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Shivam Sadhak Ji Maharaj: जीवन में पुत्र प्राप्ति के लिए क्या करें? शिवम साधक जी महाराज ने बताया उपाय

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Putra Prapti Upay: पुत्रदा एकादशी के दिन अपनी सामर्थ्य और स्वास्थ्य के अनुसार श्रद्धापूर्वक व्रत रखें तथा एकादशी के धार्मिक नियमों का पालन करें। अगले दिन द्वादशी तिथि पर विधि के अनुसार व्रत का पारण करें। 

Shivam Sadhak Ji Maharaj
Putrada Ekadashi Upay: सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना गया है। मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान सुख की कामना रखने वाले दंपतियों के लिए विशेष फलदायी होता है। शिवम साधक जी महाराज द्वारा बताए गए एक उपाय के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान श्रीकृष्ण या भगवान शिव की पूजा करके संतान प्राप्ति की प्रार्थना की जा सकती है। यह उपाय धार्मिक आस्था और परंपरा पर आधारित है।

पुत्रदा एकादशी के दिन पति-पत्नी श्रद्धापूर्वक दो केले लेकर भगवान श्रीकृष्ण या भगवान शिव के मंदिर जाएं। मंदिर में पहुंचकर भगवान के सामने दोनों केले रख दें। इसके बाद मन को शांत करके भगवान से प्रार्थना करें कि हमारे घर में आपकी कृपा से एक स्वस्थ, संस्कारी और भक्त संतान का जन्म हो। प्रार्थना करते समय मन में श्रद्धा और सकारात्मक भाव रखना महत्वपूर्ण माना गया है।

भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर में मंत्र जाप

शिवम साधक जी महाराज कहते हैं कि यदि आप भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर में जाकर यह उपाय कर रहे हैं, तो केले भगवान के सामने अर्पित करने के बाद 108 बार “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। मंत्र का जाप शांत मन से और पूरी श्रद्धा के साथ करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के इस मंत्र का जाप मन को एकाग्र करने और भगवान की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है।

भगवान शिव के मंदिर में करें जाप

यदि आप भगवान शिव के मंदिर में जाकर यह उपाय करते हैं, तो भगवान शिव के सामने केले रखकर 108 बार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। इसके बाद भगवान शिव से संतान सुख की कामना करते हुए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सच्ची श्रद्धा, संयम और सात्त्विक भाव को विशेष महत्व दिया जाता है।

व्रत और द्वादशी का प्रसाद

पुत्रदा एकादशी के दिन अपनी सामर्थ्य और स्वास्थ्य के अनुसार श्रद्धापूर्वक व्रत रखें तथा एकादशी के धार्मिक नियमों का पालन करें। अगले दिन द्वादशी तिथि पर विधि के अनुसार व्रत का पारण करें। इसके बाद एकादशी के दिन भगवान के सामने रखे गए दोनों केलों को प्रसाद मानकर पति-पत्नी श्रद्धापूर्वक ग्रहण करें।

श्रद्धा और सकारात्मक भाव रखें

इस उपाय को करते समय सबसे जरूरी है कि मन में भगवान के प्रति विश्वास और श्रद्धा हो। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान की भक्ति के साथ की गई प्रार्थना भक्त के मन को आशा और सकारात्मकता प्रदान करती है। हालांकि, संतान प्राप्ति निश्चित होने का दावा किसी धार्मिक उपाय से वैज्ञानिक रूप से नहीं किया जा सकता। यदि संतान प्राप्ति में कठिनाई हो रही हो, तो धार्मिक आस्था के साथ योग्य चिकित्सक की सलाह लेना भी उचित है।

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