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Devi Neha Saraswat: जीवन का कैसे लें असली आनंद, देवी नेहा सारस्वत ने बताया रहस्य

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
देवी नेहा निधि सारस्वत
सार

Spiritual Thoughts: जीवन का एक नियम बना लेना चाहिए कि जो चला गया, उसके पीछे नहीं भागना है। बीती हुई बातों को स्वीकार करके आगे बढ़ना ही समझदारी है। 
 

Devi Neha Saraswat
Spiritual Motivation: जीवन में सुख और दुख दोनों का अपना महत्व होता है। कई बार हम उन चीजों, रिश्तों या परिस्थितियों को पकड़े रहते हैं जो हमारे जीवन से दूर हो चुकी होती हैं। हमें लगता है कि जो चला गया, उसके बिना जीवन अधूरा हो गया है। लेकिन वास्तव में जीवन का नियम यही है कि कुछ चीजें हमारे पास रहने के लिए आती हैं और कुछ चीजें हमें कुछ सीख देकर चली जाती हैं। हनुमान ज्वाली के सामने लिखा है, “छूट तहीं बन दे महासुख हुई।” इसका अर्थ है कि कई बार जिस चीज के छूटने का हमें दुख होता है, वही आगे चलकर हमारे जीवन में बड़े सुख का कारण बन जाती है। इसलिए जीवन में जो जा रहा है, उसे जाने देना चाहिए और जो छूट रहा है, उसे सहज भाव से स्वीकार करना चाहिए।

हम अक्सर किसी के दूर जाने या किसी चीज के हाथ से निकल जाने को अपना नुकसान समझ लेते हैं। लेकिन प्रकृति हमें हर पल एक बड़ा संदेश देती है। पेड़ जब अपने सूखे पत्तों को गिरा देते हैं, तभी उन पर नए और हरे पत्तों का आगमन होता है। अगर पेड़ पुराने पत्तों को पकड़े रहते, तो नई हरियाली के लिए जगह नहीं बन पाती। ठीक इसी तरह मनुष्य के जीवन में भी कुछ पुरानी चीजों का समाप्त होना जरूरी होता है। 

कई बार किसी रिश्ते का टूटना, किसी अवसर का खत्म होना या किसी परिस्थिति का बदलना हमारे लिए नई शुरुआत का रास्ता खोल देता है। इसलिए हर बिछड़ने को दुख नहीं समझना चाहिए। कई बार यह भगवान की ऐसी कृपा होती है जिसे हम उस समय समझ नहीं पाते।

जीवन में बदलाव को स्वीकार करना सीखें

जीवन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। समय के साथ परिस्थितियां बदलती हैं, लोग बदलते हैं और हमारे अनुभव भी बदलते हैं। जो व्यक्ति इन बदलावों को स्वीकार करना सीख लेता है, वही जीवन में वास्तविक शांति और आनंद प्राप्त कर पाता है। हमें अपने मन को इतना मजबूत बनाना चाहिए कि हम बीती हुई बातों में उलझे न रहें। पुराने दुखों को बार-बार याद करने से केवल मन परेशान होता है। इसके बजाय हमें वर्तमान में जीना चाहिए और आने वाले अवसरों का स्वागत करना चाहिए।

जो मिला है उसका आनंद लेना सीखें

जीवन का आनंद तभी लिया जा सकता है जब हम अपने पास मौजूद चीजों के लिए आभारी रहें। कई बार हम उन चीजों के पीछे भागते रहते हैं जो हमारे पास नहीं हैं और इसी कारण हमारे पास जो सुंदर है, उसकी खुशी महसूस नहीं कर पाते। हमें हर दिन को एक नए अवसर की तरह देखना चाहिए। जो लोग हमारे जीवन में हैं, जो प्रेम और सहयोग हमें मिल रहा है, जो छोटे-छोटे सुख हमें प्राप्त हैं, उनका सम्मान करना चाहिए। यही छोटी-छोटी खुशियां जीवन को सुंदर बनाती हैं।

आगे बढ़ना ही जीवन का नियम

जीवन का एक नियम बना लेना चाहिए कि जो चला गया, उसके पीछे नहीं भागना है। बीती हुई बातों को स्वीकार करके आगे बढ़ना ही समझदारी है। जब हम पुरानी चीजों को छोड़ देते हैं, तभी हमारे जीवन में नई खुशियों और नए अवसरों के लिए जगह बनती है। ईश्वर जो भी करते हैं, उसमें कोई न कोई कारण जरूर होता है। इसलिए विश्वास रखें कि हर परिवर्तन के पीछे कोई अच्छा संदेश छिपा हो सकता है। जीवन में आने वाली हर परिस्थिति को सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार करें और खुले मन से नई शुरुआत करें। सच्चा आनंद उसी व्यक्ति को मिलता है जो अतीत के बोझ को छोड़कर वर्तमान को प्रेम से जीता है। इसलिए जो चला गया उसे जाने दें, जो आ रहा है उसे खुले दिल से स्वीकार करें और हर पल को प्रसन्नता के साथ जीना सीखें। यही जीवन का वास्तविक आनंद है।

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