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Sanatan Dharma: सनातन धर्म को समझना चाहते हैं हिंदू तो शुरुआत किस ग्रंथ से करें, जानिए पूरी गाइड

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Atma Gyan: सनातन धर्म के मूल सार को सरल शब्दों में समझना चाहते हैं और स्वयं को जानने की एक अद्भुत यात्रा पर निकलना चाहते हैं, तो यह संक्षिप्त गाइड आपके लिए एक बेहतरीन मार्गदर्शक साबित होगी। 
 

Sanatan Dharma
Indian Spirituality: हिंदू सनातन धर्म ज्ञान का एक विशाल समंदर है, जिसमें 4 वेद, 108 उपनिषद, 18 पुराण, 18 स्मृतियां, 6 वेदांग, 6 दार्शनिक सूत्र ग्रंथ और रामायण व महाभारत जैसे महान महाकाव्य शामिल हैं। किसी एक व्यक्ति के लिए इन सभी ग्रंथों को पढ़ पाना असंभव है, लेकिन इन सबका मूल संदेश एक ही है- सत्य की खोज करना, आत्मा के उद्देश्य को जानना और मोक्ष (परम मुक्ति) प्राप्त करना।

हिंदू ग्रंथों को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया

  • श्रुति ग्रंथ: (जैसे वेद, उपनिषद, दर्शन, वेदांग और गीता) जो मूल आध्यात्मिक ज्ञान और सत्य पर आधारित हैं। धर्म के वास्तविक और व्यावहारिक स्वरूप को गहराई से समझने के लिए इन्हीं श्रुति ग्रंथों का अध्ययन करना सबसे सही माना जाता है।
  • स्मृति ग्रंथ: (जैसे पुराण, स्मृतियां और महाकाव्य) जो तत्कालीन इतिहास, संस्कृति और सामाजिक नियमों को प्रदर्शित करते हैं।

यदि आप बिना भटके सनातन धर्म के इसी मूल सार को सरल शब्दों में समझना चाहते हैं और स्वयं को जानने की एक अद्भुत यात्रा पर निकलना चाहते हैं, तो यह संक्षिप्त गाइड आपके लिए एक बेहतरीन मार्गदर्शक साबित होगी। आइए जानते हैं कि आपको अपनी शुरुआत कहां से करनी चाहिए...

नासदीय सूक्त

आपके मन में यह सवाल उठता है कि इस सृष्टि या ब्रह्मांड की उत्पत्ति से पहले क्या था? क्या तब ईश्वर का अस्तित्व था? और यदि ईश्वर था, तो उससे भी पहले क्या था या ईश्वर को किसने बनाया? तो इन सभी गूढ़ रहस्यों को समझने के लिए आपको ऋग्वेद के 10वें मंडल में दर्ज 'नासदीय सूक्त' का अध्ययन जरूर करना चाहिए। बस यही काफी है। वैसे सभी ग्रंथ ईश्वर और सृष्टी से ज्यादा आत्मा को जानने पर जोर देते हैं क्योंकि जब तक आप खुद को नहीं जान लेते हैं तब तक ईश्वर और सृष्टी को जानना असंभव है। यह वैसा ही है कि जब तक आप गाड़ी या पेट में ईंधन नहीं भरते तब तक कहीं भी पहुंचना मुश्किल है। अंधेरे में लट्ठ चलाने जैसा है।

श्रीमद्भगवद्गीता

यदि आपके मन में आत्मा, पुनर्जन्म, मोक्ष या मुक्ति को लेकर गहरे सवाल हैं, तो आपको इसके विस्तारपूर्वक अध्ययन के लिए हमारे प्रमुख उपनिषदों (जैसे—ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुंडक, मांडूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छांदोग्य और बृहदारण्यक) की शरण में जाना चाहिए। लेकिन यदि आपके पास इन सभी उपनिषदों को पढ़ने का समय नहीं है, तो आप केवल भगवान श्रीकृष्ण की 'श्रीमद्भगवद्गीता' का अध्ययन कर सकते हैं, जो सभी उपनिषदों का निचोड़ (सार) है। इसके अलावा, अद्वैत दर्शन को और अधिक सरलता से सीधे समझने के लिए महर्षि अष्टावक्र द्वारा रचित 'अष्टावक्र गीता' का अध्ययन करना भी एक बेहतरीन विकल्प है।

मुक्तिका और मांडूक्य उपनिषद

मुक्तिका उपनिषद: मुक्तिका उपनिषद में प्रभु श्रीराम और हनुमानजी का एक महत्वपूर्ण संवाद है। हनुमानजी के मोक्ष के मार्ग के बारे में पूछने पर, भगवान राम बताते हैं कि वास्तविक मुक्ति का साधन ज्ञान है। यदि कोई व्यक्ति केवल मांडूक्य उपनिषद का पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर ले, तो वह मोक्ष प्राप्त करने में समर्थ हो सकता है।.... रामजी कहते हैं कि यदि मांडूक्य से ज्ञान न मिले, तो साधक को 10 उपनिषदों का अध्ययन करना चाहिए, फिर 32 और अंत में मोक्ष प्राप्ति के लिए सभी 108 उपनिषदों का क्रम अपनाना चाहिए। शुक्ल यजुर्वेद से संबधित यह उपनिषद 108 उपनिषदों की प्रमाणित सूची प्रदान करने के लिए सबसे अधिक जाना जाता है। 

"माण्डूक्यमेकमेवाळमुमुक्षूणां विमुक्तये"- श्रीराम

अर्थात: मोक्ष की इच्छा रखने वाले के लिए केवल मांडूक्य उपनिषद का ज्ञान ही काफी है। इस उपनिषद का मुख्य उद्देश्य 'ॐ' (ओम्) अक्षर की व्याख्या करना और इसके माध्यम से आत्मा (चेतना) के स्वरूप को समझाना है। इसमें बताया गया है कि यह संपूर्ण ब्रह्मांड और कुछ नहीं, बल्कि 'ॐ' का ही विस्तार है।

मांडूक्य उपनिषद

मांडूक्य उपनिषद में समस्त वेद, उपनिषद, पुराण, गीता, सूत्र और स्मृति ग्रंथों का सार यानी निचोड़ शामिल है। यह अथर्ववेद के अंतर्गत आता है। केवल मांडूक्य उपनिषद को पढ़ और समझ लेना पर्याप्त होगा। इसे जानने के बाद आप भली-भांति समझ जाएंगे कि सनातन धर्म के गूढ़ ज्ञान का मूल मर्म क्या है, इसका प्राकट्य क्यों हुआ और यह मानव जीवन की सार्थकता के लिए हमसे क्या चाहता है। मांडूक्य उपनिषद सनातन धर्म के सबसे छोटे, लेकिन सबसे शक्तिशाली और गंभीर उपनिषदों में से एक है। आकार में यह बेहद संक्षिप्त है- इसमें केवल 12 मंत्र हैं।

महाभारत

महाभारत एक अत्यंत विशालकाय और अद्भुत ग्रंथ है, जिसे भारतीय परंपरा में 'पंचम वेद' (पांचवां वेद) की उपाधि दी गई है। इस महान महाकाव्य में वह सब कुछ समाहित है, जो हिंदू सनातन धर्म का मूल आधार है। इसमें न केवल वेदों, उपनिषदों और पुराणों का गूढ़ ज्ञान मिलता है, बल्कि तत्कालीन भारतीय इतिहास, राजनीति और समाज की जीवंत झलक भी दिखाई देती है। यदि आपके पास समय हो, तो इसका अध्ययन अवश्य करें; क्योंकि इस महाग्रंथ में केवल 'श्रीमद्भगवद्गीता' ही नहीं, बल्कि इसके अलावा भी अनुगीता, व्याधगीता और पराशर गीता जैसी कई अन्य अद्भुत गीताएं संग्रहित हैं जो जीवन के हर पहलू का मार्गदर्शन करती हैं।

- शैली प्रकाश 

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