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Pradosh Vrat : कब रखा जाएगा नवंबर का पहला प्रदोष व्रत जानिए तिथि

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Pradosh Vrat :  नवंबर का पहला प्रदोष व्रत कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाएगा। यह कार्तिक महीने का भी पहला प्रदोष व्रत है। चूंकि यह शुक्रवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे 'शुक्र प्रदोष व्रत' कहा जाता है।

Pradosh Vrat
Pradosh Vrat :  नवंबर का पहला प्रदोष व्रत कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाएगा। यह कार्तिक महीने का भी पहला प्रदोष व्रत है। चूंकि यह शुक्रवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे 'शुक्र प्रदोष व्रत' कहा जाता है। इस त्रयोदशी को 'धन त्रयोदशी' भी कहा जाता है। इस दिन प्रदोष व्रत और धनतेरस एक साथ पड़ रहे हैं, जिससे भगवान शिव के साथ-साथ देवी लक्ष्मी, कुबेर और भगवान गणेश की पूजा करने का भी अवसर मिलता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा-पाठ करने से धन, संपत्ति, लंबी आयु, स्वास्थ्य और जीवन में सर्वांगीण प्रगति प्राप्त होती है। आइए, प्रदोष व्रत की तारीख और शुभ मुहूर्त के बारे में जानते हैं।

नवंबर 2026 के पहले प्रदोष व्रत की तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी। 'उदया तिथि' के आधार पर त्रयोदशी तिथि 7 नवंबर को पड़ती है लेकिन नवंबर का पहला प्रदोष व्रत शुक्रवार 6 नवंबर को रखा जाएगा क्योंकि उस दिन 'प्रदोष काल'  के समय त्रयोदशी तिथि मौजूद रहेगी। यह 'शुक्र प्रदोष व्रत' होगा।

प्रदोष व्रत मुहूर्त 2026

6 नवंबर को प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 2 घंटे 37 मिनट का है। व्रत रखने वाले लोग शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे के बीच भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। इसके अलावा, उस दिन 'ब्रह्म मुहूर्त' सुबह 4:52 बजे से 5:44 बजे तक है, जबकि 'अभिजीत मुहूर्त'जो कि एक अत्यंत शुभ समय माना जाता है सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:26 बजे के बीच है। प्रदोष के दिन 'निशिता मुहूर्त' रात 11:39 बजे से मध्यरात्रि के बाद 12:31 बजे तक रहेगा। 

धनतेरस और प्रदोष का संयोग

धनतेरस और शुक्र प्रदोष व्रत  एक ही दिन पड़ रहे हैं। इस दिन 'प्रदोष काल' के समय देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की पूजा की जाएगी, जबकि शिवालयों में भगवान शिव की भी विधि-विधान से पूजा होगी। धनतेरस के अवसर पर लोग सोना, चांदी, वाहन, आभूषण या संपत्ति जैसी चीजें खरीद सकते हैं।

प्रदोष के दिन विष्कुंभ योग और हस्त नक्षत्र

इस महीने का प्रदोष व्रत 'विष्कुंभ योग' और 'हस्त नक्षत्र' के संयोग में पड़ रहा है। विष्कुंभ योग सुबह शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 4:10 बजे तक रहेगा जिसके बाद 'प्रीति योग' शुरू हो जाएगा। इसी तरह, 'हस्त नक्षत्र' भी सुबह शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 4:43 बजे तक रहेगा जिसके बाद 'चित्रा नक्षत्र' आएगा।

प्रदोष व्रत रखने के क्या लाभ हैं?

जो लोग प्रदोष व्रत रखते हैं और 'प्रदोष काल' में भगवान शिव की पूजा करते हैं, उनके सभी दोष दूर हो जाते हैं। इससे सुख, समृद्धि, धन-संपत्ति, लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। भगवान शिव की कृपा से उनके सभी कष्ट और संकट दूर हो जाते हैं।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

 

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