Siddhpeeth Dakshin Kali Temple: 20 से 26 अक्टूबर तक हरिद्वार के सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में विशेष यज्ञ और मां काली की आराधना, राष्ट्र कल्याण एवं जनहित के लिए अनुष्ठान हो रहा है।
Dakshin Kali Temple Haridwar: राष्ट्र कल्याण, जनहित, समाज में शांति और सनातन परंपरा की प्रतिष्ठा के संकल्प के साथ आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की विशेष नवरात्र साधना हरिद्वार स्थित सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में चल रही है। 20 से 26 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में मां आदिशक्ति काली की विशेष पूजा-अर्चना के साथ यज्ञ किया जा रहा है।
इस नवरात्र साधना की प्रमुख विशेषता यज्ञ की अग्नि के समीप बैठकर अनुष्ठान करना है। यज्ञ के दौरान अग्नि के आसपास तापमान 80 से 108 डिग्री तक पहुंच जाता है। इतनी अधिक गर्मी के बीच लंबे समय तक धार्मिक अनुष्ठान करना शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज इस दौरान मां काली की आराधना और यज्ञ के माध्यम से आध्यात्मिक साधना कर रहे हैं।
राष्ट्र कल्याण और जनहित के लिए अनुष्ठान
स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की इस साधना का उद्देश्य राष्ट्र की सुख-समृद्धि, देशवासियों के कल्याण और समाज में शांति एवं सद्भाव की कामना करना है। सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं की वैश्विक प्रतिष्ठा भी इस अनुष्ठान के प्रमुख संकल्पों में शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र में मां आदिशक्ति की आराधना को शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति का माध्यम माना जाता है।
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मां काली की विशेष आराधना
हरिद्वार स्थित सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर मां काली की उपासना के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। नवरात्र के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। मां काली को शक्ति, साहस और दुष्ट प्रवृत्तियों के विनाश का प्रतीक माना जाता है। भक्त इस दौरान मां से परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं।
26 अक्टूबर तक चलेगा अनुष्ठान
20 अक्टूबर से शुरू हुआ यह विशेष अनुष्ठान 26 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस अवधि में मां काली की आराधना और यज्ञ के माध्यम से निर्धारित धार्मिक संकल्पों के लिए प्रार्थना की जा रही है। स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की यह नवरात्र साधना श्रद्धा, तप और आध्यात्मिक अनुशासन के महत्व को रेखांकित करती है।