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Shubh Muhurt : शुभ मुहूर्त क्या है जानिए इस क्यों माना जाता है महत्वपूर्ण

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Shubh Muhurt : भारतीय सनातन परंपरा में, किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले शुभ समय यानी 'शुभ मुहूर्त' देखने की प्रथा लंबे समय से चली आ रही है। माना जाता है कि सही समय पर काम शुरू करने से सकारात्मक ऊर्जा, सफलता और समृद्धि की संभावनाएँ बढ़ती हैं।

Shubh Muhurt
Shubh Muhurt : भारतीय सनातन परंपरा में, किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले शुभ समय यानी 'शुभ मुहूर्त' देखने की प्रथा लंबे समय से चली आ रही है। माना जाता है कि सही समय पर काम शुरू करने से सकारात्मक ऊर्जा, सफलता और समृद्धि की संभावनाएँ बढ़ती हैं। इसीलिए शादी, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन, यज्ञ, धार्मिक अनुष्ठान, व्यापार की शुरुआत और अन्य महत्वपूर्ण कामों के लिए शुभ समय चुनने पर खास ध्यान दिया जाता है। 'शुभ मुहूर्त' का कॉन्सेप्ट सिर्फ़ समय की गणना नहीं है; बल्कि यह भारतीय ज्योतिष और पंचांग पर आधारित एक व्यापक व्यवस्था है। इसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, लग्न  और ग्रहों की स्थिति जैसे कई तत्वों का ध्यान रखा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, हर पल में एक खास ऊर्जा होती है; कुछ समय शुभ कामों के लिए अच्छे माने जाते हैं, जबकि कुछ समय महत्वपूर्ण काम शुरू करने के लिए सही नहीं माने जाते।

'शुभ मुहूर्त' को महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?

हमारे जीवन में किसी भी नए काम की शुरुआत का खास महत्व होता है। जब हम कोई महत्वपूर्ण काम शुरू करते हैं, तो हम उम्मीद और भरोसे के साथ ऐसा करते हैं। शुभ समय चुनने से व्यक्ति की सोच सकारात्मक बनती है; यह विश्वास कि काम सही समय पर शुरू हुआ है, व्यक्ति का आत्मविश्वास काफी बढ़ा सकता है। धार्मिक नज़रिए से भी शुभ समय बहुत महत्वपूर्ण है। माना जाता है कि शुभ समय पर देवी-देवताओं की पूजा, धार्मिक अनुष्ठान और संस्कार करने से ज़्यादा आध्यात्मिक लाभ मिलता है। इसलिए, हिंदू धर्म में शादी जैसे बड़े संस्कारों के लिए खास शुभ समय की गणना की जाती है।

पंचांग और मुहूर्त के बीच संबंध

शुभ समय तय करने में पंचांग अहम भूमिका निभाता है। इसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण की जानकारी होती है, जो किसी भी काम के लिए सही समय चुनने का आधार बनते हैं। इसके अलावा, खास जगह और समय के आधार पर लग्न और ग्रहों की स्थिति का भी आकलन किया जाता है। उदाहरण के लिए, शादी के लिए शुभ समय, गृह-प्रवेश, नया काम शुरू करने या धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए ज़रूरी शुभ समय से अलग होता है। इसलिए, हर तरह के शुभ काम के लिए एक ही मुहूर्त सही नहीं माना जाता है।

शुभ समय और सकारात्मक सोच

शुभ समयका एक अहम पहलू व्यक्ति की सकारात्मक सोच है। जब कोई व्यक्ति श्रद्धा, विश्वास और नेक इरादे के साथ कोई काम शुरू करता है, तो उसके मन में उत्साह पैदा होता है। शुभ समय इस भावना को और मज़बूत करता है। हालाँकि, यह समझना भी ज़रूरी है कि सिर्फ़ शुभ समय ही सफलता की गारंटी नहीं देता। सफलता के लिए कड़ी मेहनत, सही फ़ैसले लेना, अनुशासन और हालात के हिसाब से कोशिशें करना भी उतना ही ज़रूरी है। शुभ समय की अवधारणा को एक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा के तौर पर देखना ज़्यादा सही है।

किन कामों के लिए शुभ समय देखा जाता है?

परंपरा के अनुसार, शादी, गृह-प्रवेश, भूमि-पूजन, इमारत का निर्माण शुरू करने, नामकरण संस्कार, मुंडन संस्कार, उपनयन संस्कार, नया बिज़नेस या संस्थान शुरू करने, गाड़ी खरीदने, धार्मिक अनुष्ठानों और दूसरे शुभ मौकों के लिए शुभ समय देखा जाता है। साथ ही कुछ ऐसे मौके भी होते हैं जिनके लिए किसी खास शुभ समय की ज़रूरत नहीं समझी जाती। कई धार्मिक परंपराओं में, कुछ समय को अपने-आप शुभ या 'स्वयं-सिद्ध' माना जाता है। इसके अलावा, व्यक्ति के हालात और काम की प्रकृति के आधार पर भी फ़ैसले लिए जाते हैं।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।) 

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