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Sharad Purnima Ka Mahatav: शरद पूर्णिमा पर खुले आसमान के नीचे क्यों रखी जाती है खीर, जानिए महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Sharad Purnima Ka Mahatav: शरद पूर्णिमा का त्योहार हर साल आश्विन महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं के साथ पूर्ण रूप में होता है और उसकी किरणों से अमृत बरसता है।

Sharad Purnima Ka Mahatav:
Sharad Purnima Ka Mahatav: शरद पूर्णिमा का त्योहार हर साल आश्विन महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं के साथ पूर्ण रूप में होता है और उसकी किरणों से अमृत बरसता है। शरद पूर्णिमा की रात को खीर को पूरी रात चांदनी में रखा जाता है और अगली सुबह इसे खाया जाता है। इस खीर को अमृत के समान माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि चांदनी में रखी गई खीर को खाने से सौभाग्य आता है और बीमारियों को दूर करने में मदद मिलती है। इस साल की शरद पूर्णिमा विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्ष 2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी। यह त्योहार भगवान कृष्ण की 'महा रास लीला' से भी जुड़ा हुआ है।

शरद पूर्णिमा पर खीर को चांदनी में क्यों रखा जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं के साथ प्रकट होता है और उसकी किरणों को अमृत के समान माना जाता है। इसी मान्यता के कारण लोग दूध और चावल से बनी खीर को चांदनी में रखते हैं। माना जाता है कि पूरी रात चांदनी में रहने से खीर में विशेष गुण आ जाते हैं और इसे खाने से स्वास्थ्य को लाभ मिलता है।

भगवान कृष्ण की 16 कलाओं से इसका क्या संबंध है?

हिंदू धार्मिक परंपरा में, भगवान कृष्ण को एक ऐसे अवतार के रूप में माना जाता है जिनमें सभी 16 कलाएं मौजूद हैं। इसी तरह शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को भी 16 कलाओं से युक्त माना जाता है। यही कारण है कि धार्मिक दृष्टि से यह रात बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ब्रज क्षेत्र में शरद पूर्णिमा को भगवान कृष्ण की 'महा रास लीला' से भी जोड़ा जाता है; माना जाता है कि इसी पूर्णिमा की रात को भगवान कृष्ण ने गोपियों के साथ 'महा रास' रचाया था। 

शरद पूर्णिमा पर खीर रखने की परंपरा कैसे शुरू हुई?

शरद पूर्णिमा पर चांदनी में खीर रखने की प्रथा धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी है जिसमें चंद्रमा की पूजा की जाती है और उसकी किरणों को अमृत के समान माना जाता है। पीढ़ियों से लोग इस रात खीर बनाते हैं उसे चांदनी में रखते हैं और अगले दिन इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। कुछ क्षेत्रों में चंद्रमा को दूध या दूध से बनी चीजें अर्पित करने की भी परंपरा है। महाराष्ट्र में कोजागिरी पूर्णिमा पर 'मसाला दूध' पीने की प्रथा है जबकि उत्तर भारत के कई हिस्सों में खीर बनाई जाती है। गुजरात में शरद पूर्णिमा के अवसर पर गरबा करने की परंपरा भी काफी प्रचलित है।

शरद पूर्णिमा की रात को खीर कैसे रखनी चाहिए?

शरद पूर्णिमा के दिन आप घर पर दूध, चावल और अपनी पसंद के मेवे डालकर खीर बना सकते हैं। रात में चंद्रमा को देखते हुए पूजा करें और ईश्वर को खीर अर्पित करें। अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार आप इसे कुछ समय के लिए चांदनी में रख सकते हैं। खीर को पूरी तरह खुला न छोड़ें; इसे किसी साफ ढक्कन या बारीक जाली से ढक दें ताकि इसमें धूल या कीड़े न गिरें। अगली सुबह खाने से पहले खीर को अच्छी तरह से देख लें।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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