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Swami Raghavacharya Ji Maharaj: जीवन में आचार्य ही क्यों हैं आश्रय? स्वामी राघवाचार्य जी महाराज ने बताया

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Importance of Guru: जीवन में आचार्य ही इसलिए आश्रय हैं क्योंकि वे जीव को भगवान से जोड़ते हैं। वे अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान और भक्ति के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। 
 

Swami Raghavacharya Ji Maharaj
Guidance of Saints: सनातन धर्म में आचार्य का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। आचार्य केवल ज्ञान देने वाले गुरु नहीं होते, बल्कि वे जीव और भगवान के बीच सेतु का कार्य करते हैं। संसार में रहने वाला जीव अज्ञान, मोह और माया के कारण भगवान को भूल जाता है। उसे यह भी पता नहीं होता कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है और उसे किस मार्ग पर चलना चाहिए। ऐसे समय में आचार्य ही जीव को सही दिशा दिखाते हैं और भगवान की शरण में जाने का मार्ग बताते हैं।

स्वामी राघवाचार्य जी महाराज कहते हैं कि यदि जीव आचार्य की बात को नहीं माने और अपने मन के अनुसार जीवन जीने लगे, तो उसे अनेक प्रकार के संकटों का सामना करना पड़ सकता है। मनुष्य की बुद्धि सीमित है और वह संसार के आकर्षणों में आसानी से फँस जाता है। इसलिए उसे ऐसे मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है, जो शास्त्रों का सही अर्थ समझाकर उसे जीवन का वास्तविक लक्ष्य बताए। आचार्य जीव को समझाते हैं कि संसार के भोग और सुख स्थायी नहीं हैं। सच्चा सुख भगवान की शरण में जाने से ही प्राप्त होता है।

आचार्य और भगवान के बीच संबंध

आचार्य वह पवित्र माध्यम हैं, जो ब्रह्म और जीव के बीच रहकर दोनों का कल्याण करते हैं। भगवान स्वयं करुणामय हैं और जीवों का कल्याण चाहते हैं, लेकिन जीव अपने अज्ञान के कारण भगवान को पहचान नहीं पाता। इसलिए भगवान की कृपा आचार्य के माध्यम से जीव तक पहुँचती है। आचार्य कथा, प्रवचन, शास्त्र और उपदेश के माध्यम से जीव की बुद्धि में यह बात स्थापित करते हैं कि उसे भगवान की शरण ग्रहण करनी चाहिए।

भगवान के जाने के बाद कौन संभालता है?

भगवान जब धरती पर अवतार लेकर लीला करते हैं, तब वे स्वयं लोगों को धर्म और सत्य का मार्ग बताते हैं। उनके प्रत्यक्ष रहते हुए अनेक लोग उनकी शरण में आते हैं। लेकिन जब भगवान अपनी लीला पूरी करके वापस चले जाते हैं, तब संसार के लोग फिर से माया और भोग में फँसने लगते हैं। तब प्रश्न उठता है कि भगवान के जाने के बाद जीवों को कौन संभालेगा और उन्हें सही मार्ग कौन बताएगा? यहीं आचार्य की महिमा सामने आती है। आचार्य भगवान के संदेश को आगे बढ़ाते हैं। वे जीवों को समझाते हैं कि भगवान का बताया हुआ मार्ग ही कल्याण का मार्ग है। वे स्वयं भगवान की आज्ञा और शास्त्रों के अनुसार जीवन जीकर दूसरों को भी उसी मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

भगवान के कार्य को आगे बढ़ाते हैं आचार्य 

भाव यह है कि भगवान कहते हैं कि मैंने संसार को धर्म और सत्य का मार्ग बता दिया, लेकिन मेरे जाने के बाद यदि जीव फिर से संसार की माया में फँस गए तो उन्हें कौन संभालेगा? तब आचार्य भगवान के कार्य को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं। वे कहते हैं कि प्रभु, आप चिंता मत कीजिए। आपके प्रत्यक्ष रहते तो कुछ लोग आपकी शरण में आए, जैसे विभीषण और सुग्रीव जैसे भक्त आपकी शरण में पहुँचे। लेकिन हम आपके संदेश को घर-घर तक पहुँचाएँगे और संसार के अधिक से अधिक जीवों को आपकी शरण का मार्ग बताएँगे।

आचार्य ही दिखाते हैं बैकुंठ का रास्ता 

आचार्य का सबसे बड़ा कार्य यही है कि वे जीव को संसार से उठाकर भगवान की ओर ले जाएँ। वे जीव को बताते हैं कि हमारा वास्तविक घर यह संसार नहीं, बल्कि भगवान का धाम है। संसार में रहते हुए मनुष्य माया, मोह और भोग में उलझ जाता है, लेकिन आचार्य उसे बार-बार उसके वास्तविक लक्ष्य की याद दिलाते हैं। आचार्य जीव को केवल उपदेश नहीं देते, बल्कि अपने आचरण से भी सिखाते हैं। वे शास्त्रों की बात सरल भाषा में समझाते हैं, भगवान की कथाएँ सुनाते हैं और भक्तिमार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उनके माध्यम से जीव को भगवान की शरण का महत्व समझ में आता है।

आचार्य का आश्रय ही है जीव का सहारा 

इसलिए जीवन में आचार्य का आश्रय अत्यंत आवश्यक है। जब मनुष्य स्वयं सही और गलत का निर्णय नहीं कर पाता, तब आचार्य उसका मार्गदर्शन करते हैं। जब जीव भगवान को भूल जाता है, तब आचार्य उसे भगवान की याद दिलाते हैं। जब जीव संसार की माया में फँस जाता है, तब आचार्य उसे उस बंधन से निकलने का मार्ग बताते हैं। आचार्य की कृपा से ही जीव के भीतर भगवान की शरण में जाने की इच्छा जागती है। इसलिए आचार्य केवल शिक्षक नहीं, बल्कि जीव के वास्तविक हितैषी और कल्याणकारी मार्गदर्शक हैं। उनके चरणों का आश्रय लेकर, उनके बताए मार्ग पर चलकर और भगवान के प्रति श्रद्धा रखकर ही जीव अपने जीवन के परम उद्देश्य को प्राप्त कर सकता है।

आचार्य का महान कार्य क्या है?

जीवन में आचार्य ही इसलिए आश्रय हैं क्योंकि वे जीव को भगवान से जोड़ते हैं। वे अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान और भक्ति के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। भगवान का संदेश जीवों तक पहुंचाना, उन्हें सनमार्ग दिखाना और भगवान की शरण में पहुंचाना आचार्य का महान कार्य है। इसलिए जिस जीव को अपने जीवन का वास्तविक कल्याण चाहिए, उसे आचार्य के चरणों में श्रद्धा और विश्वास के साथ आश्रय लेना चाहिए। आचार्य की कृपा से ही जीव भगवान की शरण का मार्ग पहचानता है और अंततः अपने परम लक्ष्य की ओर बढ़ता है।

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