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Devi Maheshwari Ji: पूजा की तुलसी का घर से बाहर जाना शुभ है या अशुभ? देवी माहेश्वरी जी ने बताया महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कथावाचक देवी माहेश्वरी जी (श्रीजी)
सार

Tulsi Plant Benefits: सनातन धर्म में तुलसी को सुख, शांति, समृद्धि और भगवान की कृपा का प्रतीक माना गया है। जिस घर में तुलसी का आदर होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का वास माना जाता है। 
 

Devi Maheshwari Ji
Religious Traditions: सनातन धर्म में तुलसी का पौधा अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है। इसे केवल एक पौधा नहीं बल्कि मां तुलसी का स्वरूप माना जाता है। भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और शालिग्राम जी की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु का भोग और पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। इसी कारण हर घर में तुलसी के पत्तों का आदर और सम्मान करना आवश्यक माना गया है।

देवी माहेश्वरी जी के अनुसार, जिन घरों में ठाकुर जी, श्री किशोरी जी या युगल सरकार की नियमित सेवा होती है, वहां तुलसी दल का विशेष महत्व है। ऐसे घरों में भगवान को भोग अर्पित करते समय तुलसी का एक पत्ता अवश्य रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी दल के बिना भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण भोग स्वीकार नहीं करते। इसलिए हर भक्त को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पूजा और भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल हो।

तुलसी चढ़ाने का महत्व

यदि किसी घर में शालिग्राम जी विराजमान हैं तो उन पर हमेशा तुलसी का एक पत्ता चढ़ाकर रखना चाहिए। जब नया तुलसी दल अर्पित किया जाए, तब पहले से रखा हुआ पुराना पत्ता श्रद्धा के साथ हटा देना चाहिए। ऐसा करने से पूजा की मर्यादा बनी रहती है और भगवान की सेवा भी विधिपूर्वक संपन्न होती है। तुलसी और शालिग्राम का संबंध सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र माना गया है।

तुलसी के पत्ते का महत्व

देवी माहेश्वरी जी ने बताया कि जो तुलसी का पत्ता भगवान को अर्पित किया जा चुका है, उसका विशेष सम्मान करना चाहिए। यदि भूलवश भी वह पूजित तुलसी दल घर से बाहर चला जाता है या उसका अनादर होता है, तो इसे शुभ नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसा होने पर घर से मां लक्ष्मी की कृपा धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसलिए पूजा में चढ़े तुलसी दल को कभी भी सामान्य पत्तों की तरह नहीं फेंकना चाहिए।

पूजा में चढ़े तुलसी दल का क्या करें?

भगवान को अर्पित किए गए तुलसी दल को हमेशा श्रद्धा और सम्मान के साथ संभालना चाहिए। यदि तुलसी का पत्ता पुराना हो जाए, तो उसे किसी पवित्र स्थान पर रख सकते हैं, तुलसी के पौधे की जड़ में अर्पित कर सकते हैं या बहते जल में श्रद्धापूर्वक विसर्जित कर सकते हैं। कुछ लोग उसे चरणामृत के साथ ग्रहण भी करते हैं। मुख्य बात यह है कि पूजित तुलसी का कभी अपमान न हो और उसे कूड़े में न फेंका जाए।

तुलसी का सम्मान क्यों आवश्यक?

सनातन धर्म में तुलसी को सुख, शांति, समृद्धि और भगवान की कृपा का प्रतीक माना गया है। जिस घर में तुलसी का आदर होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का वास माना जाता है। तुलसी की नियमित पूजा, दीपदान और जल अर्पित करने से घर का वातावरण पवित्र बना रहता है। इसी कारण तुलसी के प्रत्येक पत्ते को भी श्रद्धा के साथ देखा जाता है।

धार्मिक मान्यता और श्रद्धा का संदेश

देवी माहेश्वरी जी का संदेश है कि भगवान को अर्पित की गई किसी भी पूजा सामग्री का सम्मान करना चाहिए, विशेष रूप से तुलसी दल का। यदि भूलवश कोई त्रुटि हो जाए तो भगवान से क्षमा प्रार्थना करें और आगे से अधिक सावधानी रखें। तुलसी का आदर केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और भगवान के प्रति समर्पण का प्रतीक है। यह मान्यता धार्मिक परंपराओं और आस्था पर आधारित है। विभिन्न संप्रदायों और विद्वानों की मान्यताओं में कुछ अंतर हो सकता है, लेकिन सभी इस बात पर सहमत हैं कि तुलसी का सम्मान करना, उसका अनादर न करना और पूजा में उसके महत्व को समझना प्रत्येक श्रद्धालु का कर्तव्य माना गया है।

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