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Devi Neha Saraswat: जीवन में मर्यादा को कैसे बनाएं रखें, देवी नेहा सारस्वत ने बताया सरल उपाय

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
देवी नेहा निधि सारस्वत
सार

Life Values: जीवन में मर्यादा बनाए रखने का सबसे सरल उपाय है कि अपनी पसंद से जीवन जीएं, लेकिन संस्कारों और जिम्मेदारियों को कभी न छोड़ें। हर छोटी-बड़ी बात पर बहस करने से बचें, हर किसी को सफाई देने की आदत छोड़ें और लोगों की आलोचनाओं से प्रभावित न हों।
 

Devi Neha Saraswat
Personal Growth: मनुष्य का जीवन तभी सुंदर बनता है, जब उसमें मर्यादा, संयम और अच्छे संस्कार हों। धन, सुंदरता या प्रसिद्धि कुछ समय के लिए लोगों को आकर्षित कर सकती है, लेकिन मर्यादित व्यवहार हमेशा सम्मान दिलाता है। आज के समय में लोग दूसरों की बातों से बहुत जल्दी प्रभावित हो जाते हैं और अपनी खुशी छोड़कर समाज को खुश करने में लग जाते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि हर किसी को खुश करना कभी संभव नहीं होता। इसलिए जीवन में सबसे पहले अपने आचरण और मर्यादा को महत्व देना चाहिए।

देवी नेहा सारस्वत कहती हैं कि जीवन में अपनी पसंद की चीज़ों का आनंद लेना चाहिए। यदि आपको आराम से बैठकर चाय पीना अच्छा लगता है, तो उसे पूरे सुकून से पीजिए। अगर आपको अपनी पसंद के कपड़े पहनना अच्छा लगता है, तो जरूर पहनिए। लेकिन हर काम मर्यादा के दायरे में होना चाहिए। अपनी खुशी के लिए ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे परिवार, समाज या अपने संस्कारों पर प्रश्न उठे। स्वतंत्रता का अर्थ मनमानी नहीं होता, बल्कि जिम्मेदारी के साथ जीवन जीना ही सच्ची स्वतंत्रता है।

हर बात पर बहस करना आवश्यक नहीं

जीवन में कई बार ऐसे लोग मिलते हैं जो बिना किसी कारण के गलत बातें कहते हैं या बेवजह बहस करते हैं। ऐसे लोगों को समझाने में अपना समय और ऊर्जा बर्बाद करने की जरूरत नहीं होती। यदि कोई कहे कि कौवा सफेद होता है, तो उसे समझाने की आवश्यकता नहीं है। यदि कोई कहे कि शेर चाय पीता है, तो भी हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं है। कई बार मौन रहना सबसे बड़ा उत्तर होता है। बहस करने से केवल तनाव बढ़ता है, जबकि शांति बनाए रखने से मन भी प्रसन्न रहता है और समय भी बचता है।

हर किसी को सफाई देना करें बंद 

बहुत से लोग अपनी हर बात और हर फैसले की सफाई देते रहते हैं। वे चाहते हैं कि सभी लोग उन्हें सही समझें। लेकिन यह संभव नहीं है। हर व्यक्ति की सोच अलग होती है और हर कोई आपकी परिस्थिति या भावनाओं को नहीं समझ सकता। इसलिए बार-बार खुद को सही साबित करने की कोशिश करने के बजाय अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। जो लोग वास्तव में आपको जानते हैं, उन्हें सफाई की जरूरत नहीं होती और जो बिना कारण गलत समझना चाहते हैं, उन्हें कोई भी सफाई संतुष्ट नहीं कर सकती।

लोगों की बातें नहीं होतीं खत्म 

दुनिया का स्वभाव ही ऐसा है कि लोग हर परिस्थिति में कुछ न कुछ कहते ही रहते हैं। यदि आप सिर झुकाकर चलेंगे तो लोग कहेंगे कि बहुत बन रहे हैं। यदि आत्मविश्वास के साथ सीना तानकर चलेंगे तो कहेंगे कि इसमें घमंड आ गया है। यदि आप बिल्कुल अलग रहने की कोशिश करेंगे, तब भी लोग आलोचना करने का कोई न कोई कारण ढूंढ़ ही लेंगे। इसलिए दूसरों की बातों के आधार पर अपना जीवन नहीं बदलना चाहिए। जो लोग हर समय दूसरों की आलोचना करते हैं, उन्हें कभी संतुष्ट नहीं किया जा सकता।

भगवान को करें प्रसन्न 

मनुष्य को सबसे अधिक चिंता इस बात की करनी चाहिए कि उसके कर्म भगवान को पसंद आ रहे हैं या नहीं। यदि हमारे कार्य ईमानदारी, प्रेम, सेवा और सत्य के मार्ग पर हैं, तो वही सबसे बड़ी सफलता है। लोगों की प्रशंसा या आलोचना कुछ समय की होती है, लेकिन भगवान हमारे हर कर्म को देखते हैं। इसलिए ऐसा जीवन जीना चाहिए जिससे ईश्वर प्रसन्न हों और हमारा मन भी संतुष्ट रहे। जब मनुष्य अपने कर्मों को भगवान को समर्पित कर देता है, तब वह दूसरों की बातों से विचलित नहीं होता।

अच्छे कर्मों पर दें ध्यान 

जीवन में मर्यादा बनाए रखने का सबसे सरल उपाय है कि अपनी पसंद से जीवन जीएं, लेकिन संस्कारों और जिम्मेदारियों को कभी न छोड़ें। हर छोटी-बड़ी बात पर बहस करने से बचें, हर किसी को सफाई देने की आदत छोड़ें और लोगों की आलोचनाओं से प्रभावित न हों। दुनिया का काम कहना है, इसलिए हर आवाज़ पर ध्यान देने के बजाय अपने अच्छे कर्मों पर ध्यान दें। जब आपका आचरण मर्यादित होगा और आपके कर्म भगवान को प्रसन्न करने वाले होंगे, तब जीवन में सच्चा सुख, आत्मविश्वास और सम्मान अपने आप प्राप्त होगा। यही मर्यादित और सफल जीवन की सबसे बड़ी पहचान है।

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