Spiritual Life: जीवन में जिम्मेदारियां निभाना और अपने कर्तव्यों को पूरा करना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ यह समझना भी जरूरी है कि हमारा समय बहुत मूल्यवान है।
Spiritual Knowledge: रसराज जी महाराज के अनुसार जीवन में रहते हुए हमें अपनी सभी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति पिता है तो उसे पिता होने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। मां है तो परिवार और बच्चों के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरा करना चाहिए। भाई है तो भाई का साथ देना चाहिए। विद्यार्थी है तो मन लगाकर पढ़ाई करनी चाहिए। नौकरी करने वाला व्यक्ति ईमानदारी से अपना काम करे और व्यवसाय करने वाला अपने व्यापार को पूरी मेहनत से आगे बढ़ाए। जीवन से भागना या अपनी जिम्मेदारियों को छोड़ देना आध्यात्मिकता नहीं है।
महाराज जी बताते हैं कि इंसान को अपने सांसारिक कर्तव्यों के साथ भगवान का स्मरण भी करते रहना चाहिए। आज की जिंदगी में लोगों के पास काम से ज्यादा मोबाइल के लिए समय दिखाई देता है। दिनभर काम करने के बाद जब थोड़ा समय मिलता है तो लोग फेसबुक, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम जैसी चीजों में समय बिताने लगते हैं। धीरे-धीरे यह आदत इतनी बढ़ जाती है कि व्यक्ति को पता ही नहीं चलता कि उसका कीमती समय कहां चला गया।
खाली समय न जाने दें व्यर्थ
रसराज जी महाराज इस बात पर विशेष जोर देते हैं कि जब दिनभर की जिम्मेदारियां पूरी हो जाएं और सोने का समय आए, उस समय भी अपने जीवन के बहुमूल्य समय को व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। कई बार व्यक्ति बिस्तर पर लेटने के बाद भी मोबाइल चलाता रहता है। नींद आने लगती है, मोबाइल हाथ से छूट जाता है या चेहरे पर गिर जाता है, फिर भी व्यक्ति उसे उठाकर दोबारा देखने लगता है। यह छोटी सी आदत हमारे समय और मन दोनों को प्रभावित करती है।
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गुरु मंत्र और इष्ट के नाम का स्मरण
महाराज जी के संदेश का मुख्य भाव यह है कि जब संसार के काम समाप्त हो जाएं, तब मन को अपने गुरु मंत्र और इष्ट के नाम में लगाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति की आस्था भगवान राम में है तो वह प्रेम से राम-राम का स्मरण कर सकता है। इसी तरह जिस व्यक्ति की जिस इष्ट देव में श्रद्धा है, वह उसी नाम का जाप कर सकता है।
नाम स्मरण से मन को मिलती है शांति
भगवान के नाम का स्मरण व्यक्ति को अपने भीतर झांकने का अवसर देता है। दिनभर की भागदौड़ और चिंता के बाद जब मन ईश्वर के नाम में लगता है तो व्यक्ति को मानसिक शांति का अनुभव हो सकता है। नाम जाप के लिए किसी विशेष स्थान या बड़ी तैयारी की आवश्यकता नहीं होती। अपने घर में, यात्रा के दौरान या सोने से पहले भी श्रद्धा के साथ भगवान का नाम लिया जा सकता है।
जीवन का कीमती समय जरूरी
रसराज जी महाराज के अनुसार जीवन में जिम्मेदारियां निभाना और अपने कर्तव्यों को पूरा करना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ यह समझना भी जरूरी है कि हमारा समय बहुत मूल्यवान है। जिस समय को हम बिना उद्देश्य मोबाइल और दूसरी चीजों में गंवा देते हैं, वही समय भगवान के नाम स्मरण और आत्मचिंतन में लगाया जा सकता है। इसलिए जीवन में अपने सभी कर्तव्यों को पूरा करते हुए जब भी समय मिले, उसे व्यर्थ न गंवाकर अपने गुरु मंत्र और इष्ट के नाम का स्मरण करना चाहिए। यही साधारण-सा अभ्यास मनुष्य के जीवन को आध्यात्मिक दिशा देने और भीतर से शांति पाने का माध्यम बन सकता है।