की पूजा-अर्चना करते हैं।

12 साल बाद क्यों होता है महाकुंभ? ( 12 Saal Bad Kyo Hota Hai Mahakumbh) 

प्रचलित पौराणिक कथाओं के अनुसार अमृत पाने के लिए देवताओं और दानवों के बीच करीब 12 दिनों तक लड़ाई हुई थी और देवताओं के 12 दिन मनुष्यों के बारह साल के बराबर होते हैं। इसी वजह से 12 साल बाद महाकुंभ का आयोजन होता है, जिसका सनातन धर्म में बहुत महत्व है।

ऐसे तय होती है कुंभ की तिथि ( Aise Tay Hoti Hai Kumbh Ki Tithi)

वैदिक ज्योतिष में ग्रहों और राशियों का विश्लेषण करने के बाद ही कुंभ मेले की तिथि तय की जाती है। कुंभ मेले की तिथि के लिए ग्रहों के राजा सूर्य और देवताओं के गुरु बृहस्पति की चाल को महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य और बृहस्पति के राशि परिवर्तन के आधार पर कुंभ का स्थान तय होता है।

प्रयागराज - जब ग्रहों के राजा सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं और बृहस्पति वृषभ राशि में होते हैं, तब प्रयागराज में कुंभ मेले का आयोजन होता है।
नासिक - जब सूर्य और बृहस्पति सिंह राशि में होते हैं, तो कुंभ मेला महाराष्ट्र के नासिक में आयोजित किया जाता है।
हरिद्वार - जब सूर्य मेष राशि में होता है और बृहस्पति कुंभ राशि में होता है, तो कुंभ मेला हरिद्वार में आयोजित किया जाता है।
उज्जैन - जब सूर्य मेष राशि में होता है और बृहस्पति सिंह राशि में होता है, तो कुंभ मेला उज्जैन में आयोजित किया जाता है।

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel