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Chatur Narayan Ji Maharaj: नरकों की यातना से बचने के क्या हैं आसान उपाय? चतुर नारायण जी महाराज ने बताया

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कथावाचक चतुर नारायण जी महाराज
सार

Truth of Life: नरक को केवल मृत्यु के बाद मिलने वाली सजा मानना पर्याप्त नहीं है। इस संसार में भी अनेक लोग और जीव ऐसी कठिन परिस्थितियों में जीवन जी रहे हैं, जिन्हें देखकर नरक का वास्तविक अर्थ समझ में आता है।
 

Chatur Narayan Ji Maharaj
Spiritual Knowledge: अक्सर जब नरक की बात होती है तो लोगों के मन में यही विचार आता है कि मृत्यु के बाद पाप करने वालों को नरक में जाना पड़ता है, लेकिन संतों का कहना है कि नरक केवल मृत्यु के बाद मिलने वाली जगह नहीं है, बल्कि उसके अनेक रूप इस संसार में भी दिखाई देते हैं। यदि हम अपने आसपास ध्यान से देखें तो समझ में आएगा कि कितने जीव-जंतु और मनुष्य ऐसी परिस्थितियों में जीवन बिता रहे हैं, जो किसी नरक से कम नहीं हैं। इसलिए नरक को केवल एक कल्पना मानने के बजाय हमें अपने आस-पास के दुखों को भी समझना चाहिए।

चतुर नारायण जी महाराज बताते हैं कि यदि कोई जीव गंदी नाली में पड़ा हुआ है, गंदगी में अपना जीवन बिताने को मजबूर है, तो क्या वह नरक जैसी यातना नहीं झेल रहा है? इसी प्रकार गर्मियों के दिनों में जंगलों में रहने वाले बंदरों और दूसरे जीवों की स्थिति भी बहुत दयनीय हो जाती है। पेड़-पौधे कम हो गए हैं, फल नहीं मिलते, पानी के स्रोत सूख जाते हैं और तपती धूप में वे भूख-प्यास से भटकते रहते हैं। उनका यह संघर्ष भी किसी नरक से कम नहीं है। इससे हमें यह समझना चाहिए कि भगवान की बनाई इस सृष्टि में अनेक जीव कठिन परिस्थितियों में जीवन जी रहे हैं। उनके दुख को देखकर मन में करुणा और दया का भाव जागना चाहिए।

अस्पतालों में भी दिखाई देता है जीवित नरक

महाराज जी कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति जीते-जी नरक का अनुभव करना चाहता है तो उसे किसी बड़े अस्पताल में जाकर देखना चाहिए। वहां अनेक लोग ऐसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे होते हैं कि उनकी पीड़ा देखकर मन कांप उठता है। कोई असहनीय दर्द सह रहा है, कोई महीनों से बिस्तर पर पड़ा है, तो कोई अपने जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा है। कई बार ऐसी स्थितियों को देखकर मन में वैराग्य का भाव उत्पन्न होता है। ऐसा लगता है कि हे प्रभु! किसी को भी इतनी कठिन पीड़ा न सहनी पड़े। जीवन रहते हुए भी जब इंसान कुछ नहीं कर पाता और केवल कष्ट झेलता है, तब वह स्थिति किसी नरक से कम नहीं होती हैं।

मनुष्य अपने कर्मों पर दें ध्यान

संसार में मिलने वाले अनेक दुख हमें यह सिखाते हैं कि हमारे कर्मों का बहुत बड़ा महत्व है। अच्छे कर्म सुख का मार्ग बनाते हैं, जबकि बुरे कर्म दुख और कष्ट का कारण बनते हैं। इसलिए मनुष्य को हमेशा सत्य, ईमानदारी, दया, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए। जब व्यक्ति दूसरों को कष्ट पहुंचाने, छल-कपट करने, अहंकार और पाप में जीवन बिताने लगता है, तब उसके जीवन में भी दुखों का प्रवेश होने लगता है। इसलिए समय रहते अपने जीवन को सुधारना ही सबसे बड़ी बुद्धिमानी है।

भगवान के नाम का आश्रय सबसे बड़ा सहारा

चतुर नारायण जी महाराज कहते हैं कि यदि मनुष्य सचे मन से भगवान का आश्रय ले ले, उनका नाम जपे और भक्ति में लग जाए, तो भगवान अत्यंत दयालु हैं। वे अपने भक्तों के पुराने से पुराने पापों को भी क्षमा करने की शक्ति रखते हैं। भगवान का नाम मन को शांति देता है, जीवन को सही दिशा देता है और व्यक्ति के भीतर अच्छे संस्कारों का विकास करता है। भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। सच्ची भक्ति का अर्थ है भगवान पर विश्वास रखना, उनके बताए मार्ग पर चलना, सभी जीवों के प्रति दया रखना और अपने जीवन को सदाचार से भरना। ऐसा करने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे दुखों से ऊपर उठने लगता है।

जीवन में नरक का वास्तविक अर्थ 

नरक को केवल मृत्यु के बाद मिलने वाली सजा मानना पर्याप्त नहीं है। इस संसार में भी अनेक लोग और जीव ऐसी कठिन परिस्थितियों में जीवन जी रहे हैं, जिन्हें देखकर नरक का वास्तविक अर्थ समझ में आता है। इसलिए हमें दूसरों के दुख को समझना चाहिए, अपने कर्मों को सुधारना चाहिए और भगवान के नाम का आश्रय लेना चाहिए। सच्चे मन से की गई भक्ति, अच्छे कर्म और करुणा से भरा जीवन मनुष्य को सांसारिक दुखों से भी बचाता है और भविष्य में मिलने वाली भयंकर नरक की यातनाओं से भी रक्षा करता है। भगवान दयालु हैं और जो श्रद्धा तथा विश्वास के साथ उनकी शरण में आता है, वे उसे कभी निराश नहीं करते हैं।

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