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Sawan Monday: सावन के तीसरे सोमवार पर दक्षिण काली मंदिर बना आस्था का केंद्र, श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Shiva Bhakti: शिवभक्ति, तपस्या और आस्था का यह संगम धर्मनगरी हरिद्वार में सावन की आध्यात्मिक छटा को और भी विशेष बना रहा है। श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर केवल दर्शन का नहीं, बल्कि साधना, संकल्प और शिवभक्ति की अनुभूति का भी केंद्र बन गया है।

Shiva Sadhana
Shiva Sadhana: सावन के तीसरे सोमवार पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। कांवड़ यात्रा के समापन के बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई। विशेष रूप से सिद्धपीठ श्री दक्षिण काली मंदिर परिसर स्थित पूज्य आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज के आश्रम में उनकी कठोर साधना के दर्शन और आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।

हालिया रिपोर्टों में भी स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की प्रतिदिन लगभग 22 घंटे की साधना को सावन के तीसरे सोमवार के प्रमुख आध्यात्मिक आकर्षणों में बताया गया है। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी सनातन संस्कृति में आस्था रखने वाले श्रद्धालु इस साधना के दर्शन के लिए हरिद्वार पहुंच रहे हैं।

आश्रम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के बीच स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की साधना को लेकर विशेष चर्चा देखने को मिल रही है। भक्तों का कहना है कि लगातार लंबे समय तक एक ही आसन पर बैठकर साधना करना सामान्य मनुष्य के लिए अत्यंत कठिन है। उनके अनुसार, यह साधना भगवान शिव के प्रति असाधारण समर्पण, अनुशासन और संकल्प का प्रतीक है।

श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र

श्रद्धालुओं के बीच उनके रुद्राभिषेक को लेकर भी गहरी उत्सुकता बनी हुई है। भक्तों के अनुसार, लगभग 18 किलोग्राम के पात्र से हजारों घड़ों जल द्वारा प्रतिदिन रुद्राभिषेक किया जाना साधारण अनुष्ठान नहीं, बल्कि कठोर तप, अनुशासन और शिवभक्ति का परिचायक है। श्रद्धालुओं की भावनाओं को शब्दों में कहें तो यह केवल पूजा नहीं, बल्कि तपस्या है। यह केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक दृढ़ संकल्प है। हरिद्वार स्थित श्री दक्षिण काली मंदिर स्वयं भी श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह सिद्धपीठ नील पर्वत की गोद में गंगा तट पर स्थित है। स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज यहां निरंजन पीठाधीश्वर एवं आचार्य महामंडलेश्वर के रूप में जुड़े हुए हैं।

सावन के पवित्र महीने में ज्योतिर्लिंगों और प्रमुख शिवधामों के दर्शन के बाद हरिद्वार स्थित स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज का आश्रम भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। उनकी साधना के दर्शन के लिए पहुंच रहे भक्तों में उनके प्रति श्रद्धा और भक्ति का भाव लगातार गहराता नजर आ रहा है।

भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास

श्रद्धालुओं का कहना है कि स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की साधना उन्हें भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास, त्याग, अनुशासन और संकल्प की प्रेरणा देती है। सावन के तीसरे सोमवार पर दक्षिण काली मंदिर परिसर का वातावरण भी इसी आध्यात्मिक भाव से सराबोर रहा। चारों ओर ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष गूंजते रहे और आश्रम में चल रही साधना के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं।

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