Ramayana Story: मंदिरों में हनुमान जी की मूर्तियों को सिंदूर से सजाया जाता है और भक्त भी उन्हें सिंदूर अर्पित करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि हनुमान जी को सिंदूर क्यों इतना प्रिय है? आइए इसके पीछे की कथा जानते हैं।
Ramayana Story: भगवान हनुमान के पराक्रम की कहानियां तो हमने कई ग्रंथों में पढ़ी और कई बार सुनी भी हैं। भगवान श्रीराम के परम भक्त और रामायण के महान नायक हनुमान जी की भक्ति और शक्ति की कहानियां हर भारतीय के हृदय में बसी हैं। मंदिरों में हनुमान जी की मूर्तियों को सिंदूर से सजाया जाता है और भक्त भी उन्हें सिंदूर अर्पित करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि हनुमान जी को सिंदूर क्यों इतना प्रिय है? इस प्रथा के पीछे एक मनोरम कथा छिपी हुई है। आइए जानते हैं कि क्या है इसकी कथा...
हनुमान जी की सिंदूर से जुड़ी कथा
हनुमान जी की सिंदूर से जुड़ी कथा रामायण के एक प्रसंग में उल्लेखित है। यह कथा का उल्लेख तुलसीदास जी के श्रीरामचरितमानस और अन्य लोककथाओं में किया गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार हनुमान जी ने माता सीता को अपनी मांग में सिंदूर लगाते हुए देखा। उत्सुकतावश उन्होंने माता सीता से पूछा, 'माता, आप अपने माथे पर यह लाल रंग क्यों लगाती हैं?'
माता सीता ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, 'हनुमान, यह सिंदूर मैं प्रभु श्रीराम की दीर्घायु, सुख और समृद्धि के लिए लगाती हूं। यह मेरे पति के प्रति मेरे प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।' माता सीता के शब्द हनुमान जी के हृदय में बैठ गए। अपने प्रभु श्रीराम की भक्ति में डूबे रहने वाले हनुमान जी ने सोचा यदि माता सीता मांग में थोड़ा सा सिंदूर लगाने से प्रभु की रक्षा और सुख की कामना करती हैं तो वे अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाकर श्रीराम के प्रति अपनी असीम भक्ति व्यक्त करेंगे। इसके बाद, हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लपेट लिया और श्रीराम के सामने चले गए। यह भी पढ़ें: Mahakaleshwar: महाकाल के रूप में कैसे प्रकट हुए भोलेनाथ? जानिए कैसे कर सकते हैं महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन
श्रीराम ने दिया हनुमान जी को आशीर्वाद
जब श्रीराम ने हनुमान जी को इस रूप में देखा तो वे आश्चर्यचकित हो गए और उन्होंने हनुमान जी से इस रूप का कारण पूछा। हनुमान जी ने बड़े ही भोलेपन से कहा, 'प्रभु, माता सीता ने बताया कि सिंदूर आपके लिए शुभ है। मैं आपका परम भक्त हूं, इसलिए मैंने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाया, ताकि आपकी रक्षा हो और आप हमेशा सुखी रहें।'
हनुमान जी का यह भक्ति-भाव और प्रेम देखकर श्रीराम अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया, जो इस सिंदूर से जुड़ गया। प्रभु श्रीराम ने कहा, 'हनुमान, तुम्हारी यह भक्ति अनुपम है। आज से जो भी भक्त तुम्हें सच्चे मन से सिंदूर अर्पित करेगा, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी, और उसे मेरी कृपा प्राप्त होगी।' इसके बाद से हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। यह भी पढ़ें: Lakshmi Chalisa: लक्ष्मी चालीसा जाप करने के लाभ, जानिए इसका महत्व