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Sadhvi Krishnapriya Ji: जीवन में सूतक के दौरान कभी न करें ये गलतियां, साध्वी कृष्णप्रिया जी ने बताया कारण

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कथावाचक साध्वी कृष्णप्रिया जी
सार

Religious Beliefs: जब परिवार के सदस्य भगवान का नाम जप करते हैं, भजन करते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं, तो उसका पुण्य दिवंगत आत्मा की आगे की यात्रा में भी सहायक माना जाता है। 
 

Sadhvi Krishnapriya Ji
Bhajan During Sutak: सनातन परंपरा में जब किसी परिवार में किसी सदस्य का निधन होता है, तब कुछ दिनों तक सूतक माना जाता है। इस अवधि में परिवार के लोग कुछ धार्मिक और सामाजिक नियमों का पालन करते हैं। इसका उद्देश्य शोक व्यक्त करना, मन को शांत रखना और दिवंगत आत्मा के प्रति सम्मान प्रकट करना होता है। हालांकि समय के साथ सूतक को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं भी लोगों के बीच फैल गई हैं। इन्हीं भ्रमों को दूर करते हुए साध्वी कृष्णप्रिया जी बताती हैं कि सूतक का अर्थ भगवान से दूरी बनाना नहीं है, बल्कि इस समय ईश्वर का स्मरण पहले से भी अधिक करना चाहिए।

साध्वी कृष्णप्रिया जी कहती हैं कि बहुत से लोग यह कहते हैं कि हमारे घर में किसी की मृत्यु हो गई है, इसलिए हम पर सूतक लगा है और अब हम भजन, कीर्तन या नाम जप नहीं कर सकते। लेकिन यह धारणा सही नहीं है। भगवान का नाम लेने पर कभी कोई रोक नहीं होती। ईश्वर का स्मरण हर परिस्थिति में किया जा सकता है। सुख हो या दुख, भगवान का नाम हमेशा मन को शक्ति देता है और जीवन में आगे बढ़ने का साहस भी प्रदान करता है।

किन कार्यों से बचना?

सूतक के दौरान कुछ धार्मिक और सामाजिक नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है। इस समय मंदिर जाना, बड़े धार्मिक आयोजन करना या नियमित पूजा-पाठ की कुछ विधियों से कुछ समय के लिए विराम रखा जाता है। साथ ही शुभ कार्यों और उत्सवों में भी भाग नहीं लिया जाता। इन नियमों का उद्देश्य शोक की भावना का सम्मान करना है। लेकिन इन नियमों का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि व्यक्ति भगवान से अपना संबंध ही तोड़ दे।

भजन और नाम जप क्यों नहीं छोड़ना 

साध्वी कृष्णप्रिया जी के अनुसार भजन और भगवान का नाम जप कभी नहीं छोड़ना चाहिए। जब परिवार किसी अपने को खो देता है, तब सभी लोग मानसिक रूप से बहुत दुखी होते हैं। ऐसे समय में भगवान का नाम ही मन को संभालने का सबसे बड़ा सहारा बनता है। नाम जप करने से मन को शांति मिलती है, दुख सहने की शक्ति मिलती है और ईश्वर पर विश्वास भी मजबूत होता है। इसलिए सूतक के समय भी श्रद्धा और सच्चे मन से भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए।

दिवंगत आत्मा के लिए भी लाभकारी नाम जप

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब परिवार के सदस्य भगवान का नाम जप करते हैं, भजन करते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं, तो उसका पुण्य दिवंगत आत्मा की आगे की यात्रा में भी सहायक माना जाता है। साध्वी कृष्णप्रिया जी कहती हैं कि यही वह पुण्य है जो उस व्यक्ति के लिए सबसे बड़ा साथ निभा सकता है। इसलिए शोक के समय भगवान का स्मरण केवल जीवित लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि दिवंगत आत्मा की मंगलकामना के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

दुख की घड़ी में भगवान का सहारा सबसे बड़ा

जब जीवन में किसी प्रियजन का साथ छूट जाता है, तब मन टूट जाता है और कई तरह के सवाल उठने लगते हैं। ऐसे समय में भगवान का नाम मन को स्थिर करता है और भीतर से नई शक्ति देता है। यही कारण है कि संत-महात्मा हमेशा कहते हैं कि दुख के समय भगवान को याद करना कभी बंद नहीं करना चाहिए। ईश्वर का स्मरण मन में आशा, धैर्य और विश्वास बनाए रखता है।

हर परिस्थिति में ईश्वर के नाम का सहारा 

सूतक का पालन करना हमारी धार्मिक परंपरा का एक हिस्सा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि भगवान का नाम लेना छोड़ दिया जाए। साध्वी कृष्णप्रिया जी का संदेश है कि सूतक के दौरान मंदिर जाने या कुछ धार्मिक विधियों से विराम रखा जा सकता है, लेकिन भजन, सत्संग और नाम जप कभी नहीं छोड़ना चाहिए। भगवान का स्मरण हर समय शुभ होता है। यही साधना मन को शांति देती है, दुख को सहने की शक्ति देती है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिवंगत आत्मा की आगे की यात्रा में भी सहायक बनती है। इसलिए जीवन की हर परिस्थिति में ईश्वर के नाम का सहारा बनाए रखना ही सबसे बड़ा धर्म और सबसे बड़ी शक्ति है।

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