Karwa Chauth : करवा चौथ का त्योहार हिंदू धर्म में बेहद खास माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
Karwa Chauth : करवा चौथ का त्योहार हिंदू धर्म में बेहद खास माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। करवा चौथ पर सरगी की थाली का विशेष महत्व होता है जो सास अपनी बहू को व्रत शुरू करने से पहले देती है। इस दिन सूर्योदय से पहले सरगी खाकर निर्जला व्रत की शुरुआत होती है। यह परंपरा बहुत युगों से चली आ रही है और इसे लेकर दो प्रमुख कथाएं भी बेहद प्रचलित है। तो आइए विस्तार से जानते हैं कि सरगी की परंपरा कैसे शुरू हुई और सरगी की थाली में क्या-क्या होना चाहिए।करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाकर अपने निर्जला व्रत का आरंभ करती हैं। इसे मुख्यतौर पर सास अपनी बहू को देती है। करवा चौथ पर सरगी की थाली की परंपरा बहुत पुराने समय से चली आ रही है, जिसे लेकर दो प्रमुख कथाएं भी हैं।
सरगी क्या होती है
सरगी वह विशेष भोजन है जो विवाहित महिलाएं करवा चौथ की सुबह अपने ससुराल से प्राप्त करती हैं, इसे सास या अन्य परिवार की महिलाओं द्वारा बनाया जाता है, इसमें मीठे पकवान, फल और कई स्नैक्स शामिल होते हैं, यह विशेष रूप से इस पर्व के लिए तैयार किया जाता है, सरगी का उद्देश्य महिलाओं को ऊर्जा प्रदान करना है.
करवा चौथ सरगी खाने का समय
करवा चौथ के दिन व्रत शुरू करने से पहले सरगी खाने की परंपरा होती है। यह सरगी सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद शुभ मानी जाती है और इसे सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में ग्रहण करना फलदायक माना गया है।
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करवा चौथ पर सरगी का महत्व
माता पार्वती से जुड़ी कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने शंकरजी के कल्याण और उनकी दीर्घायु के लिए पहली बार करवाचौथ का व्रत रखा था। उस समय देवी की सास जीवित नहीं थी। ऐसे में माता पार्वती की मां मैना देवी ने करवा चौथ के व्रत से पहले सरगी की थाली दी थी, जिसमें शुभ व पौष्टिक खाने की चीजें थी। उसी समय से यह परंपरा चली आ रही है कि अगर किसी सुहागिन महिला की सास जीवित न हो तो सरगी की थाली मायके की ओर से आ सकती है। महाभारत काल की कथा
करवा चौथ की सरगी को लेकर एक कथा महाभारत काल से भी जुड़ी है। मान्यता है कि द्रौपदी ने पांडवों की दीर्घायु और उनकी रक्षा के लिए इस व्रत को विधि-विधान से रखा था। उस समय द्रौपदी की सास कुंती ने उन्हें व्रत से पहले सरगी दी थी। तभी से सास की ओर से बहू को सरगी की थाली दी जाने लगी। यही कारण है कि करवा चौथ के व्रत से पहले सरगी खाने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।
सरगी की थाली में क्या-क्या रखें
करवाचौथ व्रत के लिए सरगी की थाली में स्वादिष्ट के साथ-साथ पौष्टिक व्यंजन शामिल किए जाते हैं। ताकी व्रती के शरीर को जरूरी पोषण और ऊर्जा प्राप्त हो सकते। सरगी की थाली में लड्डू, सेवई, मठरी, बादाम, किशमिश, काजू, बर्फी, सेब, केला, नमकीन आदि शामिल किए जाते हैं। इसे महिलाएं अपने अनुसार भी तैयार करती हैं। लेकिन सरगी की थाली में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि उसमें भोजन संतुलित हो। इससे उपवास के लिए शरीर में ऊर्जा बनी रहती है।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।