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Devkinandan Thakur Ji Maharaj: सावन को क्यों कहते हैं साधना का दिव्य अवसर? देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने बताया

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज
सार

Parthiv Shivling: देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सान्निध्य में 30 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक भव्य धार्मिक आयोजन आयोजित किया जाएगा। इस दिव्य कार्यक्रम में 21 लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण, भगवान शिव का दिव्य अभिषेक तथा श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन होगा। 
 

Devkinandan Thakur Ji Maharaj
Parthiv Shivling Nirman: सावन का पावन महीना भगवान शिव की उपासना, भक्ति और साधना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूरे मास में भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। इसी कारण देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और भक्त पूरे श्रद्धा भाव से जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, व्रत, जप, तप तथा पूजा-अर्चना करते हैं। प्रसिद्ध कथा वाचक पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के अनुसार सावन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और ईश्वर से जुड़ने का दिव्य अवसर है। इस माह में की गई सच्चे मन से भक्ति और साधना का फल सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक प्राप्त होता है।

देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज बताते हैं कि सावन का प्रत्येक दिन भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस महीने में यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा, विश्वास और समर्पण के साथ भगवान शिव का स्मरण करता है, उनका अभिषेक करता है या शिव मंत्रों का जाप करता है, तो उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं। शिव साधना मन को शांति देती है, नकारात्मक विचारों को दूर करती है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। यही कारण है कि सावन को साधना का दिव्य अवसर कहा जाता है।

पार्थिव शिवलिंग निर्माण का अद्भुत फल

सावन मास में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण और उसकी विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। पार्थिव शिवलिंग मिट्टी से बनाया जाता है, जिसे भगवान शिव का अत्यंत प्रिय स्वरूप माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पार्थिव शिवलिंग का निर्माण, अभिषेक और पूजन करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही परिवार में खुशहाली, रोगों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति का भी आशीर्वाद मिलता है।

ब्रज की पावन रज से मिलेगा आशीर्वाद

पूज्य महाराज के अनुसार यदि पार्थिव शिवलिंग का निर्माण ब्रज की पावन रज से किया जाए तो उसका पुण्य और भी अधिक बढ़ जाता है। ब्रज भूमि स्वयं श्री राधा-कृष्ण की लीलास्थली है। इसलिए यहां की पवित्र धूल से निर्मित शिवलिंग की पूजा करने पर भगवान शिव के साथ-साथ श्री राधा-कृष्ण की विशेष कृपा भी भक्तों पर बरसती है। यह साधना भक्त के जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति और ईश्वर के प्रति गहरा प्रेम उत्पन्न करती है।

वृंदावन में होगा भव्य धार्मिक आयोजन

सावन के इस पावन अवसर पर वृंदावन स्थित प्रियाकांत जू मंदिर में पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सान्निध्य में 30 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक भव्य धार्मिक आयोजन आयोजित किया जाएगा। इस दिव्य कार्यक्रम में 21 लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण, भगवान शिव का दिव्य अभिषेक तथा श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन होगा। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर माना जा रहा है।

प्रतिदिन होंगे विशेष धार्मिक कार्यक्रम

इस सात दिवसीय आयोजन के दौरान प्रतिदिन सुबह 7 बजे पार्थिव शिवलिंग निर्माण कराया जाएगा। इसके बाद सुबह 10 बजे भगवान शिव का दिव्य अभिषेक एवं पूजन होगा। वहीं दोपहर 3:30 बजे से पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज द्वारा श्री शिव महापुराण कथा का रसपान कराया जाएगा। कथा के माध्यम से भगवान शिव के दिव्य चरित्र, भक्ति और धर्म का संदेश श्रद्धालुओं तक पहुंचेगा।

भक्तों से किया गया सहभागिता का आह्वान

इस दिव्य आयोजन में सभी श्रद्धालुओं से यजमान बनकर पार्थिव शिवलिंग निर्माण, अभिषेक और शिव महापुराण कथा में सहभागी बनने का आग्रह किया गया है। आयोजकों का कहना है कि जो भी भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ इस महोत्सव में भाग लेंगे, वे भगवान शिव की विशेष कृपा के पात्र बनेंगे। सावन का यह पावन अवसर जीवन को भक्ति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक प्रकाश से भरने का श्रेष्ठ माध्यम है। इसलिए सभी श्रद्धालु इस पुण्य आयोजन में शामिल होकर भगवान शिव की आराधना करें और अपने जीवन को शिवमय बनाने का सौभाग्य प्राप्त करें।

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