Spiritual Practice: पार्थिव शिवलिंग की पूजा एक सरल, सुलभ और अत्यंत प्रभावशाली साधना है, जिसके माध्यम से भक्त भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं तथा अनेक यज्ञों, व्रतों और तीर्थों के समान पुण्यफल अर्जित कर सकते हैं।
Hindu Religious Rituals: प्रसिद्ध कथावाचक चतुर नारायण जी महाराज के अनुसार भगवान शिव की पार्थिव शिवलिंग पूजा अत्यंत पुण्यदायी मानी गई है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ मिट्टी से शिवलिंग बनाकर उसका नियमित पूजन करता है, उसे करोड़ों यज्ञों के समान फल प्राप्त होता है। इतना ही नहीं, उसे संसार में सुख, समृद्धि और सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति का लाभ मिलता है तथा मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। यह पूजा दान, व्रत, तीर्थयात्रा और विभिन्न यज्ञों के फल के समान मानी गई है।
महाराज जी बताते हैं कि शास्त्रों में अनेक प्रकार के यज्ञों का वर्णन मिलता है, जैसे अग्निष्टोम, वाजपेय और राजसूय यज्ञ। सामान्य व्यक्ति के लिए जीवन में इन सभी यज्ञों को करना संभव नहीं होता। इसी प्रकार संसार के सभी तीर्थों की यात्रा करना भी हर किसी के लिए संभव नहीं है। लेकिन जो व्यक्ति प्रतिदिन पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करके भगवान शिव की पूजा करता है, उसे इन सभी यज्ञों और तीर्थों का पुण्यफल प्राप्त हो जाता है। इसलिए यह साधना अत्यंत सरल और कल्याणकारी मानी गई है।
व्रतों का भी मिलता है फल
धार्मिक ग्रंथों में अनेक प्रकार के व्रत बताए गए हैं। चांद्रायण व्रत, तिथि व्रत, पर्व व्रत और विभिन्न देवताओं से जुड़े अनेक व्रतों का पालन करना हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता। पार्थिव शिवलिंग की पूजा को इतना श्रेष्ठ बताया गया है कि इसके द्वारा अनेक व्रतों के समान पुण्य प्राप्त होता है। यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा के साथ नियमित रूप से यह पूजा करता है तो उसके जीवन में कोई भी शुभ फल दुर्लभ नहीं रहता।
पार्थिव शिवलिंग के लिए शुद्ध मिट्टी
पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए सबसे पहले शुद्ध मिट्टी का चयन करना आवश्यक है। इसके लिए किसी पवित्र नदी के तट की मिट्टी सबसे उत्तम मानी गई है। यदि नदी उपलब्ध न हो तो तालाब, कुएं या किसी स्वच्छ जलाशय के किनारे की मिट्टी भी ली जा सकती है। मिट्टी लेते समय ऊपर की लगभग एक हाथ गहराई तक की मिट्टी हटा देनी चाहिए और नीचे की स्वच्छ मिट्टी ग्रहण करनी चाहिए। यदि मिट्टी निकालते समय हड्डी, प्लास्टिक, कांच, बाल या अन्य अशुद्ध वस्तुएं दिखाई दें तो उस स्थान की मिट्टी का उपयोग नहीं करना चाहिए।
मिट्टी को शुद्ध करने की विधि
घर लाने के बाद मिट्टी को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है। इसके बाद “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करते हुए उसमें थोड़ा दूध, घी और गंगाजल मिलाया जाता है। फिर मिट्टी को अच्छी तरह गूंथकर तैयार किया जाता है। ध्यान रखना चाहिए कि उसमें कंकड़, पत्थर या किसी प्रकार की अशुद्धि न रहे।
शिवलिंग और जलहरी का निर्माण
महाराज जी विशेष रूप से बताते हैं कि शिवलिंग और जलहरी को अलग-अलग नहीं बनाना चाहिए। दोनों का निर्माण एक साथ होना चाहिए। कई लोग पहले जलहरी बनाकर रखते हैं और फिर शिवलिंग को उसके ऊपर स्थापित कर देते हैं, लेकिन शास्त्रीय दृष्टि से यह उचित नहीं माना गया है। शिवलिंग और जलहरी का एकाकार स्वरूप अधिक श्रेष्ठ माना गया है। यदि किसी स्थान पर नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापित हो तो उसे भी जलहरी के साथ स्थिर और संयुक्त रूप से स्थापित करना चाहिए।
शिव परिवार की स्थापना का महत्त्व
पार्थिव शिवलिंग बनाते समय केवल शिवलिंग ही नहीं, बल्कि शिव परिवार का भी ध्यान रखना चाहिए। नंदी, गणेश जी, माता पार्वती और शिवगणों का भी निर्माण करना चाहिए। यदि विस्तृत आकृतियां बनाना कठिन लगे तो छोटी-छोटी मिट्टी की गोलियां बनाकर प्रतीक रूप में स्थापित किया जा सकता है। इससे संपूर्ण शिव परिवार की उपस्थिति मानी जाती है। साथ ही नागदेवता और रुद्र स्वरूपों का भी निर्माण करना शुभ माना गया है।
पूजन और अभिषेक की विधि
शिवलिंग का निर्माण पूर्ण होने के बाद “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करते हुए भगवान शिव का आवाहन किया जाता है। इसके पश्चात विधिपूर्वक स्नान, अभिषेक और पूजन किया जाता है। गंगाजल, शुद्ध जल, दूध, दही, घी और अन्य पवित्र पदार्थों से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। फिर उन्हें वस्त्र, यज्ञोपवीत, चंदन, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है।
भगवान शिव को प्रिय पुष्प और बिल्वपत्र
पूजा के अंत में भगवान शिव को बिल्वपत्र अवश्य अर्पित करना चाहिए, क्योंकि यह उन्हें अत्यंत प्रिय है। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के पुष्प भी चढ़ाए जाते हैं। आक, धतूरा और कनेर के फूल विशेष रूप से भगवान शिव को प्रिय बताए गए हैं। इनमें पीले कनेर का पुष्प अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धा और प्रेम से अर्पित किया गया यह पुष्प भगवान शिव को प्रसन्न करता है और भक्त पर उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस प्रकार पार्थिव शिवलिंग की पूजा एक सरल, सुलभ और अत्यंत प्रभावशाली साधना है, जिसके माध्यम से भक्त भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकता है तथा अनेक यज्ञों, व्रतों और तीर्थों के समान पुण्यफल अर्जित कर सकता है।