Motivational Thoughts: अगर किसी चीज को पाने की इच्छा वास्तव में आपके जीवन के लक्ष्य से जुड़ी है, तो उसे हासिल करने के लिए ईमानदारी से मेहनत करनी चाहिए।
Spiritual Motivation: आज के समय में सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। हम जब इंस्टाग्राम, फेसबुक या दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों की तस्वीरें और वीडियो देखते हैं, तो अक्सर लगता है कि बाकी सभी लोगों की जिंदगी हमसे ज्यादा अच्छी और परफेक्ट है। कोई विदेश घूम रहा है, कोई महंगी गाड़ी खरीद रहा है, कोई नया घर दिखा रहा है तो कोई अपनी कामयाबी की तस्वीरें साझा कर रहा है। इन चीजों को देखकर हमारे मन में यह भावना आने लगती है कि हम बहुत कुछ मिस कर रहे हैं। इसी भावना को FOMO यानी Fear of Missing Out कहा जाता है।
साध्वी कृष्णप्रिया जी बताती हैं कि जब भी जीवन में किसी व्यक्ति को देखकर आपके मन में तुलना की भावना पैदा हो और आपको लगे कि मुझे भी इसके जैसा बनना है, तो तुरंत उसके पीछे भागने के बजाय खुद से कुछ सवाल पूछने चाहिए। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि क्या वास्तव में वह चीज आपके जीवन का लक्ष्य है? क्या आपने सच में अपने लिए ऐसा जीवन चुना है या केवल किसी दूसरे व्यक्ति को देखकर आपके मन में उसे पाने की इच्छा पैदा हुई है?
दूसरा सवाल यह होना चाहिए कि क्या वास्तव में मैं ऐसा जीवन चाहता हूं और इसकी वजह क्या है? कहीं ऐसा तो नहीं कि सामने वाले व्यक्ति के पास कोई चीज है, इसलिए आपको भी वही चीज चाहिए। केवल इसलिए किसी वस्तु या जीवनशैली को पाने की इच्छा करना कि वह दूसरे के पास है, सही दिशा नहीं है।
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अपनी दिशा और लक्ष्य को पहचानें
साध्वी कृष्णप्रिया जी के अनुसार, अगर किसी चीज को पाने की इच्छा वास्तव में आपके जीवन के लक्ष्य से जुड़ी है, तो उसे हासिल करने के लिए ईमानदारी से मेहनत करनी चाहिए। जरूरी नहीं कि आप एक साथ बहुत बड़ा कदम उठाएं। अगर आप अपने लक्ष्य की दिशा में रोज थोड़ा-सा भी आगे बढ़ रहे हैं, तो धीरे-धीरे अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं।
तुलना नहीं, प्रेरणा बनाएं
सबसे बड़ी समस्या तब होती है जब तुलना के कारण हम अपनी दिशा से भटकने लगते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी के पास महंगा आईफोन है और आपको केवल इसलिए आईफोन चाहिए क्योंकि उसके पास है, तो यह तुलना है। लेकिन अगर आपको लगता है कि कोई चीज आपके काम और जरूरत के लिए उपयोगी है और आप उसे पाने के लिए मेहनत कर रहे हैं, तो यह एक सकारात्मक लक्ष्य हो सकता है। इसलिए सोशल मीडिया पर दूसरों की जिंदगी देखकर परेशान होने के बजाय अपनी जरूरत, अपने लक्ष्य और अपनी मेहनत पर ध्यान देना चाहिए। दूसरों की जिंदगी तुलना का कारण नहीं, बल्कि सही तरीके से देखा जाए तो प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।