facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  saint stories  acharya shri ramchandra das ji maharaj told what is the true incident associated with chitrakoot dham

True Incident: चित्रकूट धाम की सत्य घटना कौन-सी है? आचार्य श्री रामचंद्र दास जी महाराज बताई कहानी

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
आचार्य श्री रामचंद्र दास जी महाराज
सार

Divine Miracle: चित्रकूट धाम केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और चमत्कार की भूमि है, जहां आज भी भक्तों को दिव्य अनुभूतियां होती हैं।

Acharya Shri Ramchandra Das Ji Maharaj
Religious Miracle: चित्रकूट धाम भारत की उन पवित्र स्थलों में गिना जाता है जहां आज भी भगवान श्रीराम और हनुमान जी की कृपा के अनेक चमत्कार सुनने को मिलते हैं। संत-महात्मा और श्रद्धालु मानते हैं कि यहां की पवित्र भूमि पर सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती। ऐसी ही एक सत्य घटना आचार्य श्री रामचंद्र दास जी महाराज ने सुनाई थी, जिसे आज भी लोग श्रद्धा और विश्वास के साथ याद करते हैं। बहुत समय पहले की बात है। एक बड़े सरकारी अधिकारी थे। उनका परिवार धार्मिक विचारों वाला था और उन्हें कामतानाथ मंदिर तथा हनुमान जी में गहरी आस्था थी। उनके दो छोटे-छोटे बेटे थे। एक दिन उन्होंने निश्चय किया कि पूरे परिवार के साथ चित्रकूट धाम जाकर दर्शन करेंगे।

वे अपनी पत्नी और दोनों बच्चों को लेकर चित्रकूट पहुंचे। वहां पहुंचते ही उनके मन में सबसे पहले रामघाट में स्थित पवित्र मंदाकिनी नदी में स्नान करने का विचार आया। मान्यता है कि मंदाकिनी में स्नान करने से मन और आत्मा दोनों पवित्र हो जाते हैं।

मंदाकिनी नदी में घटी दुर्घटना

अधिकारी ने अपने बड़े बेटे को घाट की सीढ़ियों पर बैठा दिया और स्वयं नदी में स्नान करने उतर गए। उनकी पत्नी ने सोचा कि जब पति स्नान कर रहे हैं तो वह भी स्नान कर लें। छोटा बच्चा बहुत छोटा था, इसलिए उसे अकेला छोड़ना ठीक नहीं समझा और उसे अपनी गोद में लेकर ही नदी में उतर गईं। अधिकारी सूर्य भगवान को अर्घ्य देने लगे। उसी समय अचानक उनकी पत्नी का पैर फिसल गया। संतुलन बिगड़ते ही छोटा बच्चा उनकी गोद से छूटकर तेज बहाव में बहने लगा। 

मंदाकिनी का जल उस समय काफी गहरा और प्रवाह तेज था। देखते ही देखते बच्चा दूर निकल गया। मां घबरा उठी। उसने जोर-जोर से अपने पति को आवाज दी। दोनों पति-पत्नी रोते हुए बच्चे को ढूंढ़ने लगे, लेकिन कहीं उसका पता नहीं चला। आसपास मौजूद लोग भी खोजने लगे, परंतु बच्चा दिखाई नहीं दिया।

हनुमान जी से की गई प्रार्थना

उस समय उस मां के मन में केवल भगवान का ही सहारा था। सामने दूर पहाड़ी पर हनुमान धारा के दर्शन हो रहे थे। मां ने कांपते हाथों से जल उठाया और आंखों में आंसू भरकर हनुमान जी से प्रार्थना की। उसने कहा कि हे हनुमान जी महाराज! यह पुत्र आपकी कृपा से मिला है। यदि किसी प्रकार इसके प्राण बच जाएं, तो मैं इसे लेकर आपके दर्शन करने अवश्य आऊंगी। उसकी प्रार्थना सच्चे मन और पूर्ण विश्वास से भरी हुई थी। वहां उपस्थित लोग भी भावुक होकर भगवान से प्रार्थना करने लगे।

अद्भुत चमत्कार

जैसे ही मां ने प्रार्थना पूरी की, तभी अचानक वहां एक बहुत विशालकाय बंदर प्रकट हुआ। उसे देखकर सभी लोग आश्चर्य में पड़ गए। वह बंदर तेजी से मंदाकिनी नदी में कूद पड़ा। कुछ ही क्षणों बाद वह बंदर उसी बच्चे को अपने हाथों में पकड़कर बाहर ले आया। उसने बच्चे को सुरक्षित उसकी मां की गोद में छोड़ दिया। मां अपने बेटे को जीवित देखकर फूट-फूटकर रोने लगी। पिता भी भाव-विभोर हो गए। सबसे आश्चर्य की बात यह थी कि जैसे ही बंदर ने बच्चे को मां की गोद में छोड़ा, वह तुरंत वहां से अदृश्य हो गया। किसी को समझ नहीं आया कि वह कहां गया।

आज भी जीवित है श्रद्धा और विश्वास

इस घटना को वहां के लोगों ने हनुमान जी का प्रत्यक्ष चमत्कार माना। आज भी चित्रकूट आने वाले श्रद्धालु इस कथा को बड़े विश्वास और श्रद्धा के साथ सुनाते हैं। लोगों का मानना है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना पर भगवान अवश्य कृपा करते हैं। चित्रकूट धाम केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और चमत्कार की भूमि है, जहां आज भी भक्तों को दिव्य अनुभूतियां होती हैं।

ये भी पढ़ें -  सभी कांड में सुन्दर कांड की महिमा सबसे अधिक क्यों है? रसराज जी महाराज ने बताया महत्व

ये भी देखें

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel