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Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा पर भगवान कृष्ण ने क्यों रचाया था महारास, जानिए

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Sharad Purnima:  हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। वैदिक कैलेंडर के अनुसार, इस वर्ष शरद पूर्णिमा का त्योहार 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। 

Sharad Purnima: 
Sharad Purnima:  हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। वैदिक कैलेंडर के अनुसार, इस वर्ष शरद पूर्णिमा का त्योहार 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन धन की देवी, माता लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं। यह दिन माता लक्ष्मी, भगवान कृष्ण और चंद्रमा की विशेष पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। द्वापर युग में शरद पूर्णिमा की रात को ही भगवान कृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ 'महा रास'किया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान कृष्ण ने इस महा रास के लिए शरद पूर्णिमा की रात को ही क्यों चुना? यदि नहीं, तो आइए इस लेख में इसके पीछे के कारणों को जानते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि भगवान कृष्ण द्वारा महा रास के लिए शरद पूर्णिमा की रात को चुनने के पीछे मुख्य रूप से पौराणिक और आध्यात्मिक कारण हैं।

चंद्रमा की 16 कलाएं और अमृत की वर्षा

केवल शरद पूर्णिमा के दिन ही चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं के साथ पूर्ण होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को चंद्र किरणों के माध्यम से अमृत की वर्षा होती है। ये किरणें वातावरण को अत्यंत शीतल, अलौकिक और दिव्य बना देती हैं, साथ ही मन और शरीर दोनों को शुद्ध करती हैं।

भगवान शिव ने धारण किया गोपी का रूप

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान कृष्ण ने महा रास के लिए माता पार्वती को भी आमंत्रित किया था। जब माता पार्वती ने इसमें शामिल होने के लिए भगवान शिव  से अनुमति मांगी तो वे भी साथ चलने के लिए सहमत हो गए। वृंदावन पहुंचने पर पता चला कि कृष्ण के अलावा कोई भी पुरुष महा रास में भाग नहीं ले सकता। इसलिए इसमें शामिल होने के लिए भगवान शिव ने एक गोपी का रूप धारण कर लिया।

गोपियों के साथ महा रास

शरद पूर्णिमा की रात को भगवान कृष्ण ने वंशीवट में गोपियों के साथ महा रास किया। उस समय उनकी बांसुरी की धुन इतनी मधुर थी कि न केवल पृथ्वी के जीव बल्कि स्वर्ग के देवता भी उस अद्भुत 'रास' को देखने के लिए उत्सुक हो उठे।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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