Kashi Vishwanath Temple: सोमवार का दिन देवों के देव महादेव को समर्पित है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही उनके लिए सोमवार का व्रत भी रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। सोमवार के दिन बाबा की नगरी काशी में विश्वनाथ मंदिर में देवों के देव महादेव की विशेष पूजा की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि विश्वनाथ मंदिर में सप्तर्षि आरती कब की जाती है? आइए जानते हैं इसके बारे में सबकुछ।
काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास (History of Kashi Vishwanath Temple)
काशी विश्वनाथ मंदिर देवों के देव महादेव को समर्पित है। यह मंदिर गंगा नदी के तट पर स्थित है। सनातन शास्त्रों में निहित है कि काशी बाबा की नगरी है। सरल शब्दों में काशी को भगवान शिव की नगरी भी कहा जाता है। दैवीय काल में भगवान विष्णु ने भी काशी में निवास किया था। इस नगरी में बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग है। इसी कारण काशी में स्थित भगवान शिव के मंदिर को काशी विश्वनाथ मंदिर कहा जाता है।
सप्तर्षि आरती कब की जाती है? (When is Saptarishi Aarti performed?)
काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रतिदिन शाम 07:00 बजे से 08:15 बजे तक सप्तर्षि आरती की जाती है। वहीं पूर्णिमा तिथि पर सप्तर्षि आरती एक घंटे पहले यानी शाम 06:00 बजे शुरू होती है। सप्तर्षि आरती में भाग लेने के लिए भक्तों को शाम 06:30 बजे तक प्रवेश करने की अनुमति है। वहीं पूर्णिमा तिथि पर शाम 05:30 बजे तक प्रवेश करना उचित है।
कौन करता है सप्तर्षि आरती? (Who performs Saptarishi Aarti?)
धार्मिक मान्यता है कि काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रतिदिन शाम 07:00 बजे भगवान महादेव की आरती करने के लिए सात ऋषि आते हैं। इसी मान्यता के आधार पर प्रतिदिन सप्तर्षि आरती की जाती है। इस आरती में सात अलग-अलग गोत्रों के पंडित मिलकर आरती करते हैं।