Pradyumna Ganesh Chaturthi : प्रद्युम्न चतुर्थी भगवान गणेश और उनके विभिन्न स्वरूपों की आराधना के लिए एक बेहद पवित्र तिथि है। मान्यता है कि इस दिन पूरी निष्ठा से व्रत और पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं, रुके हुए काम बन जाते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।इस विशेष दिन पर पूजा का पूरा फल पाने के लिए शास्त्रों में कुछ नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं कि प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन आपको क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए ।
प्रद्युम्न चतुर्थी पर क्या करें?
सुबह सूर्योदय से पहले उठें। घर की साफ-सफाई के बाद पवित्र जल से स्नान करें। साफ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें।
घर के ईशान कोण में एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। उन्हें अक्षत , रोली, चंदन और पुष्प अर्पित करें।
गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। पूजा के दौरान उन्हें 21 दूर्वा दल की गांठें बनाकर अर्पित करें। इसके साथ ही उन्हें उनकी पसंदीदा मिठाई—मोदक या बूंदी के लड्डू का भोग जरूर लगाएं।
पूजा के समय गणेश जी के प्रभावशाली मंत्रों का जाप करें, जैसे:
"ॐ गं गणपतये नमः" या "वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥"
शाम के समय प्रद्युम्न चतुर्थी की व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें। बिना कथा सुने व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता।
चतुर्थी का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना पूरा नहीं माना जाता। रात में जब चंद्रोदय हो, तब एक तांबे या चांदी के लोटे में कच्चा दूध, जल, चंदन और रोली मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।
इस दिन किसी जरूरतमंद, गरीब या ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। गाय को हरा चारा खिलाना भी इस दिन बेहद शुभ माना जाता है।
प्रद्युम्न चतुर्थी पर क्या न करें?
चतुर्थी के दिन घर में पूरी तरह सात्विक माहौल होना चाहिए। इस दिन मांस, मछली, अंडा, शराब के साथ-साथ प्याज और लहसुन का सेवन भी वर्जित माना गया है। जो लोग व्रत नहीं भी रख रहे हैं, उन्हें भी इस दिन सात्विक भोजन ही करना चाहिए।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान गणेश ने तुलसी जी के विवाह प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था, जिससे रुष्ट होकर तुलसी जी ने उन्हें श्राप दिया था और गणेश जी ने तुलसी को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया था। इसलिए गणेश जी की पूजा में भूलकर भी तुलसी के पत्ते न चढ़ाएं।
व्रत केवल भूखे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह मन के संयम का पर्व है। इस दिन किसी पर क्रोध न करें, अपशब्द न बोलें और न ही किसी की चुगली या बुराई करें। घर में कलह का माहौल रहने से लक्ष्मी जी और गणेश जी रुष्ट हो जाते हैं।
पूजा की थाली तैयार करते समय या पूजा में बैठते समय ध्यान रखें कि आपने चमड़े का बेल्ट, पर्स या चप्पल न पहनी हो। चमड़े को पूजा-पाठ में अशुद्ध माना जाता है।
चूहा भगवान गणेश का वाहन है। इस दिन घर या घर के आसपास किसी भी जीव, विशेषकर चूहों को नुकसान न पहुंचाएं और न ही उन्हें मारें। ऐसा करने से दोष लगता है।
यदि आपने फलाहार व्रत रखा है, तो बार-बार खाने से बचें। दिन में केवल एक बार फल या दूध का सेवन करें। व्रत में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का ही प्रयोग करें, वह भी केवल शाम की पूजा के बाद।
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)