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Swami Gyananand Ji Maharaj: जीवन में क्रोध पर कैसे करें नियंत्रण? स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने बताया सरल उपाय

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Anger Control: क्रोध आने के समय उसे रोकना ही पर्याप्त नहीं है। इसका स्थायी समाधान विचारों में सकारात्मकता लाना है। इसके लिए नियमित रूप से गीता का चिंतन और उसके संदेशों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए।

Swami Gyananand Ji Maharaj
Life Changing Thoughts: क्रोध मनुष्य की स्वाभाविक भावना है, लेकिन जब यही क्रोध हमारे नियंत्रण से बाहर हो जाता है तो यह रिश्तों, व्यवहार और मानसिक शांति को प्रभावित करने लगता है। गुस्से में इंसान कई बार ऐसी बातें बोल देता है, जिनका बाद में उसे पछतावा होता है। इसलिए क्रोध को खत्म करने से ज्यादा जरूरी है कि हम उसे नियंत्रित करना सीखें और सही समय पर अपने मन को शांत कर सकें। स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज बताते हैं कि क्रोध को रोकने का सबसे सरल तरीका है कि उस समय सबसे पहले खुद को रोक लिया जाए। जब गुस्सा आए तो तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ क्षण रुकना चाहिए। यही छोटा सा विराम क्रोध को शांत करने की दिशा में पहला कदम बन सकता है।

स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के अनुसार, जब व्यक्ति को बहुत अधिक क्रोध आए तो उसे तुरंत बोलने या प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए। इसके लिए लगभग 10 सेकंड का छोटा सा विराम लिया जा सकता है। इस दौरान मन को स्थिर करने का प्रयास करें और अपनी सांसों पर ध्यान दें। कई बार केवल कुछ सेकंड रुकने से ही हमारे भीतर उठ रही तीखी प्रतिक्रिया कमजोर पड़ने लगती है। यदि उस समय हम सामने वाले को जवाब देने के बजाय खुद को शांत कर लें, तो विवाद को बढ़ने से रोका जा सकता है। यही छोटा सा धैर्य बड़े नुकसान से बचा सकता है।

क्रोध में भी शब्दों का रखें ध्यान

गुस्से के समय सबसे बड़ी गलती यह होती है कि हम बिना सोचे-समझे शब्दों का इस्तेमाल करने लगते हैं। सामने वाला व्यक्ति भी अगर क्रोध में है, तो हमारी कठोर भाषा उसके गुस्से को और बढ़ा सकती है। इसलिए ऐसे समय में शांत शब्दों का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। अगर सामने वाला व्यक्ति गुस्से में है, तो हमें उसकी तरह प्रतिक्रिया देने के बजाय अपनी वाणी में संयम रखना चाहिए। प्यार और शांति से कही गई बात कई बार उस व्यक्ति के क्रोध को भी कम कर सकती है।

स्थायी समाधान है सकारात्मक सोच

स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के अनुसार, केवल क्रोध आने के समय उसे रोकना ही पर्याप्त नहीं है। इसका स्थायी समाधान विचारों में सकारात्मकता लाना है। इसके लिए नियमित रूप से गीता का चिंतन और उसके संदेशों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। जब हमारे विचार सकारात्मक और शांत होने लगते हैं, तो छोटी-छोटी बातों पर प्रतिक्रिया देने की आदत भी धीरे-धीरे कम होने लगती है।

इसलिए क्रोध के समय लिया गया 10 सेकंड का विराम तत्काल उपाय है, जबकि सकारात्मक विचार और गीता चिंतन क्रोध पर स्थायी नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। अंततः क्रोध को जीतने का अर्थ यह नहीं है कि हमें कभी गुस्सा आए ही नहीं। असली सफलता तब है, जब क्रोध आने के बाद भी हम अपने शब्दों और व्यवहार को अपने नियंत्रण में रख सकें। थोड़ा धैर्य, कुछ सेकंड का विराम और सकारात्मक चिंतन जीवन में शांति लाने का सरल रास्ता बन सकता है।

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