facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  saint stories  sadhvi krishna priya ji told what is the need to believe in the idol of god

Sadhvi Krishna Priya Ji: ईश्वर की मूर्ति विग्रह में मानने की क्या है आवश्यकता, साध्वी कृष्ण प्रिया ने बताया

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कथावाचक साध्वी कृष्णप्रिया जी
सार

Religious Story: जब भक्त श्रद्धा, प्रेम और विश्वास के साथ भगवान की मूर्ति के सामने बैठता है, तब उसका मन संसार से हटकर ईश्वर में लगने लगता है। मूर्ति स्वयं भगवान नहीं होती, बल्कि भगवान के स्मरण और ध्यान का माध्यम होती है। 
 

Sadhvi Krishna Priya ji
Inspirational Spiritual Story: सनातन धर्म में अक्सर यह प्रश्न पूछा जाता है कि जब ईश्वर निराकार, सर्वव्यापी और अनंत हैं, तो फिर उनकी मूर्ति या विग्रह की पूजा करने की आवश्यकता क्यों है? कई लोगों के मन में यह जिज्ञासा रहती है कि क्या भगवान केवल मूर्ति में ही निवास करते हैं या फिर मूर्ति पूजा का कोई गहरा आध्यात्मिक रहस्य भी है। इस विषय पर साध्वी कृष्ण प्रिया ने एक अत्यंत सरल और प्रेरणादायक प्रसंग सुनाकर इस प्रश्न का सुंदर उत्तर दिया।

एक बार एक महान संत के पास उनका एक शिष्य आया। शिष्य ने विनम्रता से पूछा कि गुरुदेव, जब ईश्वर निराकार हैं, उनका कोई आकार नहीं है और वे कण-कण में विद्यमान हैं, तो फिर उनकी मूर्ति या विग्रह को मानने और उसकी पूजा करने की क्या आवश्यकता है?" संत ने उस समय शिष्य के प्रश्न का कोई उत्तर नहीं दिया। वे शांत रहे और मुस्कुराकर बात को वहीं समाप्त कर दिया। शिष्य को लगा कि शायद गुरुजी बाद में इस प्रश्न का उत्तर देंगे।

गुरुजी का अनोखा उत्तर

लगभग पंद्रह दिन बाद गुरुजी अपने शिष्यों के साथ गंगाजी स्नान करने गए। स्नान के बाद उन्होंने उसी शिष्य से कहा कि जाओ, मेरे लिए थोड़ा पानी लेकर आओ। शिष्य तुरंत गया और गंगाजी का जल एक लोटे में भरकर गुरुजी के पास ले आया। गुरुजी ने लोटे की ओर देखकर कहा कि मैंने तो तुमसे पानी मांगा था, यह लोटा क्यों ले आए? शिष्य ने आश्चर्य से कहा कि गुरुदेव, इसमें पानी ही है। गुरुजी ने फिर कहा कि मुझे केवल पानी चाहिए, लोटा नहीं। तब शिष्य ने विनम्रता से उत्तर दिया, "गुरुदेव, बिना किसी पात्र के पानी लाना संभव नहीं है। पानी को लाने के लिए किसी न किसी आधार की आवश्यकता होती है।"

मूर्ति पूजा का गहरा रहस्य

शिष्य की बात सुनकर गुरुजी मुस्कुराए और बोले कि यही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है। जैसे बिना किसी पात्र के पानी को लाना संभव नहीं होता, उसी प्रकार निराकार परमात्मा का अनुभव करने के लिए भी मनुष्य को किसी आधार की आवश्यकता होती है। मूर्ति या विग्रह वही आधार है, जिसके माध्यम से हमारा मन भगवान की ओर स्थिर होता है। गुरुजी ने समझाया कि भगवान किसी एक पत्थर या धातु की मूर्ति तक सीमित नहीं हैं। वे तो सर्वत्र विद्यमान हैं। लेकिन मनुष्य का मन बहुत चंचल होता है। उसे एकाग्र करने के लिए किसी दृश्य स्वरूप की आवश्यकता होती है। मूर्ति उसी एकाग्रता का माध्यम बनती है।

मूर्ति केवल पत्थर नहीं, श्रद्धा का प्रतीक

जब भक्त श्रद्धा, प्रेम और विश्वास के साथ भगवान की मूर्ति के सामने बैठता है, तब उसका मन संसार से हटकर ईश्वर में लगने लगता है। मूर्ति स्वयं भगवान नहीं होती, बल्कि भगवान के स्मरण और ध्यान का माध्यम होती है। जैसे किसी प्रिय व्यक्ति का चित्र देखकर उसकी याद आती है, उसी प्रकार भगवान का विग्रह देखकर भक्त के मन में भक्ति, प्रेम और समर्पण जागृत होता है। इसलिए मूर्ति पूजा का उद्देश्य पत्थर की पूजा करना नहीं, बल्कि उस पत्थर में भगवान के दिव्य स्वरूप का भावपूर्वक दर्शन करना है। यही भाव भक्त को ईश्वर के निकट ले जाता है।

ईश्वर के साक्षात्कार का माध्यम 

इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि निराकार परमात्मा का अनुभव करने के लिए मनुष्य को किसी न किसी आधार की आवश्यकता होती है। मूर्ति या विग्रह वही आधार है, जो हमारे मन को स्थिर करता है और हमें ईश्वर से जोड़ता है। जब भक्ति, श्रद्धा और विश्वास के साथ मूर्ति की पूजा की जाती है, तब वह केवल एक प्रतिमा नहीं रहती, बल्कि ईश्वर के साक्षात्कार का माध्यम बन जाती है। इसलिए मूर्ति पूजा का महत्व बाहरी आडंबर में नहीं, बल्कि उस श्रद्धा और भाव में है, जिसके द्वारा भक्त अपने आराध्य के और अधिक निकट पहुंचता है।

ये भी पढ़ें - भगवद्गीता को क्यों कहते हैं सभी शास्त्रों का सार? जानें सनातन धर्म के महान ग्रंथ का रहस्य

ये भी देखें

Rambhadracharya Ji Maharaj
श्री रामभद्राचार्य जी महाराज
24 July 2026
Chatur Narayan Ji Maharaj
कथावाचक चतुर नारायण जी महाराज
24 July 2026
Acharya Bharat Ji Maharaj
आचार्य भरत जी महाराज
24 July 2026
Rajan Ji Maharaj
श्री राजन जी महाराज
24 July 2026
Swami Raghavacharya Ji Maharaj
स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज
23 July 2026

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel